www यानि वर्ल्ड वाइड वेब को आज हुए 32 साल पूरे, जानें इंटरनेट की दुनिया से जुड़ी ये 5 रोचक बातें

history of world wide web and internet 32th anniversary

इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट को ओपन करना हो या कोई भी यूआरएल खोजना हो तो सबसे पहले www ही लिखा जाता है। किसी भी वेब एड्रेस की शुरूआत इन तीन डब्ल्यू से ही होती है। जैसे फेसबुक खोलना हो तो www.facebook.com और हमारी 91मोबाइल्स की वेबसाइट खोलनी हो तो www.91mobiles.com/hi
इंटरनेट पर हर वेबसाइट की शुरूआत www से ही होती है, जिसका मतलब है वर्ल्ड वाइड वेब। आज यानि 12 मार्च को वर्ल्ड वाइड वेब के 32 साल पूरे हो गए हैं और इस मौके पर गूगल भी वर्ल्ड वाइड वेब की 32वीं सालगिरह को सेलिब्रेट कर रहा है। इंटरनेट की दुनिया में बेहद ही अहम भूमिका निभाने वाले वर्ल्ड वाइड वेब के इस जन्मदिन पर चलिये आपको बताते हैं 5 ऐसी रोचक बातें, जिनकी बदौलत आज इंटरनेट पर आपका हर काम चुटकियों में हो जाता है।

1. कैसे हुए वर्ल्ड वाइड वेब की शुरूआत

वर्ल्ड वाइड वेब की शुरूआत सर टिम बर्नर्स ली ने की थी। 1989 में यूरोपियन संस्था CERN में काम करने के दौरान वर्ल्ड वाइड वेब को बनाया गया था। ली ने अलग अलग कम्प्यूटर्स को एक ही जगह पर लिंक करने के लिए तथा एक साथ सभी कम्प्यूटर्स को एक्सेस करने के लिए हाइपरटेक्स्ट सिस्टम का प्रस्ताव दिया था, जो आगे चलकर www के रूप में साकार हुआ। वर्ल्ड वाइड वेब का पूरी तरह से विकसित होने में 2 साल का समय लग गया। लेकिन उस वक्त टिम ली को अंदाजा भी नहीं था कि वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) आगे चलकर इतना बड़ा आकार ले लेगा और इंटरनेट के यूज़ को बदलकर रख देगा।

history of world wide web and internet 32th anniversary

2. यह थी पहली वेबसाइट

वर्ल्ड वाइड वेब ने इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट को एक अलग पहचान देने का काम किया है। वेब ब्राउजर पर वर्ल्ड वाइड वेब के बिना वेबसाइट तक पहुंचना मुमकिन नहीं था। 1889 में कार्य शुरू किए जाने के बाद 1991 में पहली बार वर्ल्ड वाइड वेब को दुनिया के सामने लाया गया। इसी साल 6 अगस्त को इंटरनेट की शुरूआत हुई और वर्ल्ड वाइड वेब की सहायता से ही दुनिया की पहली वेबसाइट सामने आई जो थी, info.cern.ch ! गौरतलब है कि वर्ल्ड वाइड वेब के बिना किसी भी वेबसाइट का यूआरएल एड्रेस अधूरा ही रहता है। यह भी पढ़ें : Nokia के 10 मोबाइल फोन, जिन्हें आज भी पसंद करते हैं मोबाइल यूजर्स

3. कैसे करता है काम

वर्ल्ड वाइड वेब एक ऐप्लीकेशन है जो HTML, URL और HTTP से मिलकर बनी है। प्रत्येक वेबब्राउजर एचटीएमएल लैंग्वेज को समझता है। पहले जहां ब्राउजर सिर्फ एचटीएमएल को सपोर्ट करते थे वहीं अब यह एक्सएचटीएमएल जैसी अन्य लैंग्वेज को भी सपोर्ट करने लगे है। किसी भी पेज को URL (यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) के रूप में लोकेट किया जाता है, आम भाषा में इसे वेबसाइट का एड्रेस भी कहा जाता है। इस वेब एड्रेस की शुरुआत http से होती है। कई ब्राउजर एचटीटीपी के अलावा दूसरे यूआरएल टाइप और उनके प्रोटोकॉल जैसे गोफर, एफटीपी को भी सपोर्ट करते हैं।

history of world wide web and internet 32th anniversary

4. समय के साथ हुआ विकास

अप्रैल 1993 में वर्ल्ड वाइड वेब को सार्वजनिक कर दिया गया है। निर्माताओं से इस सॉफ्टवेयर को जनता के लिए पूरी तरह से फ्री रखा और बदले में सिर्फ सुधार से लिए सुझाव और कमियों की जानकारी देने की मांग की। तब से लेकर अब तक www के यूज़ के लिए कोई भी भुगतान नहीं किया जाता है। 1993 में ही Mosaic नाम का सर्च इंजन लॉन्च हुआ था जो दुनिया में पहला इंजन था जो तस्वीरें भी दिखाता था। इसी ने इंटरनेट की दुनिया को नई रोशनी दी। समय के साथ 1990 में Internet Explorer आया और आज गूगल क्रोम व मोजिला जैसे ब्राउजर व सर्च इंजन मौजूद है। यह भी पढ़ें : 5 प्वाइंट्स में जानें, एंडरॉयड स्मार्टफोन को कैसे करें फास्ट चार्ज

5. भारत में इंटरनेट की स्थिति

भारत में इंटरनेट सेवा की शुरूआत इंटरनेट के जन्म के 6 साल बाद हुई। इंडिया में इंटरनेट की शुरूआत 15 अगस्त 1995 मानी जाती है। इसी दौरान आज जनता के लिए इंटरनेट का यूज़ सार्वजनिक किया गया था। यह सर्विस विदेश संचार लिमिटेड ने शुरू की थी। आज भारत इंटरनेट का यूज़ करने वाले राष्ट्रों में टॉप श्रेणी में आता है। कम्प्यूटर या लैपटॉम ही नहीं बल्कि मोबाईल डिवाईस पर भी इंडिया में इंटरनेट का खूब एक्सेस होता है। रिलायंस जियो जैसी कंपनी को भारत में इंटरनेट के विकास की बड़ी वजह माना जाता है। विजुअल नेटवर्किंग इंडेक्स (VNI) नाम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़कर 82.9 करोड़ हो जाएगी।

LEAVE A REPLY