ISRO ने फिर रचा इतिहास! सबसे भारी रॉकेट को सफलतापूर्वक किया लॉन्च, एक साथ 36 Satellites को अंतरिक्ष में पहुंचाया

ISRO heaviest rocket LVM3 M2 launched with 36 satellites

ISRO यानी Indian Space Research Organisation भारत देश का एक ऐसा संस्थान है जिसके उपर हर एक भारतीय को गर्व होता है। मंगलयान (Mangalyaan) और चंद्रयान (Chandrayaan) जैसे मिशन को अंजाम देने वाले इसरो ने अनेंके ऐसे काम किए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में इंडिया का नाम चमकाया है और भारतीय वैज्ञानिकों की ​​काबिलियत का लोहा मनवाया है। एक के बाद एक सफलता अर्जित करने वाले इसरो ने एक और बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इस भारतीय स्पेस एजेंसी ने 36 सैटेलाइट्स (Satellite) के साथ इसरो का सबसे भारी रॉकेट (ISRO’s heaviest rocket) LVM3-M2 लॉन्च किया है।

ISRO’s heaviest rocket

LVM3-M2 इसरो द्वारा लॉन्च किया गया अभी तक का सबसे भारी रॉकेट है। इसका पूरा नाम Launch Vehicle Mark III (LVM3) है। इस रॉकेट की क्षमता 8,000 किलोग्राम तक का भार उठाने की है। 23 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए इस रॉकेट के जरिये 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है जिनका कुल वज़न 5,796 किलोग्राम था। इससे पहले इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो के कभी भी इतने ज्यादा वज़न के साथ किसी भी रॉकेट को लॉन्च नहीं किया ​था।

36 सैटेलाइट्स लेकर उड़ा रॉकेट

Launch Vehicle Mark III (LVM3) के साथ इसरो ने एक ही साथ 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि भी हासिल कर ली है। स्पेस में पहुंचने के बाद पहली 37 मिनट में ही 16 सैटेलाइट्स सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग होकर अपने ऑर्बिट की राह में सेट हो गए थे तथा बाद में अन्य 20 सैटेलाइट्स भी बिना किसी नुकसान के रॉकेट से डिटैच हो गई थी। बता दें कि ये सभी 36 सैटेलाइट्स OneWeb India-1 mission के तहत अंतरिक्ष में भेजी गई है तथा कुछ महीनों बाद फिर से अन्य 36 OneWeb satellites भी इसी तरह लॉन्च की जाएंगी।

ISRO द्वारा लॉन्च LVM3 रॉकेट में वनवेब लियो (OneWeb Leo) ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह एक व्यावसायिक मिशन था जिसमें यूके बेस्ड निजी कंपनी की सैटेलाइट्स को रॉकेट में भेजा गया था। बता दें कि इससे पहले साल 2019 में इसी रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और सबसे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) भी स्पेस में भेजा गया था। आपको जानकर गर्व होगा अब तक इस रॉकेट से पांच लॉन्चिंग की गई हैं और सभी पूरी तरह से सफल रही हैं।

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