अगर आपके घर के आस-पास भी लगा है कोई मोबाइल टॉवर तो जरूर पढ़ें यह खबर!

Mobile Phones के यूज़ में इंडिया पूरी दुनिया में टॉप पर आता है। विश्व के सबसे ज्यादा मोबाइल फोंस यूज़ करने वाले राष्ट्रों की सूची में भारत का नाम अग्रणीय है। हर व्यक्ति तक नेटवर्क पहुॅंचाने के लिए लाखों की संख्या में मोबाइल टॉवर लगाए गए हैं तथा काम अभी भी तेजी से चल रहा है। आपके भी गली-मोहले में कोई न कोई Mobile Tower जरूर होगा। मोबाइल टॉवर को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां भी फैली हुई है। आपको भी कभी न कभी किसी ने जरूर कहा होगा कि ये मोबाइल टॉवर सेहत के लिए बेहद खतरनाक है और इनसे निकलने वाली रेडिएशन इंसान को बहुत नुकसान पहुॅंचाती है। ऐसे ही मिथकों की गंभीरता को समझते हुए Department of Telecommunications यानी DOT ने विज्ञापन जारी किया है जो मोबाइल टावर के स्वास्थय पर पड़ने वाले प्रभावों को बताता है। आपको भी दूरसंचार विभाग का यह संदेश जरूर पढ़ना चाहिए।

क्यों है जरूरी Mobile Tower

सबसे पहले मोबाइल टावर की आवश्यकता की बात करें तो DOT यानी दूरसंचार विभाग ने यह साफ कहा है कि देश के मोबाइल टावर बेहद अहम है और सम्पर्क में रहने के लिए मोबाइल टावर जरूरी है। सिर्फ इतना ही नहीं इमरजेंसी की स्थिति पैदा होने पर इन्हीं टावर के जरिये कम्यूनिकेशन बनाया जा सकेगा और इसीलिए आपातकाल में भी ये टावर्स जरूरी है। डीओटी के मुताबिक मोबाइल टावर भारत के आर्थिक व सर्वांगीण विकास में अहम रोल निभाते हैं तथा इनकी जरूरत है। सबसे बड़ा प्वाइंट यही है कि बेहतर नेटवर्क कवरेज व क्वॉलिटी के लिए ज्यादा टावरों की जरूरत हैं।

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स्वास्थ्य पर मोबाइल टावर का प्रभाव

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन्स का कहना है कि मोबाइल टावर से निकलने वाले electro magnetic emissions पूरी तरह से हानिरहित हैं। विभाग के मुताबिक भारत में इन Mobile Tower की स्थापना के लिए कठोर मानक रखे गए हैं और इन सख्त नियमों का पालन करने के चलते हर उम्र के नागरिकों के लिए इन टावर का यूज़ बिल्कुल सुरक्षित बन गया है तथा इनसे सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है।

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कड़े नियमों के साथ लग रहे हैं टावर

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने जो विकिरण नियम अपनाए हैं, वो ICNIRP मतलब इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आयोनाईजिंग रेडियेशन प्रोटेक्शन द्वारा निर्धारित हैं। बताया गया है कि ये नियम WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशासित नियमों की तुलना में दस गुणा ज्यादा सख्त हैं। डीओटी के अनुसार तय किए गए नियमों तथा मोबाइल टावर लगाने के लिए निर्धारित मानकों का पालन सही से हो, इसके लिए भी ठोस और संरचनाबद्ध प्रक्रिया बनाई गई है।

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20 लाख रुपये का जुर्माना

अगर कोई कंपनी या मोबाइल टावर से जुड़ा विभाग इन नियमों का उल्लघंन करना पाया गया और मोबाइल टॉवर से निर्धारित मात्रा से अधिक रेडिएशन निकलती मिली तो सरकार की ओर से 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर आपको अपने आस पास लगे मोबाइल टावर में किसी तरह की समस्या नजर आती है या फिर संदेह होता कि शायद वह तय लिमिट से अधिक रेडिएशन निकाल रहा है तो आप सीधे डीओटी को इसकी शिकायत भी कर सकते हैं।

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