सिर्फ सेल्फी नहीं बल्कि अब ग्रुप सेल्फी का भी है ट्रेंड, भारत में ओपो ने किया सर्वे

    आज स्मार्टफोन इंडस्ट्रीज सबसे तेजी से विकास करने वाले व्यवसाय में से एक है। परंतु यह बाजार निरंतर बदलाव के ही दौर से गुजरता है। यदि आप इस बाजार पर नजर डालते हैं तो पाएंगे कि यहां हर कोई अपने हिसाब से डिवाइस लेना चहता है। ऐसा डिवाइस जो उसकी पर्सनालिटी को सूट करे और जो उनकी जरूरतों को पूरी कर सके। उपभोक्ताओं की इन जरूरतो को पूरी करने के लिए स्मार्टफोन ब्रांड भी इस पर बारिकी से नजर बनाए होते हैं और बाजार में जो ट्रेंड चलता है उसी के अनुसार अपने प्रोडक्ट पेश करते हैं। वर्ष 2016 की ही बात करें। इस पूरे साल में मैटल डिजाइन वाले यूनिबॉडी स्मार्टफोन का बोलबाला रहा। ऐसा नहीं है कि मैटल वाले फोन सिर्फ प्रीमियम सेग्मेंट में ही देखे गए बल्कि बजट सेग्मेंट में भी कंपनियों ने ऐसे ही फोन लॉन्च किए। हालांकि मोबाइल सेग्मेंट में ऐसे कई ट्रेंड हैं जो आते हैं और चले जाते हैं लेकिन ऐसा भी ट्रेंड है जो हाल में नहीं आया और पिछले कुछ सालों से मोबाइल उपभोक्तओं में इसके प्रति दीवानगी देखते बन रही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक बेहतर फ्रंट कैमरे वाले फोन की। ऐसे में सेल्फी सेंट्रीक स्मार्टफोन ओपो एफ1एस का जिक्र किए बगैर नहीं रहा जा सकता। इस फोन ने हाई रेल्यूशन फ्रंट कैमरे को लेकर लोगों की धारणा की बदल दी। फोन में 16—मेगापिक्सल का ताकतवर फ्रंट कैमरा है। ऐसे में आम लोगों के लिए बहुत बड़ा सवाल यही है कि अब सेल्फी में आगे क्या ट्रेंड आने वाला है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हम ओपो के पास पहुंचे जिन्होंने हमें बेहद ही रोचक डाटा उपलब्ध कराया। हमें एक आॅनलाइन रिसर्च प्रदान किया गया जो निलसन इंडिया द्वारा किया गया था। उस रिसर्च का परिणाम आपके सामने है।

    बदल रही है सोंच
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    पिछले कई सालों से फोन के पिछले पैनल में उपलब्ध रियर कैमरे को प्राइमरी कैमरा कहा जाता था। यह कैमरा फोन से स्टील इमेल क्लिक करने के लिए बेहतर कहा जाता था। परंतु जब से सेल्फी का ट्रेंड आया है तब से स्मार्टफोन निर्माताओं ने फ्रंट कैमरे को लेकर भी काफी उत्साह दिखाया है। उसका परिणाम यह हुआ कि आज फोन के फ्रंट में भी आप ताकतवर लेंस वाला कैमरा देख सकते हैं। ओपो द्वारा कराए गए सर्वे में तो ​परिणाम सामने आया है वह भी काफी रोचक है। आज स्मार्टफोन से क्लिक होने वाले 10 फोटो में 6 फोटो फ्रंट कैमरे से लिया जाता है ज​बकि सिर्फ चार फोटो ही रियर कैमरे से क्लिक होता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि आज ताकतवर लेंस और आॅप्टिक्स के साथ उपलब्ध होने वाले इन फ्रंट कैमरे का उपयोग सेल्फी के अलावा कई अन्य कर्यों के लिए भी किया जाता है।

    ग्रुप सेल्फी का बढ़ रहा है ट्रेंड
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    अब तक लाखों बार आपने सेल्फी का नाम सुना होगा लेकिन अब तक यह नहीं जान पाए होंगे सेल्फी है क्या, तो चलिए आज हम पहले सेल्फी को समझते हैं। सेल्फी एक सेल्फी प्राट्रेट है अर्थात खुद की तस्वीर है तो किसी व्यक्ति द्वारा अपने स्मार्टफोन के फ्रंट कैमरे से खींची जाती है। ग्रुप सेल्फी, सेल्फी से आगे का ट्रेंड है। इसमें एक व्यक्ति किसी ग्रुप के साथ अपनी सेल्फी लेता है। अपको बात दूं कि ओपो ने जो सर्वे किया है उसमें एक व्यक्ति यदि 10 सेल्फी लेता है तो उसमें से सिर्फ चार सेल्फी में ही वह अकेला होता है, बाकी के 6 में वह ग्रुप सेल्फी लेता है। लोग किसी पार्टी, परिवारिक आयोजन, आॅफिस फंक्शन या यात्रा के दौरान ग्रुप सेल्फी लेना ज्यादा पसंद करते हैं।

    एक सेल्फी फोन में और क्या चाहिए उपभोक्ता को?
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    एक अच्छे फ्रंट फेसिंग कैमरे वाले फोन की मांग कभी भी बहुत ज्यादा नहीं रही है और कहते हैं न कि डिमांड के अनुसार ही सप्लाई होती है। ऐसे में सेल्फी डिमांड को पूरी करने के लिए कुछ मोबाइल निर्माताओं ने सेल्फी सेंटिंग फोन के लिए अलग सेग्मेंट ही बना दिया जिन्हें कुछ खास फीचर्स से लैस किया गया। शुरुआत में इनमें उच्च मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया तो कुछ निर्माताओं ने फ्रंट कैमरे के साथ फ्लैश पेश किया जिसमें सॉफ्टवेयर की भी मदद ली गई। अर्थात जेस्चर की मदद से आप फ्लैश का उपयोग कर सेल्फी ले सकते हैं। वहीं सर्वे में इस बात का पता चला कि सेल्फी के इस क्रेज में कि उपभोक्ता पिक्सल रेजल्यूशन, ब्यूटीफाई मोड, जेस्चर और वाइड एंगल लेंस आदि से फीचर्स से भली भांती अवगत थे। हालांकि सेल्फी के साथ और भी कई आॅप्शन होते हैं लेकिन इन्हीं तीन फीचर्स का उपयोग लोग ज्यादा करते हैं।

    एक सेल्फी ही काफी नहींं
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    यदि आप यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि पहली बार में ही आप बेहतर सेल्फी क्यों नहीं ले पाते हैं तो बता दूं कि आप सिर्फ अकेले नहीं हैं। सर्वे में यह बात साफ हो गया है कि ऐसे हजारों लोग हैं जो परफेक्ट सेल्फी लेने के लिए कम से कम तीन बार फोटो क्लिक करते हैं। हालांकि आसानी से परफेक्ट सेल्फी न ले पाने का करण बड़ा दृश्य, सभी लोगों को एक फ्रेम में लाना, खराब रोशनी और शटर का असुविधाजनक होना है। उपर दिए गए सभी परेशानियों में ग्रुप सेल्फी के दौरान सभी लोगों का एक फ्रेम में जल्दी फिट न आना सबसे बड़ी परेशानी होती है। यही वजह है कि सेल्फी सेंट्रीक फोन में फ्रंट कैमरे के साथ व्हाइड लेंस की मांग काफी बढ़ी है।

    फिल्टर्स से करते हैं श्रृंगार
    यदि आज आप अपना सोशल मीडिया फीड्स देखते हैं तो वे सेल्फी और ग्रुप सेल्फी से भरे पड़े होते हैं और उन्हें देखकर आपको कोई आपको कोई अचंभा भी नहीं होता। ओपो के इस सर्वे में दावा किया गया है कि लगभग 87 फीसदी उपभोक्ता अपनी सेल्फी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते हैं। इसमें से लगभग 93 ​​फीसदी उपभोक्ता फेसबुक पर अपने फोटो अपलोड करते हैं जबकि 69 उपभोक्ता उसे मैसेंजर ऐप पर शेयर करते हैं। इसके साथ ही एडिटिंग ऐप्स का भी काफी उपयोग बढ़ गया है। उपभोक्ता औसतन 15—30 मिनट का समय इन फोटोज को एडिट करने में लगाते हैं। एडिटिंग ऐप्स की बढ़ती मांग की वजह से स्मार्टफोन निर्माता फोन में इन ऐप्स को पहले से ही मुहैया करा रहे हैं। ओपो एफ1एस में ही आप देख सकते हैं इसका ब्यूटीफाई मोड बेहद ही उपयोगी है। यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि ओपो ने इस फीचर को 2102 में ही अपने फोन में इंटीग्रेट किया था जो कि विश्व में पहली बार था।

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    आज मोबाइल बाजार में कई स्मार्टफोन निर्माता उपलब्ध हैं जो अपने फोन में ताकतवर रियर कैमरे के साथ में शानदार फ्रंट कैमरा का भरोसा देते हैं। परंंतु इनमें से जो उपर के तीन ब्रांड कहे जा सकते हैं उनमें एप्पल, सैमसंग और ओपो का नाम प्रमुख कहा जा सकता है। हालांकि इनमें से ओपो और सैमसंग ऐसे ब्रांड कहे जा सकते हैं जो कम बजट में कैमरा सें​ट्रिक फोन मुहैया कराते हैं। यदि आप कम बजट के फोन में बेहतर ग्रुप सेल्फी लेने वाले फोन जिसमें वाइड एंगल ​लेंस हो के खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो ओपो इनमें सबसे बेस्ट कहा जा सकता है। और जिस तरह से ओपो सेल्फी सेग्मेंट में कंपनी डुअल कैमरे वाला फोन लाने की योजना बना नही है ऐसे में यही कहा सकता है कि शायद आगे भी सेल्फी सीरीज में ओपो की बराबरी करने वाला कोई न हो।

    *इस रिचर्स को निलसन द्वारा किया गया है। इस रिचर्स को कंपनी ने फरवरी 2017 में किया जिसमें दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, बैंगलुरू, चैन्नई, कोचीन और कोलकाता के 101 लोगों ने भाग लिया। ये वो लोग थे जिन्होंने 2014 के बाद फोन की खरीदारी की थी और जो सप्ताह में कम से कम 1 बार जरूर सेल्फी लेते हैं।