टॉयलेट साइन देखकर बना था एंडरॉयड लोगो और अंतरीक्ष में भी है एंडरॉयड ​​डिवाइस, जानें एंडरॉयड से जुड़े 20 दिलचस्प बातें

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एंडरॉयड स्मार्टफोन का नाम सुनते ही आपके ज़हन में एक ऐसा फोन आता है जो उपयोग में बेहद आसान है और जिसमें ढेर सारे ऐप्स व गेम्स उपलब्ध हों। एंडरॉयड फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हरेक बजट में उपलब्ध है। छोटे से छोटे बजट में भी आप एंडरॉयड स्मार्टफोन की खरीदारी कर सकते हैं। वहीं इसने लोगों के जीवन को आसान बना दिया। हर काम आज फोन से ही संभव है। परंतु आपको मालूम है कि इस एंडरॉयड का बनना बहुत आसान नहीं था। कोई कोशिशों के बाद आज का यह स्मार्ट आॅपरेटिंग सिस्टम निकला है। सबसे पहले बता दूं कि एंडरॉयड गूगल का था ही नहीं और एंडरॉयड लोगो के पीछे भी बहुत बड़ा ट्विस्ट है। ऐसे ही कई दिलचस्प पहलु हैं एंडरॉयड के पीछे। आइए जानें एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम के बारे में ऐसी 20 रोचक बातें।

1. सबसे पहले तो आपको यही जानकर हैरानी होगी कि एंडरॉयड का निर्माण मोबाइल आॅपरेटिंग सिस्टम के रूप में किया ही नहीं गया था। बल्कि इस ओएस को डिजिटल कैमरे के लिए बनाया गया था। बाद में इसके निर्माताओं ने इसमें बदलाव किया और स्मार्टफोन के लिए तैयार किया। आ गया एंडरॉयड का सबसे लेटेस्ट ओएस ‘एंडरॉयड पी’, जानें कैसे अभी करें अपने फोन में इंस्टॉल

2. वर्ष 2003 में एंडी रुबिन, रिच माइनर, निक सेयर्स और क्रिस व्हाइट ने एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम का विकास किया और जिस कंपनी द्वारा इसे विकसित किया गया था उसका नाम था एंडरॉयड आईएनसी। वह गूगल नहीं था। एंडरॉयड ओरियो की 7 शानदार सेटिंग जिससे आप हैं अनजान

3. हालांकि डेवपलमेंट के साथ ही इसका प्रदर्शन नहीं किया गया बल्कि इसके लिए एक वर्ष का समय लगा। वर्ष 2004 में पहली बार एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम को दिखाया गया। परंतु नियती को कुछ और ही मंजूर था।
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4. अगले ही साल वर्ष 2005 में एंडरॉयड आईएनसी का अधिग्रहण गूगल ने कर लिया और एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम के विस्तार और विकास की बागडोर गूगल के हाथो में चली गई। एंडरॉयड आईएनसी के लिए गूगल 50 मिलियन डॉलर की कीमत चुकाई गई।

5. गूगल द्वारा एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम को अधिकारिक रूप से लॉन्च करने में दो साल का समय लगा। 5 नवंबर 2007 को इस आॅपरेटिंग सिस्टम को पहली बार मोबाइल यूजर्स के लिए पेश किया गया। आपके एंडरॉयड फोन में नहीं हो रही है ऐप इंस्टॉल तो ऐसे करें समाधान

6. आपको शायद यह नहीं मालूम होगा कि एंडरॉयड, लिनक्स सॉफ्टवेयर आधारित आॅपरेटिंग सिस्टम है। लिनक्स का उपयोग कंप्यूटर और मोबाइल दोनों के लिए किया जाता है।

जानें एंडरॉयड से जुड़े 20 दिलचस्प बातें
पहला एंडरॉयड प्रोटो टाइप फोन

7. इसमें कोई दो राय नहीं कि एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम आने के बाद टच स्क्रीन फोन का एक्षत्र राज हो गया लेकिन आपको यह जानकर थोड़ा अचंभा भी होगा कि इस आॅपरेटिंग सिस्टम का प्रदर्शन जिस प्रोटोटाइप फोन पर किया गया था वह क्वर्टी कीपैड वाला था और देखने में पुराने ब्लैकबेरी फोन के समान था।

8. आॅपरेटिंग सिस्टम का प्रदर्शन करने के बाद भी यूजर को पहला एंडरॉयड फोन के लिए लगभग एक साल का इंतजार करना पड़ा। 23 सितंबर 2008 को पहला एंडरॉयड फोन पेश किया गया जो मेबाइल यूजर के लिए उपलब्ध हुआ।

9. इस स्मार्टफोन का निर्माण एचटीसी द्वारा किया गया था और उसे एचटीसी ड्रीम जी1 के नाम से पेश किया गया था। उस वक्स गूगल नेक्सस या पिक्सल फोन नहीं था। हालांकि यह फोन भारत में उपलब्ध नहीं हुआ।

जानें एंडरॉयड से जुड़े 20 दिलचस्प बातें
पहला एंडरॉयड स्मार्टफोन एचटीसी ड्रीम जी1 जो यूजर्स के लिए उपलब्ध हुआ।

10. एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम का नाम किसी मिठाई पर होता है। परंतु अब तक सिर्फ दो ही ऐसे संस्करण हैं जिनका नाम मिठाई पर नहीं रखा गया है। ये हैं एडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम 1.0 और एंडरॉयड 1.1। जानकारी के अनुसार इन एडरॉयड 1.0 को अल्फा और एंडरॉयड 1.1 बीटा कहा गया। ये दोनों आॅपरेटिंग सिस्टम आम यूजर के लिए उपलब्ध नहीं हुए थे।

11. जो पहला एंडरासॅयड फोन यूजर क लिए उपलब्ध हुआ वह एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम 1.5 पर कार्य करता था और इसका नाम कपकेक दिया गया। एचटीसी ड्रीम जी1, 1.5 कपकेक पर ही रन करता था।
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12. गूगल एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम का नाम मिठाइयों के नाम पर रखता है। इसके साथ ही आॅपरेटिंग सिस्टम के नाम अंग्रेजी के अल्फाबेट के अनुसार भी चलते हैं।
A ऐस्ट्रो – एंडरॉयड 1.0
B बेंडर – एंडरॉयड 1.5 ;1.0 और 1.0 टेस्टिंग संस्करण थे इसलिए इन्हें मीठाई के नाम पर नहीं रखा गया। कई जगह अल्फा और बीटा संस्करण भी कहा गया।द्ध
C कपकेक – एंडरॉयड 1.5
D डोनट – एंडरॉयड 1.6
E एक्लेयर – एंडरॉयड 2.0
F फ्रोयो – एंडरॉयड 2.2
G जिंजरब्रेड – एंडरॉयड 2.3
H हनीकॉम्ब – एंडरॉयड 3.0
I आईस क्रीम सैंडविच – एंडरॉयड 4.0
J जेली बीन – एंडरॉयड 4.1 – 4.3.1
K किटकैट – एंडरॉयड 4.4 – 4.4.4
L लॉलीपॉप – एंडरॉयड 5.0 – 5.1.1
M मार्शमेलो – एंडरॉयड 6.0 – 6.0.1
N नुगट – एंडरॉयड 7.0 – 7.1
O ओरियो – एंडरॉयड 8.0 – 8.1
जानें एंडरॉयड से जुड़े 20 दिलचस्प बातें
P एंडरॉयड पी – फिलहाल गूगल ने इसे एंडरॉयड पी कहा है। नाम और संस्करण नहीं बताया है। जुलाई तक इस फोन के बारे में और जानकारी आ सकती है। वहीं सितंबर तक इसे अधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा सकता है।
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13. अब तक एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम 3.0 हनीकॉम्ब एक मात्र ऐसा आॅपरेटिंग सिस्टम रहा है जो किसी फोन में उपलब्ध नहीं हुआ। इसके गूगल ने खास कर टैबलेट के लिए डिजाइन किया था। इसे बाद सभी ओएस फोन और टैबलेट दोनों के लिए उपलब्ध हुए। जानें कंप्यूटर में क्यों नहीं होते A और B ड्राइव, C क्यों होता है डिफॉल्ट ड्राइव

जानें एंडरॉयड से जुड़े 20 दिलचस्प बातें
14. आपने देखा होगा कि एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम के लिए एक हरे रोबोट को दिखाया जाता है। परंतु आपको जानकर हैरानी होगी कि गूगल के टीम द्वारा इसे एंडरॉयड नहीं कहा जाता है। टीम से बगड्राइड कहती है। कहा जाता है कि एंडरॉयड में हमेशा बग कैशे होता और टीम उसे ठीक करने की कोशिश करती है इसलिए उसे बगर्डाइड कहती है।
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15. हालांकि सबसे दिलचस्प कहानी एंडरॉयड लोगो बनने की है। इस लोगो के निर्माण का भार ईरीना ब्लॉक को दिया गया था जो कि गूगल मार्केटिंग टीम में थीं। गूगल के लोगो में जो रोबोट दिखाई देता है उसे एयरटपोर्ट पर टायलेट पर दिए गए पुरूष और महिला टॉयलेट साइन से प्रेरिट होकर बनाया गया था। वहीं खास बात यह थी कि इस लोगो को महज 5 मिनट में तैयार लिया गया था।

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16. 2004 में एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम की खरीदारी के लिए सैमसंग के पास भी मौका था लेकिन कंपनी ने यह कहकर नहीं इस मना कर दिया था कि इसमें कंपनी को कोई संभावना नहीं दिखती।

17. गूगल ओपन हैंडसेट अलाइंस का मेंबर है और कंपनी ने एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म को ओपेन रखा है। इसमें यूजन अपने हिसाब से सोर्स कोड में बदलाव कर ओएस को बदल सकते हैं।
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18. एंडरॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आपको बहुत ज्यादा ऐप मिलते हैं। इतना ऐप किसी दूसरे ओएस में नहीं है। जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर 48 बिलियन (48,00,00,00,000) से ज्यादा ऐप्स उपलब्ध है और इसमें से ज्यादातर मुफ्त हैं।

19. एंडरॉयड मेल रोबोट के लिए जाना जाता है। परंतु आपको शायद मालूम नहीं है कि फिमेल रोबोट को गायनोयड कहा जाता है।

20. सबसे खास बात की एंडरॉयड आॅपरेटिंग आधारित डिवाइस का उपयोग आज अंतरिक्ष में भी हो रहा है। नासा एक फ्लोटिंग स्पेस रोबोट तैयार किया है जो नेक्सस एस हैंडसेट के साथ कार्य करता है। यह डिवाइस एंडरॉयड जिंजरब्रेड आॅपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करता है।