सिर्फ 5 प्वाइंट में जानें अभी क्यों न लें सस्ता 5G स्मार्टफोन?

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2021 में आप जब भी फोन लेने का मन बनाएंगे तो सबसे पहले मन में ५जी फोन का ख्याल आयेगा। परंतु सवाल है कि क्या अभी ५जी फोन लेना सही है। क्योंकि जब से मुकेश अंबानी ने 2021 में 5जी लाने की घोषणा कर दी है तब से बाजार में ५जी फोन को लेकर हलचल काफी बढ़ गई है। हाल के दिनो में सस्ते 5जी फोंस काफी मात्रा में दस्तक दे रहे हैं। वहीं इस साल और भी कम कीमत में ५जी फोन लॉन्च होने वाले हैं। ऐसे में इन फोंस को लेकर लोगों के मन में सवाल आना लाज़मी है। क्या अभी सस्ते 5जी फोन लेने का फायदा है? तो चलिए आपकी इन्हीं सवालो का जवाब हमने आगे देने की कोशिश सिर्फ पांच प्वाइंट में की है।

पहला जवाब: अभी नहीं है फायदा, भारत में 5जी नेटवर्क को लेकर स्टैंडर्ड ही तय नहीं है।
जैसा कि आप जानते हैं कोई भी मोबाइल नेटवर्क रेडियो फ्रीक्वेंसी पर चलता है जिसे हम स्पेक्ट्रम कहते हैं। भारत में 4G नेटवर्क को 800, 900, 1800, 1900, 2300 और 2700 मेगाहट्र्ज सहित कई स्पेक्ट्रम पर चलाया जा सकता है और ये स्पेक्ट्रम बैंड भारत में पहले से उपलब्ध थे या जिसे नेटवर्क ऑपरेटर्स 2जी और 3जी के लिए उपयोग करते थे। इसी तरह 5जी के लिए भी 3rd Generation Partnership Project (3GPP) ने स्पैक्ट्रम का स्टैडर निर्धारित किया है लेकिन अब तक भारत में 5जी के लिए स्पेक्ट्रम का ऑक्शन ही नहीं हुआ है या यूं कहें कि स्पेक्ट्रम ही निर्धारित नहीं किया गया है। इसे भी पढ़ें: Jio ने फिर से की अनलिमिटेड ​काॅलिंग फ्री, सभी नेटवर्क पर होगी मुफ्त में बात

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5G की टेक्नोलॉजी को यदि मैं डिफाइन करने जाऊं तो बहुत समय लग जाएगा लेकिन अभी आपको कम शब्दों में समझाने की कोशिश करता हूं।

सबसे पहले साल 2017 के अंत में 3GPP ने 5जी के लिए स्टैंडर्ड को निर्धारित किया था। परंतु 2019 में जब 5जी को पहली बार कमर्शियल लॉन्च किया गया तो 5G NR को प्रस्तुत किया गया। 5G NR में दो तरह के फ्रीक्वेंसी रेंज का उपयोग किया जाता है। Frequency Range 1 जिसे छोटे फॉम में 5G NR FR1 नाम से  जाना जाता है। वहीं दूसरा Frequency Range 2 जिसे शॉर्ट फॉम में 5G NR FR2 के नाम से जाना जाता है। भारत में अभी यही निश्चित नहीं है कि कौन से फ्रीक्वेंसी बैंड पर चलेगा।

5G NR FR1, sub-6 GHz यानी कि 6,000 मेगाहर्ट्ज या उससे नीचे पर काम करता है। यानी कि फिलहाल जो frequency bands भारत मे 2G, 3G या 4G के लिए यूज हो रही है उस फ्रीक्वेंसी पर 5G को चलाया जा सकता है अपग्रेड करके। इसे भी पढे़ं: ये हैं Jio Exclusive Vivo फोन को नापसंद करने के 5 कारण 

वहीं 5G NR FR2 एक हाई फ्रीक्वेंसी बैंड है और इसे मिलीमीटर वेब नाम से भी जाना जाता है यह बेहद ही पावरफुल रेडियो फ्रीक्वेंसी है जिसका वेबलेंथ 10 से 1 मिलीमीटर तक का ही होता है। 5जी के लिए 24–100GHz फ्रीक्वेंसी रेंज का उपयोग किया जाता है। इसे भी पढ़ें: Xiaomi चली Apple की राह, बिना चार्जर के लॉन्च किया 108MP कैमरे वाला Mi 11, सबसे ताकतवर प्रोसेसर है इसकी जान

वैश्विक स्तर पर स्टैंडर्ड निर्धारित हो चुका है और कई देशों ने अपनी सुविधानुसार 5G NR की शुरुआत भी कर दी है लेकिन भारत में फिलहाल पता ही नहीं कि 5जी के लिए किस स्टैंडर्ड का उपयोग किया जाएगा। यानी कि FR1 या FR2 का उपयोग किय जाएगा। स्पेक्ट्रम ऑक्शन के बाद ही निर्धारित हो पाएगा।

इसलिए यदि आप सस्ते 5G फोन को लेने का प्लान बना रहे हैं तो हो सकता है कि आपको नुकसान हो जाए जैसा कि 4G के समय देखने को मिला था। लोगों ने 4G एलटीई फोन ले लिया था जबकि वोएलटीई नेटवर्क आने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा और उनके फोन कुछ हद तक बेकार ही हो गए।

दूसरा जवाब: कोई फायदा नहीं, भारत में 5G नेटवर्क डवलपमेंट में काफी समय लगेगा
जैसा कि हमने पहले ही बताया अभी 5G नेटवर्क आया ही नहीं है और यदि आता भी है तो 4जी की तरह एक बार में पूरी तरह से नहीं आएगा। यदि आपको याद हो तो 4G सर्विस को लॉन्च तो एयरटेल और वोडाफोन द्वारा बहुत पहले लॉन्च कर दिया गया था लेकिन बहुत कम ही जगहों पर उपलब्ध था। जब रिलायंस ने एक बार में पूरे देश में दस्तक दी तब जल्दी से बाकी ऑपरेटर्स ने भी 4G सर्विस अच्छी तरह से डेवलप किया।

रिलायंस जियो की प्री 5जी मैसिव मीमो सर्विस आईपीएल

परंतु 5G में जियो भी पूरे देश में एक साथ लॉन्च नहीं कर पाएगा। 5जी सर्विस आएगा तो कंपनी एक-एक सर्किल कर इसे डेवलप करेगी और हो सकता है कि जहां भीड़ ज्यादा है वहां 4जी पहले मिले जैसे मेट्रो शहर दिल्ली और मुम्बई जैसे शहर। छोटे शहरों और गांव-कस्बों में आने में साल से ज्यादा लग सकते हैं।

ऐसे में कह सकते हैं कि यदि आप सस्ते 5जी का प्लान बना रहे हैं तो फिर अभी फायदा नहीं है।

तीसरा जवाब: बिल्कुल फायदा नहीं, शुरुआत में 5G शुल्क बहुत ज्यादा होगा
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जैसा कि मैंने बताया कि एक साथ लॉन्च नहीं होगा। ऐसे में 5G आने के बाद कंपनियां शुरुआत में शुल्क ज्यादा लेंगी और जैसे-जैसे यूजर बेस बड़ा होता जाएगा या छोटे शहरों में सर्विसेज आएंगी वैसे-वैसे शुल्क कम होता जाएगा। शुरुआत में 5G प्रीमियम चार्ज ही चुकाने होंगे और नेटवर्क भी हर जगह नहीं मिलेगा। ऐसे में यदि आप सस्ते 5जी फोन का प्लान कर रहे हैं तो मेरे हिसाब से फिलहाल नहीं लेना चाहिए।

चौथा जवाब: नहीं, फायदा नहीं है। स्पेसिफिकेशन के साथ करना होगा समझौता
यदि आप सस्ता फोन ले रहे हैं तो जाहिर है उसे आप साल या दो साल ही उपयोग करना चाहेंगे। ऐसे में यदि 5G के चक्कर में आप पैसा फंसा दे रहे हैं तो फिर बाकी स्पेसिफिकेशन जैसे प्रोसेसर, रैम, मैमोरी और कैमरा से समझौता करना पड़ सकता है। जबकि यदि 5G अगले छह महीनों या साल भर में आ भी जाता है तो उसका उपयोग भरपूर नहीं कर पाएंगे।

पांचवां जवाब: कोई फायदा ही नहीं। 5G आने तक आपका फोन ही हो जाएगा पुराना
अभी यदि आप मिड रेंज में 5G फोन ले भी लेते हैं तो स्पीड का मजा आएगा ही नहीं। क्योंकि जब तक 5G सर्विस भारत में दस्तक देगी और उसका डवलपमेंट होगा तब तक आपका आज का नया फोन पुराना हो चुका होगा। आपके फोन के स्पेसिफिकेशन पुराना हो जाएंगे और टेक्नोलॉजी भी पुराना ही हो जाएगा। कुल मिलाकर कहें तो 5G पर भी आपको पूरी स्पीड नहीं मिलेगी और 4G का ही अहसास होगा।

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ऐसे में मेरी सलाह यही होगी कि अभी 5G के नाम पर कुछ भी ले लेने से अच्छा है कि बेहतर 4G फोन लें जिसका भरपूर उपयोग कर सकें। जब 5G सर्विस भारत में लॉन्च होगी और उसका डवलपमेंट होगा तब तक आज के प्रोसेसर और रैम आउटडेटेड हो जाएंगे।

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