Android फोन की 5 शानदार बातें, जो महंगे iPhone में भी नहीं

Apple ऐसा मोबाइल ब्रांड है जो फीचर्स से ज्यादा स्टेट्स के लिए पहचाना जाता है। यह सच है कि आज भी इंडिया में अनेंको ऐसे लोग हैं जो iPhone को रखना स्टेट्स सिंबल मानते हैं और इसीलिए एप्पल आईफोन को यूज़ करते हैं। भारतीय मोबाइल यूजर्स को अगर सेकेंड हैंड आईफोन भी कहीं से मिलता हो तो यह मौका भी नहीं चूकते हैं। Apple iPhone की महंगी कीमत और प्रीमियम क्वॉलिटी इसे अन्य ब्रांड्स के अलग भी बनाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाम बेशक आईफोन का कितना भी उंचा हो लेकिन ऐसी कई बातें है जिनमें Android Smartphone आईफोन को पीछे छोड़ देते हैं। यूं तो एंडरॉयड फोन और आईफोन के बीच कई ऐसी बातें है जो खुद को बेहतर बताने का दावा करती है। लेकिन आज इस आर्टिकल में हम 5 ऐसे अहम प्वाइंट्स बता रहे हैं जो आपके सस्ते Android फोन में मिल जाएंगे लेकिन महंगे iPhone में नहीं।

डिसप्ले व डिजाईन

‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज लास्ट इम्प्रेशन’ वाली बात मोबाइल बाजार में भी फिट बैठती है। कोई भी नया फोन लेना हो तो सबसे पहले उसकी लुक व डिजाईन को ही देखा जाता है। मोबाइल तकनीक इतनी एडवांस हो चुकी है कि आज वॉटरड्रॉन नॉच से लेकर, फुलव्यू बेजल लेस डिसप्ले व पंच-होल डिसप्ले वाले एंडरॉयड स्मार्टफोन मार्केट में मौजूद है। लेकिन ऐसी खूबी आईफोन में नहीं मिलती है। सबसे लेटेस्ट और 1 लाख रुपये वाला iPhone 11 Pro Max जहां तीन साल पुरानी ‘नॉच’ पर बना है वहीं 10,000 रुपये से भी कम कीमत वाले Android Smartphone पंच-होल डिसप्ले के साथ आ रहे हैं। इसी तरह एंडरॉयड लेते समय बैक पैनल और रियर कैमरा सेटअप में भी कई तरह की वैरायटी मिल जाएगी लेकिन एप्पल आईफोन में ऐसा नहीं है।

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सीमित स्टोरेज

कहने सुनने में बेशक यह प्वाइंट ज्यादा काम का न लगे लेकिन यह है बेहद ही आवश्यक। आज PUBG जैसे गेम और WhatsApp जैसी मैसेंजिंग ऐप्स ने फोन में स्टोरेज की जरूरत को बढ़ा दिया है। व्हाट्सऐप पर सैकेड़ों फाइल्स शेयर की जाती है। वहीं फोन में आ रहे हाई मेगापिक्सल वाले कैमरा हाई रेज्ल्यूशन वाली फोटो और वीडियो का निर्माण करते हैं। और ऐसी मीडिया फाइल्स के लिए भी फोन में अधिक स्टोरेज की जरूरत पड़ती है। कहीं घूमने निकल पड़े तो 5-7 जीबी डाटा तो वहीं की फोटो, वीडियो में ही खप जाता है। ऐसी कंडिशन में Android Smartphone को बेस्ट कहा जाएगा। ये फोन न सिर्फ बड़ी स्टोरेज के साथ आते हैं बल्कि साथ ही एंडरॉयड फोन में अलग से माइक्रोएसडी कार्ड का यूज़ भी किया जा सकता है। लेकिन वहीं दूसरी ओर Apple iPhone में ऐसा नहीं है। आईफोन यूजर नहीं चाहते कि उनके फोन में कोई ऐसी फाइल बचे जो बेहद ज्यादा काम की न हो। यह भी पढ़ें : क्या होता है Android ‘Go’ और नॉर्मल एंडरॉयड ओएस से कितना है अलग, जानें फुल डिटेल

बैकअप से समझौता

Apple iPhone की बैटरी फोन के ओएस के साथ मिलकर काम करती है जिसकी वजह वह लंबा बैकअप देने में सक्षम है। फोन के नॉर्मल यूज़ में आईफोन एक दिन आराम से निकाल लेता है। लेकिन आज की जेनरेशन नॉर्मल में भरोसा नहीं रखती। पूरा दिन सोशल मीडिया पर लगे रहना और फोन में गेम खेलने के शौकिन यूजर्स को आईफोन की बैटरी से यकिनन शिकायत रहेगी। वहीं दूसरी ओर देखें तो Android Smartphone में 4,500एमएएच की बैटरी आम हो चली है और अब तो 6,000एमएएच बैटरी के फोन में मार्केट में आने लगे हैं। ये स्मार्टफोंस फास्ट चार्जिंग तकनीक से भी लैस होते है, जिसके चलते कम समय में ही बैटरी को तेजी से चार्ज किया जा सकता है। पावर बैकअप और फास्ट चार्जिंग के मामले में एंडरॉयड स्मार्टफोन एप्पल के आईफोन के कहीं ज्यादा आगे निकल जाते हैं।

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डिवाईस ऑप्शन

iPhone को सिर्फ अमेरिकन कंपनी Apple बनाती है, जब्कि गूगल आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले Android Smartphone को बनाने का लाइसेंस दर्जनों कंपनियों के पास है। चीन, कोरिया, ताईवान से लेकर इंडियन टेक कंपनियां भी अपने अपने एंडरॉयड लॉन्च करती रहती है। एंडरॉयड स्मार्टफोंस की कीमत 5,000 रुपये से शुरू होकर 50,000 रुपये तक जाती है और प्रीमियम रेंज में भी अनेंको फ्लैगशिप एंडरॉयड फोन मौजूद है। ऐसे में हर यूजर्स अपनी जरूरत, पसंद और बजट के हिसाब से कोई भी मोबाइल चुन सकता है। वहीं दूसरी ओर आईफोंस की कीमत ज्यादातर तय बजट में आती है और एप्पल साल में चुनिंदा मॉडल्स ही बाजार में उतारती है। इन कारणों के चलते Apple iPhone की तुलना में Android Smartphone लोगों को अधिक ऑप्शन मुहैया कराते हैं। यह भी पढ़ें : मोबाइल फोन हो रहा है गर्म तो भूलकर भी न करें ये 5 काम

कस्टमाइज़ेशन

फोन को अपने पास रखने की एक वजह होती है उसकी ‘जरूरत’। लेकिन इसके साथ साथ मोबाइल फोन चुनने की एक और बड़ी वजह होती है ‘शौक’। लंबे समय तक एक जैसा ही फोन यूज़ करना आजकल लोगों को बोर कर देता है। हर यूजर चाहता है कि उसके फोन में कोई न कोई नयापन आता रहे। फोन के वॉलपेपर से लेकर मेन्यू डिजाईन, आइकन स्टाईल, फान्ट, मोशन, ऐनिमेशन व थीम्स इत्यादि ऐसी चीजें है जिन्हें बदलने से फोन यूज़ करने का अहसास भी बदल जाता है। Android Smartphone यूजर्स को अपनी पसंद के अनुसार यूजर इंटरफेस बदलने की खुली आजादी देता है। यूजर्स अपनी रुचि व मर्जी के अनुसार फोन को कस्टमाइज़ कर सकते हैं, जो एंडरॉयड फोन की पूरी लुक ही बदल देता है। एंडरॉयड फोंस में विभिन्न ऐप लॉन्चर इसे और बेहतर बनाते हैं। लेकिन Apple iPhone की बात करें तो यहां यूजर के हाथ बंधे होते हैं। चुनिंदा बदलावों को छोड़कर आईफोन यूजर्स के पास ऐसा कोई उपाय नहीं है जिससे कि वह फोन को कोई नई लुक दे पाए। यानि एक बार आईफोन लिया तो जब तक वह आपके पास है, लगभग एक जैसे ही यूजर इंटरफेस पर काम करना पड़ेगा।

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