जानें कंप्यूटर में क्यों नहीं होते A और B ड्राइव, C क्यों होता है डिफॉल्ट ड्राइव

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोबाइल के आने से टेक्नोलॉजी आसान लगने लगी है लेकिन कंप्यूटर का अपना अलग महत्व है। बड़ी सी स्क्रीन, असरदार की बोर्ड और छोटे से माउस की वजह से बड़े से बड़ा काम भी आसान लगने लगता है। इतना ही नहीं भारी भरकम काम आज भी कप्यूटर पर ही होते हैं। यही वजह है कि हर हाथ में मोबाइल होने के बावजूद भी आॅफिस और घर में लोग कंप्यूटर या लैपटॉप रखना जरूर पसंद करते हैं। बड़ी सी हार्ड ड्राइव में ढ़ेर सारा डाटा स्टोर होता है जो सालों साल काम आता है। कंप्यूटर के सी ड्राइव में सॉफ्टवेयर और डी व ई ड्राइव में डाटा रखते हैं। आप चाहें तो ई और एफ सहित अन्य ड्राइव भी बना सकते हैं। परंतु इन सब के बीच आपने कभी सोचा है कि विंडोज कंप्यूटर में ए या बी ड्राइव क्यों नहीं होता। क्या कंप्यूटर ड्राइव में ऐसी कोडिंग होती है जिससे कि सी ड्राइव से ही कोडिंग शुरू हो?

नहीं, ऐसा नहीं है। इसके पीछे बड़ी मज़ेदार कहानी है। या यूं कहें कि एक ऐसा ट्रेंड जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं था लेकिन खुद से ही चल पड़ा। तो चलिए बताते हैं आपको किस्सा ए और बी ड्राइव का।

आपको बता दूं कि इसका जवाब पुराने कंप्यूटर में छिपा है। आपको कभी मौका मिले तो बेहद पुराने कंप्यूटर को जरूर देखें। शुरुआत में जब कंप्यूटर का इज़ाद किया गया तो उनमें इंटरनल स्टोरज नहीं होते थे। कंप्यूटर में किसी चीज को सेव नहीं किया जा सकता था। डाटा सेव करने के लिए अलग से एक एक्सटर्नल फ्लॉपी​ डिस्क ड्राइव को लगाना होता था। बल्कि जब आप कंप्यूटर को आॅन करते थे तो भी पहले यही फ्लॉपी डिस्क रन करना होता था। जिसे ड्राइव में ये फ्लॉपी डिस्क लगते थे उन्हें ड्राइव ‘ए’ कहा जाता था।

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शुरुआत में तो 5 1/4 इंच वाले फ्लॉपी डिस्क का उपयोग हुआ करता था जो ए ड्राइव के स्लॉट में लगते थे। बाद में कंप्यूटर के लिए दूसरे डिस्क ड्राइव का इजाद हुआ जो पुराने वाले से छोटा था। इस ड्राइव का आकार 3 1/2 इंच का था। यह फ्लॉपी डिस्क जिस ड्राइव में लगता था उसे ​बी ड्राइव का नाम दिया गया। इन्हीं दोनों फ्लॉपी डिस्क को रन करने के लिए कंप्यूटर में दो तरह के ड्राइव बने जिन्हें ड्राइव ‘ए’ और ड्राइव ‘बी’ कहा गया। आज भी जब आप डेस्कटॉप लेते हैं तो इन दो ड्राइव के लिए उनमें स्थान निर्धारित होते हैं। जिन्हें आप खाली छोड़ देते हैं।

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1980 के बाद कंप्यूटर में हार्ड ड्राइव चलन में आया। आसान स्टोरेज, इनबिल्ट सुविधा और डाटा नष्ट होने का कम खतरा होने की वजह से जल्द ही हार्डड्राइव कंप्यूटर में स्थाई जगह प्राप्त करने में सफल रहा और इसे तीसरे श्रेणी के ड्राइव का दर्जा मिला। इसके बाद से ही हार्ड ड्राइव को कंप्यूटर में सी ड्राइव कहा जाने लगा। बाद में मैमोरी बड़ी हो गई और हाईड्राइव का पार्टीशन किए जाने लगा तथा लोग सी ड्राइव में ही डी, ई और एफ ड्राइव को निर्धारित करने लगे। इसके बाद से सी ड्राइव में कंप्यूटर का आॅपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जाता है।

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कंप्यूटर टेक्नोलॉजी बदलती गई और धीरे-धीरे फ्लॉपी डिस्क चलन से गायब हो गए। हार्ड ड्राइव ने फ्लॉपी डिस्क को चलन से बाहर कर दिया है। अब कंप्यूटर में सिर्फ सी ड्राइव बचा है। वहीं यदि आप बाहर से यदि किसी यूएसबी ड्राइव का उपयोग करते हैं तो उसे आपका कंप्यूटर एफ और जी डिवाइस दिखाता है।

हार्ड ड्राइव के लिए कोई मानक सेट नहीं है कि आॅपरेटिंग सिस्टम सी ड्राइव में ही इंस्टॉल होगा। आप अपनी इच्छानुसार इसे बदल सकते हैं। यदि आपके पास पीसी का एडमिनिस्ट्रेटिव राइट है तो आप सी ड्राइव को ए या बी ड्राइव भी बना सकते हैं लेकिन लोग पुराना ट्रेंड ही अपनाते चल रहे हैं।