कल तक हमें अन-आॅर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था लेकिन अब आॅफलाइन रिटेल कहते हैं: पंकज भाटिया

कल तक हमें अन-आॅर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था लेकिन अब आॅफलाइन रिटेल कहते हैं: पंकज भाटिया

कहते हैं कि बाजार में उतार चढ़ाव लगा होता है। परंतु जितना उतार चढ़ाव मोबाइल बाजार में देखने को मिलता है शायद उतना कहीं और न हो। एक ओर जहां हर 3 महीने में मोबाइल तकनीक बदल जाती है वहीं हर छह माह में बाजार की दशा व दिशा बदल जाती है। अब देखिए न जहां कुछ साल पहले तक भारतीय मोबाइल बाजार की रूप रेखा आॅफलाइन रिटेलर्स तय करते थे वहीं आज उन पर संकट के बादल छाने लगे हैं। आॅफलाइन रिटेसर्ल की इन्हीं परेशानियों से रूबरू होने के लिए हम मिले फरीदाबाद के प्रमुख मोबाइल रिटेलर पंकज भाटिया से।

पंकज हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में यूनिवर्सल सेल्यूलर प्वाइंट नाम से मोबाइल रिटेल स्टोर चलाते हैं और इस काम में वे लगभग 20 सालों से जुड़े हैं। मोबाइल रिटेल बाजार और उनकी परेशानियों पर उन्होंने हमसे खुल कर बातें की, पेश है उसके कुछ अंश।

मोबाइल इंडस्ट्री में आप लंबा समय बीता चुके हैं। अब तक का सफर कैसा रहा?
इस साल 13 दिसंबर को मोबाइल इंडस्ट्री में मेरे 20 साल पूरा हो जाऐंगे। इस दौरान हमारा सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा है। मैनें शुरुआत बिल्कुल छोटी सी पूंजी से की थी। आपको शायद विश्वास न हो सिर्फ 7,000—8,000 रुपये से मैंने अपना बिजनेस शुरू किया था और आज एक बड़े से शॉप से इसे रन कर रहा हूं।
कल तक हमें अन-आॅर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था लेकिन अब आॅफलाइन रिटेल कहते हैं: पंकज भाटिया
वर्ष 1998 में मैंने शुरुआत मोबाइल एक्सेसरीज के साथ की थी। फिर मोबाइल सिम कनेक्शन किए। प्रॉफिट मिलता गया और काम बढ़ता गया। बाद में मोबाइल डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ गया और आज मल्टी ब्रांड स्टोर रन कर रहा हूं।

उस वक्त को सिर्फ नोकिया जैसे ही कुछ ब्रांड होंगे!
नहीं ऐसा नहीं है। हालांकि उस वक्त भारतीय मोबाइल जगत अपने शुरुआती दौर में था लेकिन कई कंपनियों के फोन आया करते थे। नोकिया और मोटोरोला के अलावा सोनी, मित्सुबीसी, अल्काटेल, बेंक्यू और सिमेंस जैसे ब्रांड उपलब्ध थे।

इन बीस सालों बाजार कितना बदल गया?
सब कुछ बदल गया। फोन की तकनीक, यूजर्स की डिमांड यहां तक की सेल्स का तरीका भी। पहले सिर्फ कीपैड वाले फोन आते थे। परंतु जब टच स्क्रीन आए तो बड़ा शोर हुआ अब टच स्क्रीन के अलावा कुछ बिकता ही नहीं। फीचर फोन से डिमांड स्मार्टफोन पर शिफ्ट हो गया है। हां बाजार में बदलाव का सबसे बड़ा कारण एंडरॉयड बना है। फोन में ज्यादा से ज्यादा से ऐप और गेम का उपयोग होने लगा। वहीं जियो आने के बाद तो डाटा डिमांड काफी बढ़ गया है।
कल तक हमें अन-आॅर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था लेकिन अब आॅफलाइन रिटेल कहते हैं: पंकज भाटिया
यूजर की बात करें तो पहले लोग आते थे और जो फोन दिखता था वो ले जाते थे। एक समय ऐसा आया जब सिर्फ नोकिया की मांग करते थे। पंरतु आज हर कोई इंटरनेट का उपयोग करता है और यूजर्स पहले से फोन के बारे में पढ़कर आते हैं और पूरी जांच परख कर फोन की खरीदारी करते हैं।

रही बात रिटेल की तो पहले फोन में सिर्फ कॉलिंग मैसेजिंग होती थी तो जो लुक देखकर खरीद लेते थे। परंतु अब बहुत कुछ है और फोन के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। जिससे कि आप यूजर के हर सवाल का जवाब दे सकें। हां सबसे बड़े बदलाव की बात करें तो वह है आॅनलाइन स्टोर। इनके आने से अब एक बार फिर से आॅफलाइन स्टोर की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।

एक बार फिर से?
आपको शायद मालूम होगा समय के साथ हमारा नाम भी बदल गया है। पहले हमें अनआर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था और अब आफलाइन स्टोर कहते हैं। वर्ष 2007—08 में सुभिक्षा, हॉटस्पॉट और दी मोबाइल स्टोर जैसे कई बड़े मोबाइल रिटेल चेन आए थे। उस वक्त छोटे रिटेलर्स के लिए काफी परेशानी बढ़ गई थी। कई स्टोर्स तो बंद हो गए थे। हालांकि बाद में ये स्टोर खुद खत्म हो गए लेकिन उस वक्त हम बेहद परेशान हुए।

आॅनलाइन स्टोर से किस तरह की परेशानी हो रही है?
आॅनलाइन स्टोर के पास बहुत बड़ी इनवेस्टमेंट है। इन स्टोर पर आज एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट लॉन्च हो रहे हैं जिनके दाम भी कम होते हैं। इतना ही नहीं आॅफलाइन पर भी प्रोडक्ट उपलब्ध है वह भी आॅनलाइन स्टोर पर कम कीमत में मिल जाता है। ऐसे में यूजर्स आॅनलाइन खरीदारी कर लेता है।
कल तक हमें अन-आॅर्गेनाइज्ड रिटेलर्स कहा जाता था लेकिन अब आॅफलाइन रिटेल कहते हैं: पंकज भाटिया
इस परेशानी से आप कैसे निपट रहे हैं?
हालांकि अब भी लोगों को आॅफलाइन स्टोर पर भरोसा है। यहां लोग फोन देखकर परख कर खरीदारी करते हैं जबकि आॅनलाइन में ऐसा नहीं है। वहीं हाल में आॅनलाइन स्टोर पर कई धोखे वाले मामले भी आए हैं ऐसे में कई यूजर आॅनलाइन से खरीदारी नहीं करना चाहते। इसके अलावा होम डिलीवरी और कुछ एक्सेसरीज आदि हम भी आॅफर में देते हैं। बावजूद इसे संकट अभी टला नहीं है।

आपको क्या लगता है क्या करना चाहिए?
मैं तो फिलहाल सरकार और कंपनी से गुजारिश कर सकता हूं। कंपनी से कहूंगा कि कृपया कोशिश करें कि आॅफलाइन और आॅनलाइन में समान कीमत हो जिससे कि सभी मोबाइल रिटेलर्स जो लंबे समय से आपके साथ जुड़े हैं उन्हें ज्यादा परेशानी न हो। वहीं सरकार से भी यही कहना चाहूंगा कि आॅफलाइन और आॅनलाइन के लिए कोई एक नीति आए जिससे कि सभी लोग स्वतंत्र होकर बिजनेस कर सकें।