क्यों था नोकिया 3310 सबका प्यारा फोन, जानें 5 कारण

नोकिया फैंस के लिए आज बहुत बड़ी खबर आई है। प्राप्त सूचना के अनुसार 26 फरवरी को कंपनी नोकिया 3310 को लॉन्च कर सकती है। यह वही मॉडल है जिसने कंपनी को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया था। इस मॉडल को नोकिया फिर से लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस बार फोन का रंग रूप थोड़ा अलग हो सकता है और फीचर्स भी पहले से बेहतर हो सकते हैं लेकिन पुराने 3310 की लोकप्रियता भुना पाएगा या नहीं इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

नोकिया 3310 को वर्ष 2000 में लॉन्च किया गया था। लॉन्च के साथ ही इसने तहलका मचा दिया और विश्व भर में इसके लगभग 13 करोड़ फोन बिके। नोकिया 3310 विश्व में सबसे ज्यादा बिकने वाले 20 फोन में से एक है। परंतु आपने कभी सोचा है​ कि आखिर यह फोन इतना लोकप्रिय क्यों हुआ? क्या कारण था जो लोगों ने इसे क्यों हाथों हाथ लिया था? चलिए बताते हैं नोकिया 3310 की लोकप्रियता के 5 कारण।

1. सॉलिड​ बिल्ड: नोकिया 3310 की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि फोन की बॉडी बेहद ही सॉलिड मटेरियल से बनी थी और यह बेहद ही मजबूत था। फोन कुछ ऊंचाई से गिर भी जाता था तो इसे कुछ होता नहीं था। इस कारण लोगों को यह फोन बेहद ही पसंद आया।
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2. बैटरी बैकअप: आपको यह जानकार शायद हैरानी होगी कि इस फोन में 900 एमएएच की बैटरी थी लेकिन यह लगभग 7 दिनों से ज्यादा का बैटरी बैकअप देने में सक्षम था। इस वजह से भी लोगों ने इसे काफी पसंद किया।

3. स्नेक टू गेम: आज भी लोगों के हाथ में यदि नोकिया 3310 आ जाए तो सबसे पहले लोग स्नेक गेम को ही खेलना पसंद करेंगे। स्नेक गेम पहले के नोकिया फोन में भी थे लेकिन इसमें कंपनी ने स्नेक टू को पेश किया था और लोग इस पर घंटो लगे होते थे।
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4. वायबरेशन टोन: यह फोन तब लॉन्च हुआ था जब मोबाइल का बाजार अपने शुरुआती चरण में था। उस वक्त फोन के साथ कुछ गिने चुने रिंग टोन ही आया करते थे। परं​तु नोकिया के इस फोन में रिंग टोन के साथ वायबरेशन था। आप मीटिंग या गाड़ी ड्राइव के समय इस वायबरेशन का उपयोग कर सकते थे। यह बिना शोर के ही अहसास करा देता था कि आपका फोन आया है। 3310 के इस फीचर को लोगों ने काफी सराहा।

5. बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी: कहा जाता था कि सभी कंपनियां जीएसएम तकनीक का उपयोग करती थी जबकि नोकिया अपने फोन में ईजीएसएम तकनीक का उपयोग करती थी। ईजीएसएम जीएसमएस एडवांस तकनीक है। इस कारण नोकिया फोन की कनेक्टिविटी दूसरों के मुकाबले बेहतर थी। नोकिया 3310 में भी कुछ ऐसा ही देखा जाता था। उस वक्त फोन का ज्यादातर उपयोग कॉलिंग और एसएमएस के लिए ही होते थे और नेटवर्क का विस्तार इतना ज्यादा नहीं था जितना की आज। ऐसे में लोग बेहतर कनेक्टिविटी ढूंढ़ते थे। इस मामले में भी नोकिया का यह फोन बीस साबित होता था और लोगों को यह फोन खूब भाया।

इन कारणों की वजह से नोकिया 3310 को लोगों ने काफी सराहा। वहीं कुछ और भी कारण थे इस फोन की लोकप्रियता के। असान आॅपरेटिंग, कैंसल के लिए सी बटन, खुद से कवर चेंज का विकल्प और आसान टी9 कीपैड। अब यह फोन फिर से दस्तक देने वाला है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि फिर से वहीं लोकप्रियता दोहरा पाएगा या नहीं।

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टेक्नोलॉजी शौक नहीं इनका जुनून है और इसी जुनून ने इन्हें टेक जगत में आने के लिए प्रेरित किया। मुकेश कुमार सिंह उन चंद लोगों में से हैं जिन्होंने हिंदी में मोबाइल रिव्यू लिखने की शुरूआत की। अपने 15 सालों के प​त्रकारिता के सफर की शुरुआत इन्होंने हिंदी डेली से की और पिछले 13 सालों से ये मोबाइल तकनीकी क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक ये मॉय मोबाइल मैगजीन और बीजीआर जैसे वेबसाइट के लिए कार्य कर चुके हैं। वहीं जागरण और नवभारत टाइम्स जैसे अखबारों में इनके लेख नियमित रूप से छपते रहते हैं।