10 सबसे खतरनाक वायरस जिनसे घबराया पूरा विश्व

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अक्सर आपने सुना होगा कि पेन ड्राइव में वायरस है या फिर कंप्यूटर में वायरस आ गया है। पंरतु क्या आपने कभी सोचा है इन वायरस का काम क्या है और क्यों लोग इनसे डरते हैं? तो चलिए आपको बताते हैं। वास्तव में वायरस एक प्रोग्राम है तो आपके कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में चुपके से बैठ जाता है और आपके डिवाइस पर अपना नियंत्रण कर लेता है। चुपके से यह आपसे डाटा चोरी करता है और आपकी निजी जानकारियां चुराकर उसका गलत उपयोग कर सकता है।

कई बार तो इन वायरस ने पूरे विश्व के तकनीक जगत को हिलाकर रख दिया। ऐसा ही एक रैनसमवेयर हाल में भी आया जिससे विश्व भर के 150 देशों को नुकसान हुआ। इतना ही नहीं हैकर्स ने कंम्यूटर्स हैक करके करोड़ों रुपये की फिरौती भी मांगी। वायरस अटैक का यह मामला पहला नहीं था। इससे पहले भी कई बार ​वैश्विक स्तर पर कुछ रैनसमवेयर और मालवेयर्स लोगों को बेहद तंग किया है। आगे हमनें ऐसे 10 खतरनाक वायर का जिक्र किया है जिन्होंने पिछले कुछ सालों में तकनीक जगत को ​हिला कर रख दिया।

वासरस और रैनसमवेयर में क्या है अंतरransomware-2

आप हर रोज वायरस के बारे में सुनते होंगे वहीं अब वायरस के साथ रैनसमवेयर का भी जिक्र आता है। ऐसे में आपके मन में यह सवाल आना लाजमी है कि आ​खिर वायरस और रैनसमवेयर में अंतर क्या है? तो आपको बता दूं कि दोनों वायरस ही हैं। किसी डिवाइस में आने का तरीका भी वही है। पंरतु वायरस आपके फोन से डाटा चोरी करने कार्य करते हैं और उसका गलत तरीके से उपयोग कर सकते हैं जबकि रैनसमवेयर आपके डिवाइस पर अपना अधिकार बना लेता है और फाइलों के एन्क्रिप्ट कर देता है ​जिससे कि आप चाह कर भी खोल नहीं सकते। इसके बाद आपसे फिरौती की मांग करता है। यदि फिरौती न दें तो आपके फोन से सभी फाइल को डीलीट कर देगा।

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1. वानाक्राई
फिलहाल यह सबसे खतरनाक रैनसमवेयर है जिसने हाल में ही सायबर जगत को सकते में ला दिया है। विश्व भर में 150 से ज्यादा देश इससे प्रभावित हुए जिनमें भारत भी एक था। हैकर्स ने सिस्टम पर अपना नियंत्रण करने के बाद फिरौती मांगी।

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2. क्रिपटोलॉकर 2.0
5 सितंबर 2013 में इस वायरस ने लोगों को बेहद तंग किया था। इसने विशेष तौर पर विंडोज कंप्यूटर को अपना निशाना बनाया था। इसमें ईमेल अटैचमेंट के साथ लोगों को एक मेल भेजा गया जिसे खोलते ही कंप्यूटर पर उसने नियंत्रण कर लिया। इसके साथ ही इसने मैसेज भी भेजा जिसमें बिटक्वाइन से फिरौती मांगी गई।

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3. पेटया
इस वायरस ने अप्रैल 2016 में तबाही मचाई थी। इस यह वायरस बेह​द ही तेजी से कंप्यूटर्स को अपने प्रभाव में ले लेता था और पूरी बूट सिस्टम को तबाह कर देता था। प्रभावित सिस्टम के मास्टर बूट रिकॉर्ड को कस्टम बूट लोडर द्वारा ओवर राइट कर देता था और फाइल को ही एनक्रिप्ट कर देता था जिससे कि आप अपने पीसी पर उपलब्ध किसी फाइल को ही नहीं खोल पाते।

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4. लॉकी
फरवरी 2016 में इस रैनसमवेयर ने लोगों को सकते में डाल दिया था। ईमेल के साथ भेजे गए इस वायरस में पेमेंट इनवाइस भी अटैच होता था। मेल के साथ मैक्रोन भेजे जाते थे जिसे ​यदि यूजर ने इनेबल कर लिया तो ये मैक्रोन डिवाइस पर अपना अधिकार जमा लेते थे और बायनेरी फाइल को रन करके ट्रॉजन डाउनलोड करते थे जो सभी फाइल को एन्क्रिप्ट कर देते थे। इसे सिस्टम में उपस्थित फाइलों को आप खोल ही नहीं सकते थे।

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5. क्रिप्टोवॉल
वर्ष 2014 में इस वायरस ने लोगों को काफी डराया। यह वायरस ईमेल, ऐड या किसी वेबसाइट के माध्यम से भी कंप्यूटर में अपनी जगह बना लेता था। एक बार वायरस आ गया तो​ ​फिर यह कंप्यूटर में उपलब्ध फाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता था और उसे डीक्रिप्ट करने के लिए फिरौती मांगता था।

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6.​ जिग्सॉ
वर्ष 2016 में इस वायरस ने भी लोगों को काफी परेशान किया। यह फाइलों को इन्क्रिप्ट नहीं करता था बल्कि डिलीट करता था। पहले यह कंप्यूटर में घुसकर अपनी पैठ बनाता था और इसके बाद पैसे भुगतान के लिए कहता था। ऐसा नहीं करने पर यह हर घंटे डिवाइस से फाइल डिलीट करता था। हालांकि कुछ दिनों में ही इस वायरस का हल ढूढ़ लिया गया था।

7. क्रिप्टएक्सएक्स 3.0
क्रिप्ट परिवार के ​तीसरे संस्करण का यह वायरस बेहद ही खतरनाक था। वर्ष 2016 दिसंबर में कई देशों में इसने अपनी पैठ बना ली थी। क्रिशमस के डिस्काउंट देने और ऐसे ही दूसरे आॅफर्स के नाम पर यह कंप्यूटर में अपनी पैठ बना लेता ​था और ​वहां फाइलों को इन्क्रिप्ट कर देता था। इसके बाद जब आप जरूरी फाइलों को ओपेन करने जाते तो आपसे भारी भरकम रकम मांगी जाती थी।

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8. सरबर
इस वायरस का निर्माण सायबर क्रिमनल्स द्वारा किया गया था। ये डिवाइस में उपलब्ध जेपीईजी, डॉक्यूमेंट और रॉ फाइल्स को एन्क्रिप्ट करने में सक्षम था। विज्ञापन या मेल आदि के माध्यम से ये वायरस सिस्टम में अपना घर बना लेते थे और जैसे ही इनका अधिकार होता था ये डेस्कटॉप वालपेपर को लाल कर देते थे। इससे ही समझ में आ जाता था कि डिवाइस में वायरस का अटैक हो चुका है। इसके बाद यूजर से काफी भारी रकम मांगी जाती थी।

9. चिमेरा
इस रैनसमवेयर ने नवंबर 2015 में काफी लोगों को अपना शिकार बनाया। अफिलियेटेड मार्केटिंग के बढ़ते चलन में इसने इसी​ ट्रिक को अपना हथियार बनाया और लोगों को काफी परेशान किया। अफिलेटेड मार्केटिंग के ​जरिए पैसे कमाने का लालच देकर यह फोन में कोड भेजते थे जो डिवाइस को इन्क्रिप्ट कर देता था। इसके बाद ये फिरौती की रकम की मांग करते थे।

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10. डॉगस्पेक्टस
पिछले साल यह रैनसमवेयर भी काफी चर्चा में रहा। खास बात यह कही जाती है कि इसने एंडरॉयड डिवाइस को अपना निशाना बनाया। म्यूजिक, फोटो या किसी अन्य माध्यम से ये वायरस फोन में अपनी जगह बना ले​ता था और इसके बाद फोन को इन्क्रिप्ट कर 200 यूएस डॉलर आईट्यून गिफ्ट मांगता था।