इंटरनेट | Tech News in Hindi (टेक न्यूज़) https://www.91mobiles.com/hindi Mon, 08 Jun 2026 12:55:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.5.3 USB पोर्ट्स के रंग अलग-अलग क्यों होते हैं, जानें हर कलर का मतलब? https://www.91mobiles.com/hindi/usb-port-ke-rang-ka-matlab-kya-hai-usb-c-me-color-coding-kyon-nahi-hoti/ https://www.91mobiles.com/hindi/usb-port-ke-rang-ka-matlab-kya-hai-usb-c-me-color-coding-kyon-nahi-hoti/#respond Mon, 08 Jun 2026 12:55:16 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=197830 आज लगभग हर लैपटॉप, पीसी, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, गेमिंग कंसोल और एक्सटर्नल स्टोरेज डिवाइस में USB पोर्ट देखने को मिलते हैं। आज स्मार्टफोन चार्ज करना हो, पेन ड्राइव लगानी हो, एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव कनेक्ट करनी हो, कीबोर्ड-माउस इस्तेमाल करना हो या फिर मॉनिटर को लैपटॉप से जोड़ना हो, लगभग हर काम में USB पोर्ट की […]

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आज लगभग हर लैपटॉप, पीसी, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, गेमिंग कंसोल और एक्सटर्नल स्टोरेज डिवाइस में USB पोर्ट देखने को मिलते हैं। आज स्मार्टफोन चार्ज करना हो, पेन ड्राइव लगानी हो, एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव कनेक्ट करनी हो, कीबोर्ड-माउस इस्तेमाल करना हो या फिर मॉनिटर को लैपटॉप से जोड़ना हो, लगभग हर काम में USB पोर्ट की जरूरत पड़ती है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कई कंप्यूटर और लैपटॉप में USB पोर्ट अलग-अलग रंगों के होते हैं, जबकि USB-C पोर्ट लगभग हमेशा एक जैसे दिखाई देते हैं?

कई यूजर्स के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इन रंगों का मतलब क्या है और USB-C में यह सिस्टम क्यों नहीं अपनाया गया। असल में USB तकनीक के विकास के साथ-साथ इसकी पहचान करने के तरीके भी बदलते गए हैं। पहले USB पोर्ट की क्षमताओं को समझने के लिए रंग काफी मददगार थे, लेकिन USB-C के आने के बाद यह तरीका काफी हद तक अप्रासंगिक हो गया है। आइए समझते हैं कि USB पोर्ट्स की कलर कोडिंग कैसे काम करती है और USB-C के साथ यह व्यवस्था क्यों गायब हो गई।

USB-A पोर्ट्स में रंगों का क्या मतलब होता है?

USB यानी Universal Serial Bus को 1996 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग कंपनियों के डिवाइस और कंप्यूटर के बीच कनेक्टिविटी को आसान बनाना था। उस समय कई तरह के पोर्ट्स और कनेक्टर इस्तेमाल होते थे, जिससे यूजर्स को काफी परेशानी होती थी। जैसे-जैसे USB के नए वर्जन आते गए, उनकी डेटा ट्रांसफर स्पीड भी बढ़ती गई। समस्या यह थी कि बाहर से देखने पर सभी USB-A पोर्ट लगभग एक जैसे दिखाई देते थे। ऐसे में यूजर्स को समझ नहीं आता था कि कौन-सा पोर्ट तेज है और कौन-सा धीमा। इसी कारण कई निर्माताओं ने अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल शुरू किया ताकि यूजर्स आसानी से पोर्ट की क्षमता पहचान सकें। हालांकि USB-IF (USB Implementers Forum), जो USB स्टैंडर्ड को मैनेज करता है, ने कभी भी रंगों को आधिकारिक रूप से अनिवार्य नहीं बनाया है। फिर भी अधिकांश निर्माता एक सामान्य पैटर्न का पालन करते हैं, जिससे यूजर्स को पोर्ट की पहचान करने में मदद मिलती है।

  • सफेद (White) USB पोर्ट: सफेद रंग के USB पोर्ट सबसे पुराने USB 1.x स्टैंडर्ड को दर्शाते हैं। इनकी स्पीड 1.5 Mbps से 12 Mbps तक होती थी। आज के हाई-स्पीड इंटरनेट और बड़ी फाइल साइज के दौर में यह स्पीड बेहद कम मानी जाती है। इसलिए आधुनिक कंप्यूटर और लैपटॉप में सफेद USB पोर्ट लगभग गायब हो चुके हैं। यदि किसी पुराने कंप्यूटर में सफेद पोर्ट दिखाई दे, तो समझ जाइए कि वह बहुत पुरानी USB तकनीक है।
  • काला (Black) USB पोर्ट: काले रंग का पोर्ट USB 2.0 को दर्शाता है। यह 480 Mbps तक की डेटा ट्रांसफर स्पीड सपोर्ट करता है। यह वर्ष 2000 के आसपास लोकप्रिय हुआ था। आज भी बहुत से टीवी, प्रिंटर, सेट-टॉप बॉक्स, गेमिंग कंसोल और बजट लैपटॉप में USB 2.0 पोर्ट देखने को मिल जाते हैं। हालांकि यह लेटेस्ट SSD या हाई-स्पीड स्टोरेज के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता है, लेकिन सामान्य माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर और चार्जिंग जैसे कामों के लिए अभी भी उपयोगी है।
  • नीला (Blue) USB पोर्ट: USB 3.0 से USB दुनिया में बड़ा बदलाव आया है, क्योंकि इसकी अधिकतम स्पीड 5 Gbps तक पहुंच गई। यह USB 2.0 की तुलना में लगभग 10 गुना तेज है। इसी वजह से USB-IF ने भी USB 3.0 पोर्ट्स को पहचानने के लिए नीले रंग (Pantone 300C) के उपयोग की सिफारिश की थी। यही कारण है कि नीला USB पोर्ट सबसे ज्यादा पहचाना जाने वाला USB रंग बन गया है। आज भी यदि किसी लैपटॉप में नीला USB-A पोर्ट दिखे तो संभावना है कि वह कम से कम USB 3.0 स्पीड सपोर्ट करता हो।
  • टील (Teal) USB पोर्ट: टील या हरे-नीले रंग का पोर्ट अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। इसे कई निर्माता USB 3.1 Gen 2 या USB 3.2 Gen 2 पोर्ट्स के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो 10 Gbps तक की स्पीड प्रदान कर सकते हैं। हालांकि यह कोई यूनिवर्सल स्टैंडर्ड नहीं है, इसलिए एक कंपनी में टील रंग का मतलब कुछ और हो सकता है जबकि दूसरी कंपनी में इसका उपयोग बिल्कुल अलग उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।
  • लाल (Red) USB पोर्ट: लाल रंग वाले USB पोर्ट आमतौर पर हाई-परफॉर्मेंस USB पोर्ट्स माने जाते हैं। ये USB 3.1 Gen 2 या USB 3.2 जैसे स्टैंडर्ड को सपोर्ट कर सकते हैं। इनकी डेटा ट्रांसफर स्पीड 10 Gbps से लेकर 20 Gbps तक हो सकती है। कई निर्माता इन पोर्ट्स को Always-On USB के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि यदि आपका लैपटॉप बंद भी हो, तब भी यह पोर्ट स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या अन्य डिवाइस को चार्ज कर सकता है।
  • पीला और नारंगी (Yellow/Orange) USB पोर्ट: ये पोर्ट मुख्य रूप से लैपटॉप में देखने को मिलते हैं। इनकी खासियत यह है कि सिस्टम स्लीप या स्टैंडबाय मोड में होने पर भी चार्जिंग जारी रख सकते हैं। इसलिए इन्हें अक्सर पावर-शेयरिंग USB पोर्ट कहा जाता है।

USB-C में अलग-अलग रंग क्यों नहीं होते?

यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। USB-A पोर्ट आमतौर पर केवल डेटा ट्रांसफर और चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होते थे। लेकिन USB-C एक साधारण USB पोर्ट नहीं है। यह एक मल्टीफंक्शनल इंटरफेस बन चुका है। USB-C पोर्ट अलग-अलग कार्य कर सकता है, जैसे:

  • स्मार्टफोन और लैपटॉप चार्ज करना
  • हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर
  • 4K और 8K वीडियो आउटपुट
  • ऑडियो ट्रांसमिशन
  • Thunderbolt सपोर्ट
  • DisplayPort सपोर्ट
  • HDMI आउटपुट
  • Ethernet कनेक्टिविटी
  • एक्सटर्नल GPU सपोर्ट
  • SSD और स्टोरेज डिवाइस कनेक्ट करना

समस्या यह है कि हर USB-C पोर्ट इन सभी फीचर्स को सपोर्ट नहीं करता है। उदाहरण के लिए, दो USB-C पोर्ट देखने में बिल्कुल एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन एक केवल 480 Mbps डेटा ट्रांसफर करता हो, जबकि दूसरा हो सकता है कि 40 Gbps Thunderbolt 4 स्पीड, 240W चार्जिंग और 8K वीडियो आउटपुट सपोर्ट करता हो। ऐसे में केवल एक कलर से उसकी पूरी क्षमता को बताना संभव नहीं है।

USB-C Alternate Mode क्या है?

USB-C की सबसे बड़ी खासियत Alternate Mode तकनीक है। यह तकनीक USB-C पोर्ट को अलग-अलग प्रोटोकॉल में काम करने की अनुमति देती है। उदाहरण के लिए वही पोर्ट:

  • DisplayPort बन सकता है
  • HDMI आउटपुट दे सकता है
  • Thunderbolt की तरह काम कर सकता है
  • ऑडियो आउटपुट प्रदान कर सकता है

यानी एक ही पोर्ट कई अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकता है। यही वजह है कि USB-C के लिए रंग आधारित पहचान प्रणाली व्यावहारिक नहीं मानी जाती है।

USB-C पोर्ट की पहचान कैसे करें?

USB-C पोर्ट में रंग नहीं होते हैं, इसलिए इसकी क्षमता जानने के लिए लोगो और चिन्हों को देखना जरूरी है। यदि पोर्ट के पास SS लिखा हो तो वह SuperSpeed USB को दर्शाता है। यदि बिजली जैसा Thunderbolt लोगो बना हो तो इसका मतलब है कि पोर्ट हाई-स्पीड Thunderbolt तकनीक सपोर्ट करता है। यदि बैटरी या चार्जिंग का चिन्ह बना हो तो वह हाई-पावर चार्जिंग को दर्शाता है। DisplayPort का लोगो यह बताता है कि पोर्ट मॉनिटर या डिस्प्ले आउटपुट सपोर्ट करता है।

क्या लोगो हमेशा भरोसेमंद होते हैं?

दुर्भाग्य से नहीं। कई निर्माता अपने डिवाइस पर कोई लोगो नहीं लगाते है। Apple इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। MacBook Air M4 और MacBook Pro जैसे डिवाइस Thunderbolt 4 पोर्ट्स के साथ आते हैं, लेकिन पोर्ट के पास कोई स्पष्ट पहचान चिन्ह नहीं दिया जाता है। ऐसे मामलों में यूजर को आधिकारिक स्पेसिफिकेशन, यूजर मैनुअल या निर्माता की वेबसाइट देखनी पड़ती है।

USB-C का फ्यूचर

आज USB-C दुनिया का सबसे लोकप्रिय और तेजी से अपनाया जाने वाला कनेक्टर बन चुका है। यूरोपीय यूनियन सहित कई देशों ने USB-C को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के लिए स्टैंडर्ड चार्जिंग पोर्ट घोषित कर दिया है। USB4, Thunderbolt 5 और 240W Power Delivery जैसी नई तकनीकों के साथ USB-C की क्षमताएं और बढ़ती जा रही हैं। इसलिए भविष्य में रंगों की बजाय स्मार्ट लेबलिंग, डिजिटल पहचान और बेहतर दस्तावेजीकरण पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, USB-A पोर्ट्स में कलर का उपयोग यूजर्स को उनकी स्पीड और क्षमता समझाने के लिए किया जाता था। सफेद, काला, नीला, लाल और पीला रंग अलग-अलग USB पीढ़ियों और फीचर्स का संकेत देते हैं, लेकिन USB-C तकनीक इतनी एडवांस और मल्टीपर्पज हो चुकी है कि केवल एक रंग से उसकी वास्तविक क्षमता बताना संभव नहीं है। यही वजह है कि USB-C पोर्ट्स में कलर कोडिंग लगभग पूरी तरह समाप्त हो गई है और उनकी पहचान के लिए लोगो, सिंबल और आधिकारिक स्पेसिफिकेशन का सहारा लिया जाता है। यदि आप किसी USB-C पोर्ट की पूरी क्षमता जानना चाहते हैं, तो केवल उसके आकार या रंग पर भरोसा करने के बजाय डिवाइस की तकनीकी जानकारी जरूर चेक करें।

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अगर आपने अपने घर या ऑफिस में लगे Wi-Fi Router को कभी ध्यान से देखा होगा, तो आपने जरूर नोटिस किया होगा कि उस पर लगी छोटी-छोटी LED लाइट्स लगातार ब्लिंक करती रहती हैं। कई लोगों को लगता है कि ये लाइट्स सिर्फ यह बताने के लिए होती हैं कि राउटर ऑन है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है।

दरअसल, ये ब्लिंकिंग लाइट्स आपके नेटवर्क की पूरी स्थिति का रियल-टाइम अपडेट देती हैं। कौन-सा कनेक्शन एक्टिव है, इंटरनेट चल रहा है या नहीं, डेटा ट्रांसफर हो रहा है या कोई समस्या है-इन सभी सवालों के जवाब आपको इन्हीं लाइट्स के जरिए मिल सकते हैं। हालांकि हर राउटर ब्रांड और मॉडल में लाइट्स के रंग और पैटर्न थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर राउटर एक कॉमन सिस्टम को फॉलो करते हैं। अगर आप इन संकेतों को समझ लेते हैं, तो बिना किसी टेक्निकल जानकारी के भी आप अपने इंटरनेट की स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं।

Router की लाइट्स क्यों ब्लिंक करती हैं?

जब आप अपने राउटर को पहली बार ऑन करते हैं, तो आपको कुछ लाइट्स धीरे-धीरे ब्लिंक करती हुई दिखाई देंगी। यह संकेत होता है कि राउटर बूट हो रहा है और नेटवर्क से कनेक्ट होने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।

इस दौरान राउटर मॉडेम या इंटरनेट लाइन से कनेक्शन स्थापित करने की कोशिश करता है। जब कनेक्शन बन जाता है, तो लाइट्स का पैटर्न बदल जाता है। कुछ लाइट्स स्थिर हो जाती हैं, जबकि कुछ हल्की या तेज ब्लिंकिंग के साथ एक्टिविटी दिखाती रहती हैं। अगर आप उस समय इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं,जैसे- वीडियो देख रहे हैं, गेम खेल रहे हैं या फाइल डाउनलोड कर रहे हैं, तो आपको तेजी से ब्लिंक करती हुई लाइट्स दिखाई देंगी। यह इस बात का संकेत है कि डेटा ट्रांसफर हो रहा है और नेटवर्क एक्टिव है।

Green Light का मतलब क्या होता है?

ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तरह राउटर में भी ग्रीन कलर का मतलब “सब कुछ ठीक है” होता है।

  • अगर ग्रीन लाइट लगातार जल रही है, तो इसका मतलब है कि कनेक्शन स्थिर है और राउटर सही तरीके से काम कर रहा है।
  • अगर ग्रीन लाइट ब्लिंक कर रही है, तो इसका मतलब है कि नेटवर्क पर डेटा ट्रैफिक चल रहा है यानी इंटरनेट इस्तेमाल हो रहा है।

इसलिए अगर आपको अपने राउटर पर ग्रीन ब्लिंकिंग लाइट दिखाई दे रही है, तो यह सामान्य बात है और आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अलग-अलग Colors क्या संकेत देते हैं?

राउटर पर सिर्फ ग्रीन ही नहीं, बल्कि कई अन्य रंगों की लाइट्स भी होती हैं और हर रंग का अपना अलग मतलब होता है।

  • White Light: कुछ राउटर में ग्रीन की जगह व्हाइट लाइट दी जाती है। इसका मतलब भी वही होता है-डिवाइस सही तरीके से काम कर रहा है।
  • Red या Orange Light: अगर आपको लाल या नारंगी रंग की लाइट दिखाई देती है, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इसका मतलब हो सकता है कि इंटरनेट कनेक्शन नहीं मिल रहा या नेटवर्क में कोई गड़बड़ी है।
  • Yellow Light: यह अक्सर प्रोसेसिंग या सेटअप का संकेत देता है यानी राउटर कोई काम कर रहा है, जैसे- कनेक्शन स्थापित करना या अपडेट होना।
  • Blue Light: कुछ एडवांस राउटर में ब्लू लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक्टिव कनेक्शन या Bluetooth/Wi-Fi पेयरिंग को दर्शा सकती है।

Blinking Pattern का क्या मतलब होता है?

रंग के साथ-साथ लाइट्स के ब्लिंक करने का तरीका भी बहुत कुछ बताता है।

  • धीमी ब्लिंकिंग: अगर लाइट धीरे-धीरे ब्लिंक कर रही है, तो इसका मतलब होता है कि राउटर कोई प्रोसेस कर रहा है,जैसे- नेटवर्क से कनेक्ट होना या सिस्टम स्टार्ट होना।
  • तेज ब्लिंकिंग: तेजी से ब्लिंक करने वाली लाइट यह दिखाती है कि डेटा ट्रांसफर हो रहा है यानी आपका इंटरनेट एक्टिव है और इस्तेमाल में है।
  • लगातार जलना: अगर लाइट लगातार जल रही है और ब्लिंक नहीं कर रही है, तो इसका मतलब है कि कनेक्शन स्थिर है और कोई एक्टिव डेटा ट्रांसफर नहीं हो रहा है।
  • कोई लाइट नहीं: अगर कोई लाइट नहीं जल रही है, तो इसका मतलब हो सकता है कि वह फीचर बंद है या उस समय इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

Router पर बने Symbols का क्या मतलब होता है?

राउटर पर सिर्फ लाइट्स ही नहीं, बल्कि कई तरह के symbols भी होते हैं। ये symbols यह बताते हैं कि कौन-सा फीचर किस लाइट से जुड़ा हुआ है।

  • Power Icon: राउटर ऑन है।
  • Internet या WAN: इंटरनेट कनेक्शन एक्टिव है।
  • LAN या Ethernet: केबल के जरिए कनेक्टेड डिवाइस।
  • 2.4GHz/5GHz: अलग-अलग Wi-Fi बैंड्स।
  • Upstream/Downstream: डेटा अपलोड और डाउनलोड हो रहा है।
  • WPS Button/Icon: Wi-Fi डिवाइस को जल्दी कनेक्ट करने का ऑप्शन।

इन symbols के पास लगी लाइट्स अगर ब्लिंक कर रही हैं, तो इसका मतलब है कि वह फीचर उस समय इस्तेमाल हो रहा है।

कब आपको चिंता करनी चाहिए?

हर ब्लिंकिंग लाइट समस्या का संकेत नहीं होती है, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहां आपको ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर Red या Orange लाइट लगातार जल रही है, Internet/WAN लाइट बंद है, राउटर बार-बार रीस्टार्ट हो रहा है या कोई भी लाइट एक्टिव नहीं है, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले राउटर को रीस्टार्ट करें। अगर समस्या बनी रहती है, तो केबल्स चेक करें या अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करें।

कुल मिलाकर देखें, तो आपके Wi-Fi Router की LED लाइट्स सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि ये आपके नेटवर्क की पूरी जानकारी देने वाले संकेत हैं। ग्रीन ब्लिंकिंग लाइट आमतौर पर यह बताती है कि आपका इंटरनेट सही तरीके से काम कर रहा है और डेटा ट्रांसफर हो रहा है। वहीं, अलग-अलग रंग और ब्लिंकिंग पैटर्न आपको नेटवर्क की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। अगर आप इन संकेतों को समझ लेते हैं, तो छोटी-मोटी इंटरनेट समस्याओं को आप खुद ही पहचान सकते हैं और जल्दी से उनका समाधान भी निकाल सकते हैं। इससे न सिर्फ आपका समय बचेगा, बल्कि आपको हर छोटी समस्या के लिए टेक्निशियन पर निर्भर भी नहीं रहना पड़ेगा।

सवाल-जवाब (FAQs)

राउटर में हरी लाइट ब्लिंक करने का क्या मतलब होता है?

हरी ब्लिंकिंग लाइट आमतौर पर इस बात का संकेत होती है कि आपका इंटरनेट कनेक्शन सही तरीके से काम कर रहा है और नेटवर्क पर डेटा ट्रांसफर हो रहा है। जब आप वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग या ब्राउजिंग करते हैं, तब यह लाइट तेजी से ब्लिंक कर सकती है, जो एक्टिव नेटवर्क ट्रैफिक को दिखाती है।

अगर राउटर की लाइट लाल या ऑरेंज हो जाए तो क्या करना चाहिए?

लाल या ऑरेंज लाइट आमतौर पर किसी समस्या का संकेत देती है, जैसे- इंटरनेट कनेक्शन डाउन होना, मॉडेम से कनेक्शन टूटना या नेटवर्क एरर। ऐसे में राउटर को रीस्टार्ट करना, केबल्स चेक करना और जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करना सही रहता है।

क्या राउटर की लगातार तेज ब्लिंकिंग लाइट कोई समस्या है?

जरूरी नहीं। तेज ब्लिंकिंग अक्सर यह दिखाती है कि डेटा तेजी से ट्रांसफर हो रहा है, जैसे- जब कई डिवाइस एक साथ इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हों। लेकिन अगर बिना किसी एक्टिविटी के भी लाइट लगातार तेजी से ब्लिंक हो रही है, तो यह बैकग्राउंड अपडेट या किसी अनजान नेटवर्क एक्टिविटी का संकेत हो सकता है।

राउटर की लाइट बंद क्यों हो जाती है?

अगर किसी विशेष इंडिकेटर की लाइट बंद है, तो इसका मतलब हो सकता है कि वह फीचर एक्टिव नहीं है। उदाहरण के लिए, LAN लाइट बंद होने का मतलब है कि कोई वायर्ड डिवाइस कनेक्ट नहीं है, लेकिन अगर पावर लाइट ही बंद है, तो यह पावर सप्लाई या राउटर में खराबी का संकेत हो सकता है।

क्या अलग-अलग ब्रांड के राउटर में लाइट पैटर्न अलग होते हैं?

हां, हर कंपनी अपने राउटर के लिए अलग लाइट कलर और पैटर्न डिजाइन करती है। हालांकि बेसिक संकेत लगभग समान होते हैं, लेकिन सही जानकारी के लिए हमेशा अपने राउटर के यूजर मैनुअल या कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट देखना सबसे बेहतर तरीका होता है।

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Sarvam AI क्या है? जो ग्लोबल दिग्गज Google Gemini और ChatGPT को दे रहा टक्कर https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-sarvam-ai-features-price-comparison-with-google-gemini-chatgpt/ https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-sarvam-ai-features-price-comparison-with-google-gemini-chatgpt/#respond Thu, 12 Feb 2026 07:46:11 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=190216 इन दिनों में दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की खूब चर्चा हो रही है। इसी बीच बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी सर्वम एआई (Sarvam AI) अचानक सुर्खियों में आ गई है। India AI Impact Summit से पहले कंपनी ने अपने दो बड़े मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनकी तुलना सीधे Google Gemini और OpenAI के ChatGPT […]

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इन दिनों में दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की खूब चर्चा हो रही है। इसी बीच बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी सर्वम एआई (Sarvam AI) अचानक सुर्खियों में आ गई है। India AI Impact Summit से पहले कंपनी ने अपने दो बड़े मॉडल लॉन्च किए हैं, जिनकी तुलना सीधे Google Gemini और OpenAI के ChatGPT से की जा रही है। खास बात यह है कि Sarvam AI कोई बड़ा जनरल चैटबॉट बनाने की दौड़ में नहीं है, बल्कि यह भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर खास कामों के लिए AI मॉडल तैयार कर रहा है। कंपनी का फोकस भारतीय भाषाओं, मुश्किल दस्तावेजों और सरकारी-एंटरप्राइज इस्तेमाल पर है, जहां ग्लोबल AI मॉडल अक्सर उम्मीद के मुताबिक परफॉर्मेंस नहीं कर पाते हैं। आइए जानते हैं Sarvam AI क्या है? इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है और यह चैटजीपीट और गूगल जेमिनी से कैसे अलग है?

Sarvam AI क्या है?

Sarvam AI एक भारतीय AI स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 2023 में प्रत्यूष कुमार और विवेक राघवन ने की थी। कंपनी का लक्ष्य Sovereign AI बनाना है। इसका मतलब है ऐसे AI सिस्टम तैयार करना जो भारत में डिजाइन, ट्रेन और डिप्लॉय किए जाएं और जो भारतीय भाषाओं, डाटा और काम करने के तरीकों के अनुरूप हों। जहां बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक जैसा सिस्टम बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं Sarvam AI इंडिया सेंट्रिक सॉल्यूशन पर काम कर रहा है। कंपनी का मानना है कि भारत जैसे बहुभाषी और विविध देश के लिए खास तरह के AI सिस्टम की जरूरत है।

Sarvam Vision क्या है और क्यों खास है?

Sarvam Vision कंपनी का डॉक्युमेंट इंटेलिजेंस और OCR (Optical Character Recognition) मॉडल है। यह मॉडल स्कैन किए गए डॉक्यूमेंट, टेबल, टेक्स्ट और तकनीकी पेज को समझने में सक्षम है। भारत में कई सरकारी और कानूनी दस्तावेज स्कैन फॉर्मेट में होते हैं, जिनमें अलग-अलग भाषाएं और जटिल लेआउट होते हैं। ऐसे मामलों में सामान्य AI मॉडल अक्सर सही रिजल्ट नहीं दे पाते हैं, लेकिन Sarvam Vision को खासतौर पर इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कुछ बेंचमार्क टेस्ट में Sarvam Vision ने काफी अच्छा परफॉर्मेंस कर दिखाया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसने कठिन OCR टेस्ट में हाई एक्यूरेसी हासिल की है और कई मामलों में बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉडलों से बेहतर रिजल्ट दिए हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह Gemini या ChatGPT की जगह ले लेगा, लेकिन यह दिखाता है कि खास कामों के लिए बनाए गए मॉडल बेहतर परफॉर्मेंस कर सकते हैं।

Sarvam AI

Sarvam के लिए यह प्रोडक्ट रोलआउट क्यों अहम है

Sarvam का लक्ष्य सिर्फ एक AI मॉडल बनाना नहीं है, बल्कि एक पूरा फुल-स्टैक AI सिस्टम तैयार करना है, जो भारत जैसे बहुभाषी और विविधतापूर्ण देश की जरूरतों को पूरा कर सके। भारत में 22 से अधिक आधिकारिक भाषाएं और सैकड़ों बोलियां हैं, जिनके लिए ग्लोबल टेक कंपनियों ने अब तक सीमित समाधान ही डेवलप किए हैं। Menlo Ventures के Deedy Das जैसे ग्लोबल निवेशकों ने भी माना है कि Sarvam के स्पीच और OCR सिस्टम भारतीय भाषाओं के लिए अब तक के सबसे मजबूत समाधानों में से हैं। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत की सॉवरेन मॉडल रणनीति अब परिणाम देने लगी है और आलोचक भी इसकी तकनीकी क्षमता की सराहना कर रहे हैं।

Sarvam AI का उपयोग कैसे करें?

Sarvam AI का उपयोग करना आसान है। इसके लिए नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगाः

  • स्टेप-1: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर में गूगल ओपन करें। सर्च बार में Sarvam AI टाइप करें और सर्च बटन दबाएं। आपको सबसे ऊपर Sarvam AI की आधिकारिक वेबसाइट दिखाई देगी।
  • स्टेप-2: सर्च रिजल्ट में दिख रहे पहले लिंक पर क्लिक करें। ध्यान रखें कि आप किसी फर्जी या विज्ञापन लिंक पर न जाएं। आधिकारिक वेबसाइट पर पहुंचने के बाद आपको होमपेज दिखाई देगा, जहां कंपनी के मॉडल और प्रोडक्ट की जानकारी दी गई है।
  • स्टेप-3: वेबसाइट के होमपेज पर Experience Sarvam का बटन दिखाई देगा। इस पर क्लिक करें। यह आपको उस सेक्शन में ले जाएगा जहां से आप Sarvam के टूल्स और मॉडल्स को सीधे आजमा सकते हैं।

Sarvam AI

  • स्टेप-4: Sarvam AI का इस्तेमाल करने के लिए आपको लॉगइन करना जरूरी होगा। अगर आपका पहले से गूगल अकाउंट है, तो इसे से लॉगइन कर सकते हैं। अगर अकाउंट नहीं है तो साइन-अप पर क्लिक करके नया अकाउंट बनाएं। आमतौर पर ईमेल वेरिफिकेशन के बाद आपका अकाउंट एक्टिव हो जाता है।
  • स्टेप-5: लॉगइन करने के बाद आप Sarvam AI के डैशबोर्ड पर पहुंच जाएंगे। यहां आपको अलग-अलग टूल्स, जैसे- डॉक्यूमेंट इंटेलिजेंस, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-स्पीच या अन्य AI फीचर्स के विकल्प मिलेंगे।

  • स्टेप-6: अब आप अपनी जरूरत के अनुसार टूल चुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपको किसी दस्तावेज को समझना है तो डॉक्यूमेंट इंटेलिजेंस विकल्प चुनें। अगर आवाज से टेक्स्ट बनाना है तो स्पीच-टू-टेक्स्ट फीचर इस्तेमाल करें। आप टेक्स्ट डालकर या ऑडियो अपलोड करके तुरंत रिजल्ट देख सकते हैं।
  • स्टेप-7:अगर आप डेवलपर हैं, तो Sarvam AI की वेबसाइट पर API एक्सेस और डॉक्यूमेंटेशन भी उपलब्ध है। इसके जरिए आप अपने ऐप या वेबसाइट में Sarvam के मॉडल इंटीग्रेट कर सकते हैं।

इस तरह कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप Sarvam AI को इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं।

Sarvam AI के फीचर्स

Sarvam Vision: डॉक्यूमेंट को समझने वाला AI मॉडल

Sarvam ने Sarvam Vision नाम से 3 बिलियन पैरामीटर वाला एक विजन-लैंग्वेज मॉडल पेश किया है, जो खास तौर पर डॉक्यूमेंट डिजिटाइजेशन और समझ के लिए बनाया गया है। इसका फोकस भारतीय भाषाओं पर है।


यह कैसे काम करता है

Sarvam Vision सिर्फ टेक्स्ट पढ़ने वाला मॉडल नहीं है। इसमें एक सॉवरेन विजन-लैंग्वेज मॉडल के साथ दो अतिरिक्त सिस्टम जुड़े हैं – एक सेमांटिक लेआउट पार्सर और एक रीडिंग ऑर्डर नेटवर्क। यह मॉडल सिंथेटिक और वास्तविक दस्तावेजों के मिश्रण पर प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें सरकारी डॉक्यूमेंट, बैंक रिकॉर्ड, अखबार, किताबें और ऐतिहासिक पांडुलिपियां शामिल हैं। प्रशिक्षण में अंग्रेजी और 22 भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है।

यह मॉडल डॉक्यूमेंट इंटेलिजेंस को सिर्फ टेक्स्ट निकालने का काम नहीं मानता है, बल्कि इसे नॉलेज निकालने की प्रक्रिया के रूप में देखता है। यह टेबल, चार्ट और मुश्किल लेआउट को भी समझ सकता है। Sarvam ने Sarvam Indic OCR Bench नाम का एक बेंचमार्क डेटासेट भी जारी किया है, जो 22 भारतीय भाषाओं को कवर करता है। कंपनी का दावा है कि भारतीय भाषाओं में वर्ड एक्युरेसी के मामले में यह मॉडल Google Gemini 3 Pro और Anthropic Claude Opus 4.5 जैसे ग्लोबल मॉडलों से बेहतर परफॉर्मेंस करता है।

Sarvam Audio: भारतीय भाषाओं के लिए एडवांस स्पीच रिकॉग्निशन

Sarvam Audio ऑडियो लैंग्वेज मॉडल है, जो भारतीय भाषाओं में स्पीच रिकॉग्निशन के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह कई बेंचमार्क पर Gemini-3 और GPT-4o Transcribe से बेहतर है।

यह कैसे काम करता है

यह मॉडल स्पीच को सिर्फ ऑडियो-टू-टेक्स्ट टास्क की तरह नहीं देखता है, बल्कि इसे एक संदर्भ संकेत के रूप में समझता है। इससे यह लंबी बातचीत, कई वक्ताओं की आवाज, ओवरलैपिंग स्पीच और शोर वाले माहौल में भी बेहतर काम करता है। यह कोड-मिक्स्ड ट्रांसक्रिप्शन को भी सपोर्ट करता है यानी जब लोग एक ही वाक्य में हिंदी और अंग्रेजी या अन्य भाषाएं मिलाकर बोलते हैं। बता दें कि Sarvam Audio सीधे ऑडियो से इंटेंट और कमांड निकाल सकता है, जिससे अलग से ट्रांसक्रिप्शन और फिर इंटरप्रिटेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे लेटेंसी कम होती है और वॉयस एजेंट बनाना आसान हो जाता है।

Sarvam Dub: लाइव AI डबिंग

Sarvam ने दावा किया कि उसने केंद्रीय बजट भाषण की लाइव AI डबिंग कई भारतीय भाषाओं में की, वह भी दो मिनट से कम लेटेंसी के साथ। यह पहली बार था जब राष्ट्रीय बजट को लाइव AI से डब किया गया।

यह कैसे काम करता है

यह डबिंग फीचर Sarvam Dub नामक AI मॉडल पर आधारित है। यह मॉडल भाषण को एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करता है, लेकिन मूल वक्ता की आवाज की विशेषताओं को बनाए रखता है। मॉडल इस बात पर खास ध्यान देता है कि अनुवाद के बाद भी वक्ता की टोन, बोलने की लय (कैडेंस) और आवाज की पहचान बनी रहे। इससे दर्शक अपनी पसंदीदा भाषा में भाषण सुन सकते हैं, बिना मूल वक्ता की परिचित आवाज खोए।

लाइव डबिंग में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जब स्रोत टेक्स्ट पहले से उपलब्ध न हो, तब लेटेंसी को कम कैसे रखा जाए। इसे हल करने के लिए Sarvam ने अपने मॉडल और सर्विंग पाइपलाइन को ऑप्टिमाइज किया और बेस सिस्टम की तुलना में 6.6 गुना कम लेटेंसी हासिल करने का दावा किया। Sarvam का कहना है कि स्पीकर सिमिलैरिटी मेट्रिक में यह मॉडल ElevenLabs और Cartesia जैसे ग्लोबल प्रतिस्पर्धियों से बेहतर साबित हुआ है। कंपनी ने यह भी बताया कि यह सिस्टम बड़े पैमाने पर पहले से इस्तेमाल हो रहा है, जैसे- प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को हर महीने 11 भारतीय भाषाओं में डब करने के लिए किया जाता है। स्टार्टअप ने IIT मद्रास के साथ मिलकर एजुकेशनल कंटेंट की डबिंग का प्रदर्शन भी किया है।

Bulbul V3: नेचुरल और प्रोडक्शन-रेडी भारतीय आवाजों के लिए

Sarvam ने अपने टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल का नया संस्करण Bulbul V3 लॉन्च किया। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में नेचुरल और प्रोडक्शन-लेवल की आवाजें उपलब्ध कराना है।

यह कैसे काम करता है

Bulbul V3 एक लैंग्वेज मॉडल की मदद से टेक्स्ट का विश्लेषण करता है और उसमें मौजूद टोन, ठहराव (पॉज), जोर (एम्फेसिस) और बोलने की गति (पेसिंग) जैसे तत्वों का अनुमान लगाता है। इससे तैयार की गई आवाज ज्यादा नेचुरल और अभिव्यक्तिपूर्ण लगती है, चाहे वह लंबा कंटेंट हो या बातचीत आधारित उपयोग। वहीं यह वॉयस क्लोनिंग को भी सपोर्ट करता है, जिससे टीमें अपनी कस्टम आवाजें बना सकती हैं और उनमें नेचुरल अभिव्यक्ति और क्वालिटी बनाए रख सकती हैं।

इस मॉडल में 11 भाषाओं में 35 से अधिक आवाजें उपलब्ध हैं, जिन्हें पेशेवर वॉयस आर्टिस्ट से तैयार किया गया है। यह कोड-स्विचिंग, क्षेत्रीय उच्चारण, संख्याएं और नाम जैसे भारतीय भाषण की सामान्य चुनौतियों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। जल्द ही इसे 22 भारतीय भाषाओं तक विस्तार किया जाएगा। Sarvam के अनुसार, Bulbul V3 का मूल्यांकन 11 भाषाओं में एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ब्लाइंड लिसनिंग स्टडी में किया गया, जहां इसमें कम त्रुटि दर मिली। स्टार्टअप का दावा है कि इस मॉडल ने ElevenLabs के V3 Alpha और Cartesia के Sonic-3 जैसे ग्लोबल मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन किया। साथ ही, Sarvam इस महीने डेवलपर्स को अनलिमिटेड API एक्सेस भी दे रहा है।

Samvaad: चैट एजेंट प्लेटफॉर्म

Sarvam ने बताया कि उसका संवाद एजेंट प्लेटफॉर्म Samvaad अब रोजाना 10 लाख मिनट से अधिक की बातचीत संभाल रहा है।

यह कैसे काम करता है

Samvaad फोन कॉल और व्हाट्सऐप जैसे चैनलों पर AI-संचालित बातचीत को सक्षम बनाता है। इसका उपयोग कस्टमर सपोर्ट, ऑनबोर्डिंग, बिक्री और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक अभियानों के लिए किया जाता है। ये एजेंट लगातार काम कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इंसानी सहायता के साथ हाइब्रिड वर्कफ्लो में भी तैनात किए जा सकते हैं।

Sarvam के अनुसार, कुछ एजेंट अपने उपयोग से मिलने वाले फीडबैक डाटा के जरिए खुद को और बेहतर बनाते हैं। इससे एक तेज रिइनफोर्समेंट लूप बनता है, जो समय के साथ एजेंट को तेजी से स्केल करने में मदद करता है। कंपनी ऐसे सफल डिप्लॉयमेंट को रॉकेटशिप एजेंट कहती है।

सॉवरेन AI: इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए राज्यों से साझेदारी

Sarvam ने ओडिशा और तमिलनाडु सरकारों के साथ सॉवरेन AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।

यह कैसे काम करता है

ओडिशा में 50 मेगावाट का AI-ऑप्टिमाइज्ड कंप्यूट सेंटर बनाया जाएगा, जो ई-गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि सलाह और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसी सेवाओं को सपोर्ट करेगा। वहीं, तमिलनाडु में Digital Sangam नामक सॉवरेन AI रिसर्च पार्क IIT मद्रास के साथ विकसित किया जाएगा। इसमें 20 मेगावाट का AI डेटा सेंटर होगा।

ये पहल सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट नहीं हैं, बल्कि राज्य-स्तरीय व्यापक AI तैनाती का हिस्सा हैं। Sarvam इसे दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता निर्माण के रूप में देखता है।

Sarvam AI बनाम Gemini और ChatGPT

Gemini और ChatGPT बड़े और मल्टी-पर्पज AI मॉडल हैं। ये कोडिंग, राइटिंग, रिसर्च और बातचीत जैसे कई काम कर सकते हैं। Sarvam AI का दृष्टिकोण अलग है। यह हर काम करने की कोशिश नहीं करता है, बल्कि कुछ खास क्षेत्रों में गहराई से काम करता है। यही कारण है कि डॉक्युमेंट समझने और भारतीय भाषाओं में स्पीच जेनरेशन जैसे कामों में इसका परफॉर्मेंस मजबूत बताया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि AI में केवल आकार और डाटा की मात्रा ही सब कुछ नहीं होती है। सही दिशा और स्पष्ट उद्देश्य भी उतने ही जरूरी हैं।

Sarvam AI की कीमत और प्लान

Sarvam AI ने अपनी सेवाओं की कीमत भारतीय रुपये में रखी है, जिससे यह भारतीय स्टार्टअप्स और डेवलपर्स के लिए किफायती बनता है। हर नए अकाउंट को शुरुआती मुफ्त क्रेडिट दिए जाते हैं। Speech-to-Text, Translation, Language Identification और Text-to-Speech जैसी सेवाओं के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। कंपनी ने Starter, Pro और Business जैसे प्रीपेड प्लान भी पेश किए हैं, जिनमें ज्यादा उपयोग की सुविधा और सपोर्ट मिलता है। यह मॉडल खास तौर पर उन कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो भारतीय भाषाओं में डिजिटल सेवाएं देना चाहती हैं। Sarvam-M Chat LLM और Document Intelligence (Sarvam Vision) जैसी कोर सेवाएं फरवरी 2026 तक मुफ्त एक्सेस के साथ उपलब्ध हैं।

कोर सेवाओं की दरें इस प्रकार हैं

  • Speech-to-Text की कीमत ₹30 प्रति घंटा है, जिसमें प्रति सेकंड बिलिंग होती है। यदि Diarization या Translation + Diarization जोड़ा जाए, तो ₹45 प्रति घंटा।
  • Translation (Sarvam V1/Mayura V1) और Transliteration की दर ₹20 प्रति 10,000 कैरेक्टर है।
  • Language ID की कीमत ₹3.50 प्रति 10,000 कैरेक्टर है।
  • TTS Bulbul V3 Beta ₹30 प्रति 10,000 कैरेक्टर पर उपलब्ध है, जबकि Bulbul V2 ₹15 प्रति 10,000 कैरेक्टर।

पे-एज-यू-गो मॉडल में कोई न्यूनतम खर्च अनिवार्य नहीं है और शुरुआती 2026 तक दरें स्थिर रखी गई हैं।

सब्सक्रिप्शन टियर

Sarvam AI ने प्रीपेड प्लान भी पेश किए हैं, जिनमें बोनस क्रेडिट, ज्यादा रेट लिमिट (RPM) और सपोर्ट शामिल है।

  • Starter प्लान पे-एज-यू-गो आधारित है, इसमें कोई न्यूनतम सीमा नहीं है और 60 RPM के साथ कम्युनिटी सपोर्ट मिलता है। यह टेस्टिंग के लिए उपयुक्त है।
  • Pro प्लान ₹10,000 प्रीपेड पर उपलब्ध है, जिसमें ₹1,000 बोनस जोड़कर कुल 11,000 क्रेडिट मिलते हैं। इसमें 200 RPM और ईमेल सपोर्ट मिलता है, जो स्टार्टअप्स और POC प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी है।
  • Business प्लान, जो सबसे लोकप्रिय बताया गया है, ₹50,000 प्रीपेड पर मिलता है। इसमें ₹7,500 बोनस के साथ कुल 57,500 क्रेडिट, 1,000 RPM, Slack सपोर्ट और एक समर्पित इंजीनियर की सहायता मिलती है।

यह पूरी संरचना Sarvam AI को ग्लोबल API प्लेटफॉर्म के मुकाबले लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी बनाती है, खासकर भारतीय भाषाओं और स्पीच सेवाओं के संदर्भ में।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Sarvam AI?

भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। सरकारी योजनाएं, शिक्षा प्लेटफॉर्म, बैंकिंग सेवाएं और हेल्थ सेक्टर में AI का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे में अगर AI सिस्टम भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को ठीक से नहीं समझेंगे, तो उनकी उपयोगिता सीमित रह जाएगी। Sarvam AI इस खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहा है। यह केवल टेक्नोलॉजी नहीं बना रहा है, बल्कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम के लिए आधार तैयार कर रहा है।

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ChatGPT Go फ्री ऑफर: कैसे पाएं 1 साल तक मुफ्त एक्सेस, जानें इसके फीचर्स और फायदे https://www.91mobiles.com/hindi/chatgpt-go-1-year-free-offer-benefits-features-and-how-to-claim/ https://www.91mobiles.com/hindi/chatgpt-go-1-year-free-offer-benefits-features-and-how-to-claim/#respond Tue, 04 Nov 2025 10:58:59 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=185146 ओपन एआई (OpenAI) के ChatGPT इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अच्छी खबर है। कंपनी भारतीय यूजर्स के लिए एक खास ऑफर लेकर आई है, जिसके तहत ChatGPT Go प्लान को एक साल के लिए बिल्कुल मुफ्त कर दिया गया है। आमतौर पर इस प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति माह या करीब 4,788 रुपये […]

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ओपन एआई (OpenAI) के ChatGPT इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए अच्छी खबर है। कंपनी भारतीय यूजर्स के लिए एक खास ऑफर लेकर आई है, जिसके तहत ChatGPT Go प्लान को एक साल के लिए बिल्कुल मुफ्त कर दिया गया है। आमतौर पर इस प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति माह या करीब 4,788 रुपये प्रति वर्ष होती है, लेकिन कंपनी ने इसे एक साल मुफ्त कर दिया है यानी अब आप ChatGPT Go का इस्तेमाल बिना किसी भुगतान किए 12 महीनों तक कर सकते हैं। यह ऑफर नए और पुराने दोनों यूजर्स के लिए है। इस कदम का मकसद दुनियाभर में ChatGPT के यूजर्स को बढ़ाना और लोगों को GPT-5 मॉडल की एडवांस्ड एआई क्षमताओं तक एक्सेस देना है।

ChatGPT Go क्या है?

ChatGPT Go OpenAI का मिड-टियर सब्सक्रिप्शन प्लान है, जो फ्री वर्जन और ChatGPT Plus के बीच आता है। यह GPT-5 मॉडल से लैस है, जिसमें आपको बेहतर रिस्पॉन्स क्वालिटी, ज्यादा मैसेज लिमिट, फाइल एनालिसिस, इमेज जनरेशन और एडवांस्ड डाटा टूल्स की सुविधा मिलती है। इसे खासकर स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स, राइटर्स और क्रिएटिव यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो एआई की मदद से अपना काम और आसान बनाना चाहते हैं।

ChatGPT Go का फ्री एक्सेस कैसे पाएं

ChatGPT Go को फ्री में एक्सेस करना आसान है। इसके लिए आपको नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगाः

  • स्टेप-1: सबसे पहले अपने ब्राउजर में https://chat.openai.com को ओपन करें या फिर अपने मोबाइल पर ChatGPT ऐप को डाउनलोड और ओपन करें।
  • स्टेप-2: अगर आपके पास पहले से ChatGPT अकाउंट है, तो लॉगइन करें, नहीं तो नया अकाउंट बनाएं। आप Google अकाउंट या ईमेल से भी साइनअप कर सकते हैं और यह आसान रहता है।
  • स्टेप-3: अब होम स्क्रीन पर Upgrade For Free या Upgrade to Go का ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करना है या फिर बायीं तरफ नीचे कॉर्नर में प्रोफाइल फोटो के साथ अपग्रेड का ऑप्शन दिखाई देगा उस पर क्लिक करें।

ChatGPT Go

  • स्टेप-4: यहां अब आपको ChatGPT Go का विकल्प दिखेगा। कीमत ₹0/महीना (₹399/महीना काटा हुआ दिखेगा) लिखी होगी। इस पर क्लिक करें।

ChatGPT Go

  • स्टेप-5: अब आपसे कोई एक पेमेंट मेथड (क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या UPI) जोड़ने को कहा जाएगा। ध्यान रहे कि कोई चार्ज नहीं लगेगा। यह सिर्फ वेरिफिकेशन के लिए है।

ChatGPT Go

  • स्टेप-6: सारी डिटेल्स की पुष्टि करने के बाद subscribe पर क्लिक करें। आपका ChatGPT Go फ्री प्लान तुरंत एक्टिवेट हो जाएगा।
  • स्टेप-7: एक साल पूरा होने से पहले आप Manage Subscription में जाकर ऑटो-रिन्युअल को बंद कर सकते हैं ताकि भविष्य में कोई चार्ज न लगे।

ChatGPT Go के फीचर्स

इस प्लान में यूजर्स को कई प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं, जो फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। ChatGPT Go में आप ज्यादा मैसेज भेज सकते हैं, साथ ही यह GPT-5 मॉडल पर आधारित है, जो ज्यादा सटीक और फैक्ट्स-आधारित जवाब देता है। इसके अलावा, इसमें फाइल अपलोड और एनालिसिस की सुविधा है, जिससे आप किसी डॉक्युमेंट, रिपोर्ट या डाटा को एआई की मदद से समझ और समरी तैयार कर सकते हैं। इसमें आपको इमेज जनरेशन फीचर भी मिलता है, जिसकी मदद से आप टेक्स्ट से विजुअल कंटेंट बना सकते हैं। साथ ही, इसमें मेमोरी फीचर भी है जो आपकी पिछली चैट को याद रखता है, जिससे चैट ज्यादा नेचुरल और पर्सनल लगती है।

क्या हैं ChatGPT Go की सीमाएं 

हालांकि यह प्लान पावरफुल है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। इसमें API एक्सेस नहीं दिया गया है यानी डेवलपर्स जो ChatGPT को अपनी ऐप्स में इंटीग्रेट करना चाहते हैं, उन्हें अलग से पेड प्लान लेना होगा। इसके अलावा, वीडियो जनरेशन (Sora) और थर्ड-पार्टी कनेक्टर्स जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल नहीं हैं। OpenAI की फेयर यूज पॉलिसी के तहत ज्यादा उपयोग करने पर चैट स्लो हो सकती है या सर्वर ओवरलोड के समय पर लिमिट लग सकती है।

क्यों फायदेमंद है यह ऑफर

यह ऑफर खासकर भारत जैसे देशों के लिए बेहद उपयोगी है, जहां एआई सब्सक्रिप्शन सर्विसेज अभी भी नई हैं। स्टूडेंट्स के लिए यह पढ़ाई, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट्स में मदद कर सकता है। वहीं प्रोफेशनल्स इसे कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, डाटा एनालिसिस या ईमेल ड्राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस फ्री एक्सेस से यूजर्स बिना कोई खर्च किए ChatGPT के एडवांस्ड फीचर्स का अनुभव ले सकते हैं। इसके साथ-साथ यह ऑफर डिजिटल गैप को कम करने में मदद करेगा और अधिक लोगों को एआई तकनीक से जोड़ने का अवसर देगा। OpenAI का यह कदम न केवल यूजर्स के लिए लाभदायक है, बल्कि एआई टेक्नोलॉजी के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

अगर आप ChatGPT का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों के लिए करते हैं या एआई की क्षमताओं को गहराई से एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो ChatGPT Go का यह एक साल का फ्री ऑफर आपके लिए एक शानदार मौका है। इससे आप बिना किसी खर्च के GPT-5 मॉडल के फीचर्स जैसे कि फाइल एनालिसिस, इमेज जनरेशन और पर्सनलाइज्ड मेमोरी का लाभ उठा सकते हैं। यह ऑफर न सिर्फ आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि आपको यह भी समझने का मौका देगा कि एआई आपके डिजिटल अनुभव को कैसे बेहतर बना सकता है। इसलिए अगर आपने अभी तक इसे क्लेम नहीं किया है, तो ChatGPT की वेबसाइट पर जाएं और आज ही फ्री सब्सक्रिप्शन एक्टिवेट करें, क्योंकि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलेगा।

सवाल- जवाब (FAQs)

क्या ChatGPT Go इंडिया में फ्री उपलब्ध है?

हां, फिलहाल यह प्लान इंडिया में एक साल के लिए फ्री में उपलब्ध है। इसके बाद सामान्य शुल्क लागू होगा।

क्या ChatGPT Go फ्री ऑफर के लिए पेमेंट मेथड जोड़ना जरूरी है?

हां, अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए एक पेमेंट मेथड जोड़ना जरूरी है, लेकिन एक साल तक कोई शुल्क नहीं लगेगा। आप चाहें तो बाद में पेमेंट ऑटो-रिन्युअल को बंद कर सकते हैं।

क्या ChatGPT Go में वीडियो जनरेशन या Sora फीचर मिलता है?

नहीं, Sora वीडियो जनरेशन और कुछ अन्य प्रीमियम फीचर्स अभी ChatGPT Plus या Team प्लान में उपलब्ध हैं।

ChatGPT Go प्लान में कौन-कौन से फीचर्स शामिल हैं?

GPT-5 मॉडल एक्सेस, इमेज जनरेशन, फाइल अपलोड और एनालिसिस, ज्यादा मैसेज लिमिट और पर्सनलाइज्ड मेमोरी जैसे फीचर्स शामिल हैं।

क्या यह प्लान कॉमर्शियल यूज के लिए किया जा सकता है?

नहीं, यह व्यक्तिगत उपयोग के लिए है। व्यापारिक उपयोग के लिए ChatGPT Team या Enterprise प्लान लेना चाहिए।

क्या ChatGPT Go प्लान फोन और लैपटॉप दोनों पर काम करता है?

हां, यह वेब, Android और iOS सभी प्लेटफॉर्म पर सपोर्ट करता है, बस एक ही अकाउंट से लॉगइन करें।

क्या पुराने यूजर्स भी इस फ्री ऑफर का फायदा ले सकते हैं?

हां, यह ऑफर नए और पुराने दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध है, बशर्ते ऊपर दिए गए स्टेप को फॉलो करके इसे एक्टिवेट किया जाए।

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1.86 लाख का सैमसंग मोबाइल मंगाया था ऑनलाइन, बॉक्स के अंदर निकली टाइल! प्रेमानंद के साथ हुआ फ्रॉड, देखें वीडियो https://www.91mobiles.com/hindi/bengaluru-engineer-ordered-1-86-lakh-phone-but-received-tile-in-delivery-box/ https://www.91mobiles.com/hindi/bengaluru-engineer-ordered-1-86-lakh-phone-but-received-tile-in-delivery-box/#respond Fri, 31 Oct 2025 07:54:02 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=184984 फोन के बॉक्स में डिवाइस की जगह टाइल पत्थर मिला।

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1.86 लाख का मोबाइल खरीदें और बॉक्स में फोन की जगह पत्थर निकल आए! सुनने में भी भयंकर लग रहा है ना? हम तो यही चाहेंगे कि 91मोबाइल्स के किसी भी पाठक के साथ ऐसा ना हो। लेकिन बेंगलुरु का एक इंजीनियर ऐसे ही स्कैम का शिकार हो गया है। 43 वर्षीय शख्स प्रेमानंद ने शॉपिंग साइट Amazon से ऑनलाइन Sansung Galaxy Z Fold 7 मंगवाया था। लेकिन फोन के बॉक्स में डिवाइस की जगह टाइल पत्थर मिला। यह पूरा वाकया आप आगे दी गई वीडियो में देख सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु के येलचनाहल्ली इलाके में रहने वाले Premanand नाम के शख्स ने अपने लिए सैमसंग गैलेक्सी ज़ेड फोल्ड 7 खरीदा था। यह 43 वर्षीय व्यक्ति पेशे से इंजीनियर है जिसने फोन को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन से ऑर्डर किया था। इस फोन की कीमत 1,86,000 रुपये बताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमानंद ने Galaxy Z Fold 7 स्मार्टफोन 14 अक्टूबर को ऑर्डर किया था। फोन खरीदने के लिए इस शख्स से अपने क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट कर दी थी। पूरी पेमेंट होने के बाद ऑर्डर कंफर्मेशन का मैसेज आ गया और साथ ही अमेजन द्वारा ऑर्डर ट्रैकिंग की डिटेल्स भी प्रेमानंद के साथ शेयर कर दी गई थी।

ऑर्डर प्लेस्ड होने के बाद 19 अक्टूबर को अमेजन द्वारा सामान की डिलीवरी कर दी गई। फोन मिलने की खुशी चरम पर थी। प्रेमानंद ने फोन अनबाक्सिंग वीडियो बनाने की सोची और फोन बॉक्स खोलते वक्त वीडियो रिकॉर्ड करने लगा। बॉक्स पूरी तरह से सील पैक था और उसपर हर तरह की टेप व टैग लगे हुए थे।

लेकिन जैसे ही प्रेमानंद ने फोन बॉक्स खोला तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। मोबाइल के बॉक्स में फोन था ही नहीं! डिब्बे में Galaxy Z Fold 7 जगह एक पत्थर वाली टाइल पड़ी हुई थी। 1.86 लाख रुपये का फोन मंगाया था लेकिन बॉक्स में पत्थर का टुकड़ा निकला। यह ऑनलाइन फ्रॉड प्रेमानंद को लाखों की चपत लगा गया।

गनिमत रही कि प्रेमानंद फोन अनबाक्सिंग की ​वीडियो बना रहा था। और यही वीडियो इस शख्स के लिए ​सबूत का काम कर गई। ठगी का शिकार हुए इंजीनियर ने सबसे पहले NCRP यानी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और फिर स्थानिय पुलिस स्टेशन में भी कंप्लेंट लिखाई।

खबर के मुताबिक पुलिस द्वारा BNS Section 318(4) (cheating), 319 (cheating by personation) और आईटी एक्ट के तहत Section 66D (cheating by personation by using computer resource) लगाते हुए एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मामले की तहकीकात जारी है।

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ChatGPT Atlas ब्राउजर का उपयोग कैसे करें, जानें डाउनलोड के तरीके और टॉप फीचर्स https://www.91mobiles.com/hindi/how-to-use-chatgpt-atlas-browser-download-features/ https://www.91mobiles.com/hindi/how-to-use-chatgpt-atlas-browser-download-features/#respond Wed, 22 Oct 2025 07:57:57 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=184656 OpenAI ने अपना नया चैटजीपीटी एटलस (ChatGPT Atlas) ब्राउजर लॉन्च किया है, जो इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला है। यह कोई आम ब्राउजर नहीं है, बल्कि एक ऐसा AI-पावर्ड स्मार्ट ब्राउजर है, जिसमें हर वक्त ChatGPT आपकी मदद के लिए मौजूद रहेगा। मतलब अब आपको अलग से इसे ओपन की […]

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OpenAI ने अपना नया चैटजीपीटी एटलस (ChatGPT Atlas) ब्राउजर लॉन्च किया है, जो इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला है। यह कोई आम ब्राउजर नहीं है, बल्कि एक ऐसा AI-पावर्ड स्मार्ट ब्राउजर है, जिसमें हर वक्त ChatGPT आपकी मदद के लिए मौजूद रहेगा। मतलब अब आपको अलग से इसे ओपन की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि Atlas में ही आप चैट कर सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं या फिर कुछ लिखवा सकते हैं। इसमें ChatGPT को सीधे ब्राउजर में जोड़ा गया है ताकि आप सर्च, राइटिंग, शॉपिंग, ईमेल या डॉक्यूमेंट एडिटिंग जैसे काम एक ही जगह कर सकें। OpenAI का यह कदम इंटरनेट ब्राउजिंग को और ज्यादा स्मार्ट और पर्सनल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। फिलहाल ChatGPT Atlas केवल macOS यूजर्स के लिए उपलब्ध है और इसे मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। आइए जानते हैं ChatGPT Atlas ब्राउजर का उपयोग कैसे कर सकते हैं?

ChatGPT Atlas क्या है?

ChatGPT Atlas

ChatGPT Atlas एक AI से चलने वाला वेब ब्राउजर है, जो Chrome, Safari, फायरफॉक्स,ऐज जैसे सामान्य ब्राउजर्स से अलग है। यह ब्राउजर ChatGPT की ताकत को सीधे ब्राउजिंग में जोड़ता है, जिससे सर्च करना, जानकारी ढूंढना, लिखना और काम मैनेज करना आसान हो जाता है। Atlas का मकसद इंटरनेट को एक ऐसे वर्कप्लेस में बदलना है, जहां आपका AI असिस्टेंट आपके काम को समझता है, आपकी जरूरतों को याद रखता है और आपके लिए काम को आसान बनाता है। यह सिर्फ वेबसाइट्स दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कंटेंट को समझने और उस पर काम करने में भी मदद करता है।

Atlas ब्राउजर का इस्तेमाल कौन कर सकता है?

फिलहाल चैटजीपीटी एटलस सिर्फ Mac यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इस ब्राउजर को फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है यानी कोई भी Mac यूजर इसे आजमा सकता है, लेकिन इसका खास फीचर जैसे कि Agent Mode केवल ChatGPT के पेड प्लांस (Pro, Plus और Enterprise) वाले यूजर्स को ही मिलेगा। Agent Mode आपके लिए मुश्किल काम, जैसे-बुकिंग या जानकारी ढूंढना अपने आप करता है। OpenAI ने कहा है कि वे जल्द ही Atlas ब्राउजर को iOS, Android और Windows पर लाएंगे, लेकिन अभी इसके लिए किसी तारीख की घोषणा नहीं की गई है।

ChatGPT Atlas को मुफ्त में कैसे डाउनलोड और उपयोग करें?

एटलस ब्राउजर का उपयोग शुरू करना बहुत आसान है। इसके लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

  • स्टेप-1: अपना पसंदीदा ब्राउजर ओपन करें, फिर एड्रेस बार में chatgpt.com/atlas टाइप करें और Enter बटन दबाएं।

ChatGPT Atlas

  • स्टेप-2: अब जो पेज ओपन होगा, उसमें Download for macOS बटन दबाकर इंस्टॉलर डाउनलोड करें।
  • स्टेप-3: चूंकि आप ऐप को OpenAI की वेबसाइट से डाउनलोड कर रहे हैं, न कि Mac App Store से, इसलिए इंस्टॉलर को Applications फोल्डर में ले जाएं।
  • स्टेप-4: इसके बाद ऐप को लॉन्च करें। फिर अपने ChatGPT अकाउंट से लॉगइन करें और अगर चाहें, तो ब्राउजर से पासवर्ड और हिस्ट्री जैसे डाटा को इंपोर्ट भी कर सकते हैं।
  • स्टेप-5: ChatGPT Atlas अब आपसे पूछेगा कि क्या आप ब्राउजर मेमोरी ऑन करना चाहते हैं, जो AI चैटबॉट को पिछली बातचीत, देखे हुए डॉक्यूमेंट को याद रखने और पर्सनल सुझाव देने देता है।
  • स्टेप-6: अगर आप ChatGPT Atlas को अपना डिफॉल्ट ब्राउजर बनाते हैं, तो OpenAI सात दिनों के लिए फ्री लिमिट को बढ़ा देता है। Atlas को डिफॉल्ट ब्राउजर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सेटिंग्स> General> Set default को सलेक्ट कर लें। इसके बाद आपके सभी लिंक Atlas ब्राउजर में ओपन होंगे।

Atlas ब्राउजर के टॉप फीचर्स

ChatGPT Atlas कई खास और उपयोगी खूबियों के साथ आता है, जो इसे बाकी ब्राउजर्स से अलग बनाती हैं।

अब हर टैब में ChatGPT

Atlas में हर नया टैब ChatGPT के साथ बातचीत का मौका देता है। आप सवाल पूछ सकते हैं, कोई वेब लिंक डाल सकते हैं या जानकारी ढूंढ सकते हैं। इसमें सर्च, इमेज, वीडियो और न्यूज टैब्स हैं, जहां ChatGPT आपकी मदद करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप कोई न्यूज पढ़ रहे हैं, तो आप Atlas से उसका छोटा समरी मांग सकते हैं या उससे जुड़े सवाल पूछ सकते हैं, बिना ChatGPT की वेबसाइट पर जाए।

AI असिस्टेंट

Atlas आपके ओपन हुए टैब्स, वेबपेज और लॉगइन की स्थिति को समझता है (अगर आपने परमिशन दी हो)। यह आपके काम के आधार पर जवाब देता है, जो इसे सामान्य ChatGPT से भी बेहतर बनाता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं, तो Atlas आपके पसंदीदा सामान के आधार पर सुझाव दे सकता है या अगर आप जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो यह आपके ओपन हुए टैब्स के आधार पर सटीक जवाब देता है। OpenAI का कहना है कि Atlas के जवाब ज्यादा पर्सनल और सही होते हैं।

राइटिंग में हेल्प

Atlas उन लोगों के लिए अच्छा है, जो राइटिंग में ChatGPT की मदद लेते हैं। चाहे आप ईमेल लिख रहे हों, Google Docs में काम कर रहे हों, या नौकरी के लिए एप्लीकेशन लेटर बना रहे हों, Atlas का लिखने वाला फीचर आपको टेक्स्ट को और बढ़िया बनाने, टोन बदलने या फिर से लिखने में मदद करता है। आपको टेक्स्ट को कॉपी-पेस्ट करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह सीधे वेबपेज पर काम करता है, जैसे-अगर आप ईमेल का जवाब दे रहे हैं, तो Atlas उसे प्रोफेशनल या छोटा और बेहतर बना सकता है।

मेमोरी फीचर

Atlas का मेमोरी फीचर आपकी वेब एक्टिविटीज को याद रखता है। यह रियल असिस्टेंट की तरह काम करता है, जो आपके काम को ट्रैक करता है। इससे आपको टैब्स खुले रखने की जरूरत नहीं होती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने पिछले हफ्ते कुछ नौकरी की पोस्टिंग्स देखी थीं, तो Atlas उन्हें याद रखेगा और आपके कहने पर दोबारा दिखा सकता है। आप इन मेमोरी को देख, बदल या हटा सकते हैं।

भाषा में कमांड

Atlas में आप रोजमर्रा की भाषा में कमांड दे सकते हैं, जैसे- कल वाला ट्रैवल साइट फिर से ओपन करें या मेरे रेसिपी टैब्स बंद कर दो। यह फीचर आपकी ब्राउजिंग एक्सपीरियंस को आसान और तेज बनाता है। आपको बुकमार्क या टैब मैनेजर के साथ समय बर्बाद नहीं करना पड़ता है, क्योंकि Atlas आपके लिए यह सब आसानी से करता है।

Agent Mode (प्रीव्यू में)

Agent Mode Atlas का सबसे खास फीचर है, जो अभी केवल ChatGPT Plus, Pro और Business यूजर्स के लिए प्रीव्यू में है। यह फीचर ChatGPT को एक साधारण चैटबॉट से आगे ले जाता है। यह आपके लिए जानकारी ढूंढ सकता है, प्लान बना सकता है, बुकिंग कर सकता है, डॉक्यूमेंट का समरी तैयार कर सकता है या कई टैब्स के बीच काम को अपने आप संभाल सकता है, जैसे- यह आपके लिए रेस्तरां बुकिंग, किराने का सामान ऑर्डर या खरीदारी की तुलना कर सकता है।

प्राइवेसी और कंट्रोल

Atlas में आपकी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें सीक्रेट मोड, मेमोरी कंट्रोल और बच्चों के लिए सेटिंग्स जैसे विकल्प हैं। OpenAI ने कहा है कि आपकी ब्राउजिंग जानकारी का उपयोग AI को ट्रेन करने के लिए नहीं होता है। आप मेमोरी फीचर को कभी भी बंद कर सकते हैं, ताकि आपकी जानकारी पूरी तरह आपके नियंत्रण में रहे।

Atlas की उपलब्धता

ChatGPT Atlas सभी चैटजीपीटी यूजर्स के लिए Mac पर उपलब्ध है। यह OpenAI की ब्राउजर बाजार में पहली एंट्री है, लेकिन इसका Agent Mode केवल ChatGPT Plus और Pro यूजर्स के लिए है। OpenAI ने बताया है कि वे Atlas को जल्द ही Windows, iOS और Android पर लाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि यह सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हो।

ChatGPT Atlas और Perplexity Comet में क्या अंतर है

ChatGPT Atlas vs Perplexity Comet

  • ChatGPT Atlas ब्राउजर में सीधे ChatGPT को जोड़ देता है। यह सिर्फ एक छोटा बॉक्स नहीं है, बल्कि ब्राउजर का हिस्सा बन जाता है। Atlas आपके ब्राउजिंग को समझता है और मदद करता है जैसे कि टेक्स्ट का अनुवाद करना, समरी बनाना, ईमेल या डॉक्यूमेंट तैयार करने में मदद करना आदि। यह याद रखता है कि आपने कौन-सा काम किया और वहीं से फिर शुरू करता है। Atlas का उद्देश्य है कि AI आपके काम को और आसान बनाए, वह भी बिना किसी जटिल इंटरफेस या अलग स्क्रीन के।
  • वहीं Perplexity Comet सर्च पर ध्यान केंद्रित करता है। यह हर जवाब के लिए लाइव और वेरिफाइड वेब डाटा का इस्तेमाल करता है। Comet लगातार नया डाटा खींचता है और जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करता है। यूजर देख सकते हैं कि जवाब कहां से आया। इसलिए यह रिसर्च, पत्रकारिता और स्टडी जैसे कार्यों के लिए बहुत उपयोगी है।
  • Atlas और Comet के बीच फर्क उनके काम करने के तरीके में है। Atlas मुख्य रूप से प्रोडक्टिविटी और ब्राउजर में काम को आसान बनाने पर ध्यान देता है। यह सीधे टेक्स्ट एडिट करना, फॉर्म भरना और रिप्लाई ड्राफ्ट करना संभव बनाता है। वहीं Comet का ध्यान जानकारी की सटीकता और स्रोत पर है। यह ब्राउजर में काम को आसान नहीं बनाता है, लेकिन जानकारी खोजना और सत्यापित करना तेज और भरोसेमंद तरीके से करता है।
  • अगर आपका काम ईमेल, ब्लॉग या रिपोर्ट लिखना है, तो Atlas बेहतर है। यह ब्राउजर में ही एटिडिंग और समरी बनाने की सुविधा देता है। वहीं
  • अगर आप शोधकर्ता, पत्रकार या स्टूडेंट्स हैं, तो Comet बेहतर है। यह हर जानकारी का स्रोत दिखाता है और डाटा को लगातार रिफ्रेश करता है। Atlas व्यक्तिगत काम के लिए अच्छा है, जबकि Comet टीम और शोध के लिए।

कुल मिलाकर ChatGPT Atlas अनोखा ब्राउजर है, जो इंटरनेट ब्राउजिंग को पूरी तरह बदल सकता है। यह सिर्फ वेबसाइट्स दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके काम को समझता है, आपकी जरूरतों को याद रखता है और जरूरी कामों में आपकी मदद करता है। चाहे आप जानकारी ढूंढ रहे हों, खरीदारी कर रहे हों या लिखने में मदद चाहते हों, Atlas आपके एक्सपीरियंस को स्मार्ट और आसान बनाता है।

सवाल- जवाब (FAQs)

क्या Atlas मुफ्त है?

हां, Atlas ब्राउजर मुफ्त में डाउनलोड और इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके Agent Mode जैसे खास फीचर्स केवल पैसे वाले ChatGPT प्लान्स के लिए हैं।

क्या Atlas दूसरे ब्राउजर्स से बेहतर है?

Atlas का ध्यान AI से चलने वाली ब्राउजिंग पर है। यह सामान्य ब्राउजर्स की तुलना में ज्यादा व्यक्तिगत और स्मार्ट अनुभव देता है, खासकर उन लोगों के लिए जो ChatGPT इस्तेमाल करते हैं।

क्या मेरी ब्राउजिंग जानकारी सुरक्षित है?

हां, Atlas में प्राइवेसी के लिए सीक्रेट मोड और मेमोरी कंट्रोल जैसे फीचर्स हैं। आपकी जानकारी का उपयोग AI ट्रेनिंग के लिए नहीं होता है और आप मेमोरी को बंद कर सकते हैं।

Agent Mode क्या है?

Agent Mode खास फीचर है, जो आपके लिए मुश्किल काम जैसे बुकिंग, जानकारी ढूंढना या प्लानिंग को अपने आप करता है। यह अभी केवल पेड यूजर्स के लिए प्रीव्यू में है।

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वाई-फाई 7 (Wi-Fi 7) वायरलेस इंटरनेट की दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर स्पीड के मामले में। यह नया वाई-फाई स्टैंडर्ड (जिसे 802.11be EHT भी कहा जाता है) 40Gbps तक की डाटा स्पीड दे सकता है, जबकि पुराने Wi-Fi 6 स्टैंडर्ड की लिमिट लगभग 10Gbps थी। आजकल कई नए राउटर्स, मेश सिस्टम और स्मार्टफोन-पीसी जैसे डिवाइस Wi-Fi 7 सपोर्ट के साथ आने लगे हैं यानी अगर आप अपना टेक गियर अपग्रेड करना चाह रहे हैं, तो Wi-Fi 7 आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। हालांकि आम यूजर्स को रोजमर्रा की जिंदगी में इसका पूरा 40Gbps स्पीड का आनंद शायद ही मिले, क्योंकि ज्यादातर घरों के इंटरनेट प्लान अभी भी 1Gbps या उससे कम तक ही सीमित रहते हैं। फिर भी Wi-Fi 7 सिर्फ स्पीड ही नहीं, बल्कि और भी कई फायदे लेकर आता है। इस आर्टिकल में जानेंगे वाई-फाई 7 क्या है? यह अपने पुराने वर्जन से कैसे अलग है?

वाई-फाई 7 क्या है?

Wi-Fi 7 लेटेस्ट Wi-Fi स्टैंडर्ड है और सातवीं पीढ़ी है। इसका मतलब क्या है? आसान शब्दों में कहें, तो यह Wi-Fi का सातवां वर्जन है, जो डिवाइस में शामिल किया जाएगा। कोई भी डिवाइस जो इंटरनेट से जुड़ता है या इंटरनेट प्रदान करता है (जैसे राउटर), उसमें हार्डवेयर होता है, जो कनेक्टिविटी प्रदान करता है। अगर कोई डिवाइस Wi-Fi 7 सर्टिफाइड है, तो उसे कुछ खास जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं, जैसे- स्पीड से लेकर कनेक्शन की विश्वसनीयता तक। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों को एक जैसा कनेक्शन मिले।

  • वर्तमान में लेट्स्ट स्टैंडर्ड Wi-Fi 6E है। आपने इसे कुछ नए स्मार्टफोन्स की स्पेसिफिकेशन में देखा होगा। यह डिवाइस को गीगाबिट स्पीड से जोड़ता है। यह Wi-Fi 6 ((9.6 Gbps)) का अगला वर्जन है। उससे पहले Wi-Fi 5 था, जो 2014 में आया और 5GHz चैनल्स के साथ लॉन्च हुआ।
  • Wi-Fi 6 ने Wi-Fi 5 (6.9 Gbps) से सिर्फ थोड़ा तेज कनेक्शन दिया था, लेकिन Wi-Fi 7 तो पूरी तरह गेम-चेंजर है। इसके नाम में जो EHT जुड़ा है, उसका मतलब है Extremely High Throughput यानी बहुत तेज डाटा ट्रांसफर।
  • मान लीजिए आप एक लैपटॉप यूज कर रहे हैं जिसमें क्वालकॉम का नया FastConnect 7800 चिपसेट है। इसमें आपको 5.8Gbps तक की स्पीड मिल सकती है। वहीं, एक सामान्य क्वॉड-बैंड Wi-Fi 7 राउटर लगभग 33Gbps तक का टोटल थ्रूपुट दे सकता है। यह स्पीड Wi-Fi 6 और 6E से तीन गुना ज्यादा है और Wi-Fi 5 से लगभग पांच गुना तेज है।
  • इतना ही नहीं, यह नई तकनीक लेटेंसी घटाती है, नेटवर्क की क्षमता बढ़ाती है और एफिशिएंसी को बेहतर बनाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि Wi-Fi 7 पुराने डिवाइस के साथ भी काम करता है यानी अगर आपके पास Wi-Fi 5 या Wi-Fi 6 वाले डिवाइस हैं, तो भी वे Wi-Fi 7 राउटर से जुड़ जाएंगे। हालांकि असली फुल-स्पीड का फायदा उठाने के लिए डिवाइस को Wi-Fi 7 सपोर्ट करना जरूरी है।

वाई-फाई 7 की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

Wi-Fi 6 के साथ कुछ नई तकनीकें आई थीं, जैसे- OFDMA, MU-MIMO और TWT। ये तीनों Wi-Fi 7 में भी हैं, लेकिन थोड़ा और एडवांस रूप में। जानते हैं इन तकनीक के बारे में…

What Is Wi-Fi 7

  • OFDMA: यह चैनल को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटता है, जिससे कई यूजर्स को एक साथ डाटा भेजा जा सकता है। इससे देरी कम होती है और नेटवर्क का उपयोग बेहतर होता है।
  • MU-MIMO: यह राउटर को एक साथ कई डिवाइस को डाटा भेजने की सुविधा देता है, जिससे वीडियो स्ट्रीमिंग और गेमिंग में बेहतर परफॉर्मेंस मिलता है।
  • TWT: यह डिवाइस की बैटरी बचाने में मदद करता है, क्योंकि डिवाइस तब तक स्लीप में रहता है, जब तक उसे नेटवर्क की जरूरत न हो।
  • MLO: मल्टी-लिंक ऑपरेशन डिवाइस को एक साथ 2.4GHz, 5GHz और 6GHz बैंड पर डाटा भेजने और प्राप्त करने की सुविधा देता है। इससे गति बढ़ती है और नेटवर्क में रुकावट कम होती है।
  • 4K QAM: यह डाटा को और बेहतर तरीके से एनकोड करता है, जिससे वाई-फाई 6 की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा गति मिलती है।

वाई-फाई 7 किन फ्रिक्वेंसी बैंड्स पर चलता है?

Wi-Fi 7 भी Wi-Fi 6E की तरह 2.4GHz, 5GHz और 6GHz बैंड्स पर चलता है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब MU-MIMO स्ट्रीम्स 8 से बढ़कर 16 हो गई हैं यानी और ज्यादा डिवाइस एक साथ तेजी से कनेक्ट हो पाएंगे। इसके अलावा, इसमें मल्टी लिंक ऑपरेशन (MLO) नाम की तकनीक भी है। इससे डिवाइस एक साथ कई बैंड्स (जैसे 2.4GHz और 5GHz) पर डाटा भेज और रिसीव कर सकते हैं। इसका फायदा यह है कि स्पीड और तेज होगी और नेटवर्क में रुकावट भी नहीं आएगी। Wi-Fi 7 में 4K QAM का सपोर्ट भी है, जो Wi-Fi 6 के 1K QAM से कहीं ज्यादा एडवांस है। इससे नेटवर्क की एफिशिएंसी लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

वाई-फाई 7 में चौड़े चैनल क्यों जरूरी हैं?

Wi-Fi 7 की एक और बड़ी खासियत इसके 320MHz चैनल्स हैं। Wi-Fi 5 में चैनल चौड़ाई 80MHz थी, Wi-Fi 6 में यह 160MHz हो गई थी और अब Wi-Fi 7 में यह दोगुनी होकर 320MHz हो गई है। इसका मतलब है कि नेटवर्क पर एक ही समय में और ज्यादा डाटा जा सकता है। खासकर जब आपके घर या ऑफिस में बहुत सारे डिवाइस जुड़े हों, तब यह बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। साथ ही, Wi-Fi 7 में एक नई टेक्नोलॉजी पंक्चरिंग (Puncturing) भी है। अगर किसी चैनल में थोड़ी बहुत इंटरफेरेंस आ रही है, तो यह बाकी चैनल को बंद नहीं करती है, बल्कि सिर्फ उसी हिस्से को काट देती है। इससे नेटवर्क परफॉर्मेंस लगातार बनी रहती है।

क्या वाई-फाई 7 पर अपग्रेड करना चाहिए?

अगर आपके पास अभी नया फोन, लैपटॉप या स्मार्ट डिवाइस खरीदने का प्लान है, तो बेहतर होगा कि Wi-Fi 7 सपोर्ट वाला ही लें। यह डिवाइस पुराने Wi-Fi 6 या Wi-Fi 5 राउटर पर भी काम करेंगे और भविष्य में जब आप Wi-Fi 7 राउटर लेंगे, तो और तेज स्पीड का फायदा मिलेगा। अगर आपका राउटर कई साल पुराना हो चुका है और घर में स्मार्ट डिवाइस की संख्या बढ़ गई है, तो Wi-Fi 7 राउटर खरीदना समझदारी भरा फैसला होगा। हां, ध्यान रहे कि सस्ते Wi-Fi 7 राउटर्स में सभी एडवांस फीचर्स नहीं मिलेंगे, जैसे- TP-Link का किफायती Archer BE230 मॉडल MLO और 4K QAM तो सपोर्ट करता है, लेकिन इसमें 320MHz चैनल और 6GHz बैंड नहीं है। फिर भी, यह पुराने राउटर से कहीं बेहतर परफॉर्मेंस देता है।

वाई-फाई 7 Wi-Fi 6E से कैसे अलग है

Wi-Fi 7 अपने पिछले संस्करण (Wi-Fi 6E) से कुछ क्षेत्रों में बेहतर है। सबसे पहले, यह नेटवर्क से कनेक्ट होने पर चौड़े चैनल्स देता है। नया स्टैंडर्ड 320 MHz तक चौड़े चैनल्स को सपोर्ट करता है। इसका मतलब है कि कनेक्शन ज्यादा ट्रैफिक संभाल सकता है, जैसे- चौड़ी सड़क ज्यादा गाड़िया संभाल सकती है। जब नेटवर्क ज्यादा ट्रैफिक संभालता है, तो कंजेशन कम होता है यानी जब बहुत सारे लोग एक साथ Wi-Fi इस्तेमाल करेंगे, तब भी धीमापन कम दिखेगा।

Wi-Fi 7 ज्यादा डटा भेजने और प्राप्त करने की क्षमता भी रखता है। रेडियो-फ्रीक्वेंसी तरंगों (और एक खास टर्म QAM) की मदद से यह चार गुना ज्यादा तरंगों के साथ डटा को तेजी से भेज और प्राप्त कर सकता है। इससे नेटवर्क इस्तेमाल करने की स्पीड बढ़ती है, लेकिन ज्यादा तरंगों के कारण कनेक्शन की रेंज कम हो सकती है। इसके अलावा, Wi-Fi 7 अलग-अलग चैनल्स पर डिवाइस से कनेक्ट हो सकता है, जिससे चीजें और बेहतर हो जाती हैं।

संक्षेप में कहें, तो आपको तेज स्पीड, ज्यादा ट्रैफिक के लिए सपोर्ट और अधिक स्थिर कनेक्शन मिलेगा। घर पर अगर बहुत सारा ट्रैफिक हो तो आप य फायदे नोटिस करेंगे, लेकिन Wi-Fi 7 असली ताकत बड़े पैमाने पर दिखाएगा। डिवाइस एक साथ हाई क्वालिटी और ज्यादा मात्रा में वीडियो स्ट्रीम कर सकेंगे, जो VR कंटेंट के लिए बढ़िया है।

Wi-Fi 7 के फायदे

  • तेज डाटा ट्रांसफर स्पीड: Wi-Fi 7 40Gbps की वायरलेस डाटा ट्रांसफर स्पीड देता है, जो Wi-Fi 6E राउटर्स से पांच गुना तेज है। इससे हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग जैसे भारी बैंडविड्थ वाले एप्लिकेशन आसानी से चल सकते हैं।
  • दोगुने बैंडविड्थ चैनल्स: बैंडविड्थ चैनल्स को 320MHz तक दोगुना किया गया है, जिससे ज्यादा डिवाइस हाई स्पीड पर कनेक्ट हो सकते हैं। इससे भीड़भाड़ वाले माहौल में नेटवर्क कंजेशन कम होता है और दक्षता बढ़ती है।
  • कम लेटेंसी: Wi-Fi 7 लेटेंसी को न्यूनतम करता है, जिससे ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और स्ट्रीमिंग में रियल-टाइम अनुभव मिलता है।
  • बेहतर कनेक्शन : Wi-Fi 7 5GHz और 6GHz बैंड्स का एक साथ उपयोग करके डाटा भेजने और प्राप्त करने में सक्षम है, जिससे कनेक्शन अधिक विश्वसनीय बनता है।

Wi-Fi 8 कब आएगा?

आजकल इंटरनेट की स्पीड और डाटा की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि टेक इंडस्ट्री हमेशा नई-नई टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ती रहती है। इसी कड़ी में Wi-Fi 8 पर काम चल रहा है। एक IEEE (Institute of Electrical and Electronics Engineers) डॉक्यूमेंट के मुताबिक, Wi-Fi 8 को साल 2027 या 2028 तक लॉन्च किया जा सकता है। इसे टेक्निकल नाम से 802.11bn भी कहा जा रहा है। हालांकि अभी इसके बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन Wi-Fi 8 से उम्मीद है कि यह Wi-Fi 7 से और भी तेज होगा और नेटवर्क की कैपेसिटी, लेटेंसी और एफिशिएंसी को और बेहतर बनाएगा। जैसे-जैसे बैंडविड्थ बढ़ेगी, वैसे-वैसे इंटरनेट प्रोवाइडर्स और डिवाइस मेकर्स भी नई-नई सर्विसेज और फीचर्स जोड़ पाएंगे। मतलब, ज्यादा स्पीड के साथ एक साथ कई काम करने की क्षमता और बढ़ जाएगीचाहे वह AR/VR गेमिंग हो, 8K वीडियो स्ट्रीमिंग हो या स्मार्ट होम डिवाइस कनेक्टिविटी।

सवाल-जवाब (FAQs)

क्या Wi-Fi 7, Wi-Fi 6 और पुराने डिवाइसों के साथ काम करेगा?

हां, Wi-Fi 7 बैकवर्ड-कंपैटिबल है। इसका मतलब यह है कि यह Wi-Fi 6, Wi-Fi 5 और यहां तक कि Wi-Fi 4 डिवाइसों के साथ भी काम करेगा। हालांकि पूरा फायदा उठाने के लिए Wi-Fi 7 सपोर्टेड डिवाइस चाहिए।

Wi-Fi 7 की अधिकतम स्पीड क्या है?

Wi-Fi 7 सैद्धांतिक तौर पर 40Gbps तक की स्पीड प्रदान कर सकता है। लेकिन रोजमर्रा की उपयोग में यह स्पीड आपके इंटरनेट प्लान और डिवाइस की क्षमता पर निर्भर करेगी।

क्या Wi-Fi 7 से गेमिंग पर फर्क पड़ेगा?

बिल्कुल, Wi-Fi 7 में लेटेंसी बेहद कम है। इसका सीधा फायदा गेमर्स को मिलेगा। ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम्स में यह एक स्मूद और तेज अनुभव देगा।

क्या अभी Wi-Fi 7 पर स्विच करना जरूरी है?

जरूरी नहीं। अगर आपका मौजूदा Wi-Fi 6 या 6E राउटर अच्छी तरह काम कर रहा है तो आप इंतजार कर सकते हैं। लेकिन अगर आपका राउटर पुराना हो चुका है या आपको अल्ट्रा-फास्ट और फ्यूचर-प्रूफ नेटवर्क चाहिए, तो Wi-Fi 7 सही अपग्रेड साबित होगा।

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Glance की बड़ी तैयारी, 22 मई को हो सकती है AI से जुड़ी बड़ी अनाउंसमेंट https://www.91mobiles.com/hindi/glance-ai-could-unveil-on-may-22-in-india/ https://www.91mobiles.com/hindi/glance-ai-could-unveil-on-may-22-in-india/#respond Tue, 20 May 2025 13:06:15 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=174073 यह इवेंट InMobi और Glance की मेजबानी में आयोजित होगा

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भारत की डिजिटल टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा धमाका होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, Glance 22 मई को एक एक्सक्लूसिव इनवाइट-ओनली डिनर इवेंट होस्ट करने जा रही है, जहां कंपनी अब तक की अपनी सबसे महत्वाकांक्षी इनोवेशन से पर्दा उठा सकती है। यह इवेंट InMobi और Glance के फाउंडर नवीन तिवारी की मेजबानी में आयोजित होगा और इसमें देश के बड़े टेक लीडर्स और इन्वेस्टर्स को बुलाया गया है।

AI टेक्नोलॉजी पर हो सकता है फोकस

हालांकि Glance ने अभी तक इस इवेंट के एजेंडे को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इस दौरान एक AI-पावर्ड कंज्यूमर टेक प्रोडक्ट का प्रीव्यू दिखा सकती है। यह प्रोडक्ट संभवतः Google के साथ इस साल की शुरुआत में हुई साझेदारी का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत दोनों कंपनियां मिलकर AI-आधारित स्मार्ट डिस्प्ले एक्सपीरियंस विकसित कर रही हैं।

इस ईवेंट में Glance और Google Cloud की साझेदारी से विकसित ‘Glance AI’ प्लेटफ़ॉर्म का आधिकारिक लॉन्च हो सकता है, जो स्मार्टफोन लॉक स्क्रीन और टीवी एंबियंट डिस्प्ले पर जनरेटिव AI अनुभव प्रदान करेगा। इसके साथ ही AI-पावर्ड शॉपिंग फीचर, नई Glance AI ऐप और AI-इनेबल्ड टीवी डिस्प्ले को भी प्रदर्शित किया जा सकता है।

Glance और Google की AI साझेदारी

कुछ समय पहले Glance और Google Cloud ने एक अहम साझेदारी की थी जिसके तहत स्मार्टफोन लॉक स्क्रीन और टीवी डिस्प्ले के लिए जनरेटिव AI आधारित कंज्यूमर एक्सपीरियंस विकसित किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए यूजर्स को उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्सनलाइज्ड और इंटेलिजेंट कंटेंट मिलेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, Glance एक नया AI-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म ‘Glance AI’ पेश करने की तैयारी में है जो इमर्सिव डिस्कवरी एक्सपीरियंस देगा।

क्या है Glance?

Glance एक AI-संचालित लॉक स्क्रीन प्लेटफ़ॉर्म है जो वर्तमान में 450 मिलियन से ज्यादा एंड्रॉइड फोंस में एक्टिव है। भारत समेत कई देशों में इसके 300 मिलियन से अधिक यूजर्स हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म यूजर्स को कस्टमाइज्ड समाचार, एंटरटेनमेंट, गेम्स और शॉपिंग कंटेंट उपलब्ध कराता है। Glance, InMobi का हिस्सा है और Samsung, Xiaomi और Realme जैसे ब्रांड्स के स्मार्टफोन्स में पहले से इसका इस्तेमाल हो चुका है।

2028 तक 1 अरब स्क्रीन का लक्ष्य

इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए Glance और InMobi के फाउंडर नवीन तिवारी ने कहा था कि उनका लक्ष्य 2028 तक 1 अरब स्क्रीन तक पहुंचना और दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर टेक प्लेटफ़ॉर्म बनना है। वहीं Google Cloud के सीईओ थॉमस कुरियन ने भी इस सहयोग को भविष्य के डिजिटल अनुभव को रीडिफाइन करने वाला करार दिया।

प्राप्त जानकारी अनुसार इस ईवेंट में कई टॉप लीडर्स हिस्सा लेंगे जिनमें नंदन निलेकणी, भाविश अग्रवाल, निखिल कामत, हरी मेनन, आदित पलिचा, रवि वेंकटरमण, श्रीधर वेंबू, उमंग बेदी, निवृति राय और कुणाल शाह जैसे नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह इवेंट Glance की सबसे बड़ी तकनीकी छलांग का गवाह बन सकता है।

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Pakistan ने रची India पर साइबर अटैक की साजिश! सरकार ने जारी की एडवाइजरी, जरूर पढ़ें और ऐसे बचें https://www.91mobiles.com/hindi/india-pakistan-war-cyber-attack-dance-of-the-hillary-virus/ https://www.91mobiles.com/hindi/india-pakistan-war-cyber-attack-dance-of-the-hillary-virus/#respond Fri, 09 May 2025 06:33:49 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=173415 Dance of the Hillary नाम के खतरनाक वायरस को इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है।

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India Pakistan War ने नया मोड़ ले लिया है। आतंकवाद को पनाह देने वाले मुल्क पाकिस्तान का जब भारतीय सेना पर जोर नहीं चला तो अब वह इंडिया की सायबर सुरक्षा में सेंध लगाने जैसी नापाक हरकत पर उतर आया है। खबर सामने आ रही है कि पाकिस्तान अब इंटरनेट के जरिए हमारे देश में हमला करने की साजिश रच रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में कई तरह के वायरस और खतरनाक मैलवेयर भेज जा रहे हैं जो सोशल मीडिया और WhatsApp के जरिये आम आदमी में फोन में आ सकते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान अब भारत पर साइबर अटैक की तैयारी में है और इसके लिए Dance of the Hillary नाम के खतरनाक वायरस को इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है। खबरों के अनुसार यह एक खतरनाक मैलवेयर है जिसे tasksche.exe नाम की फाइल में डालकर सोशल मीडिया में शेयर किया जा रहा है। अगर कोई भी व्यक्ति इस फाइल पर क्लिक कर देगा तो यह Pakistani Virus आपके फोन या लैपटॉप में पहुंचकर देश को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

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पाकिस्तान का साइबर अटैक

डांस ऑफ द हिलेरी नाम के इस मैलवेयर वायरस को व्हाट्सऐप के साथ-साथ फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और ईमेल के जरिए भी फॉरवर्ड किया जा रहा है। इसे किसी डाक्यूमेंट, फोटो या वीडियो के साथ भी सर्कुलेट किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार tasksche.exe नाम की फाइल में यह वायरस छुपा है और सिर्फ फाइल अटैचमैंट ही नहीं बल्कि अनजान लिंक के जरिये भी इसे एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस पर भेजा जा सकता है। इस ​घटिया चाल से पाकिस्तान इंडिया में बड़े साइबर अटैक को अंजाम देने की फिराक में है।

पाकिस्तानी साइबर अटैक से ऐसे बचें?

  • सबसे पहली बात कि किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक न करें।
  • इंटरनेट से कोई भी फाइल डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांच लें।
  • फर्जी या पायरेटेड कंटेंट और ऐप्स को अपने डिवाइस में इंस्टाल न करें।
  • संदिग्ध लिंक्स और अटैचमेंट्स पर क्लिक करने से बचें।
  • .exe फॉर्मेट की किसी भी फाइल को ओपन ना करें
  • आपके पास आए फर्जी लिंक या फाइल को आगे फॉरवर्ड न करें।
  • बेवजह विदेशी या संदेहजनक वेबसाइट्स पर विजिट न करें।
  • अपनी ऐप्स व सॉफ्टवेयर के लिए मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट रखें।
  • लैपटॉप या कम्यूटर में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।

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वित्तीय सेवाओं पर अटैक कर सकता है पाकिस्तान

Bombay Stock Exchange (BSE) ने भी संभावित साइबर अटैक के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। सर्कुलर जारी करते हुए बीएसई में कहा है कि दुश्मन द्वारा रैनसमवेयर, सप्लाई सीरीज में घुसपैठ, डीडीओएस हमले, वेबसाइट को खराब करना और मैलवेयर जैसे हाई इंटेंसिटी वाले साइबर हमले किए जा सकते हैं। पाकिस्तान अपने देश की बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र के भारतीय संगठनों को विशेष रूप से लक्ष्य बना सकता है।

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Samsung Galaxy S25 सीरीज, Google Pixel 9 सीरीज में मिलेगा Gemini Live का कैमरा और स्क्रीन शेयरिंग फीचर https://www.91mobiles.com/hindi/galaxy-s25-pixel-9-get-gemini-live-camera-screen-sharing-features/ https://www.91mobiles.com/hindi/galaxy-s25-pixel-9-get-gemini-live-camera-screen-sharing-features/#respond Tue, 08 Apr 2025 08:43:36 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=171203 document.addEventListener('DOMContentLoaded', function () { let ezTocContainer = document.getElementById('ez-toc-container'); if (ezTocContainer) { ezTocContainer.parentNode.removeChild(ezTocContainer); } });

Google ने पिछले महीने Gemini Live के लिए लाइव कैमरा और स्क्रीन शेयरिंग फीचर्स की घोषणा की थी। वहीं, अब शुरुआती घोषणा के लगभग एक महीने बाद, कंपनी ने नए Gemini Live फीचर्स को Samsung Galaxy S25 सीरीज और Google Pixel 9 सीरीज के स्मार्टफोंस पर रोलआउट करना शुरू कर दिया है। Samsung Galaxy S25 […]

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Highlights

  • ये फीचर्स Samsung Galaxy S25 सीरीज और Google Pixel 9 सीरीज के यूजर्स के लिए मुफ्त में उपलब्ध होंगे।
  • यूजर्स लाइव कैमरा और स्क्रीन शेयरिंग फीचर्स को एक साथ इस्तेमाल कर पाएंगे।
  • अन्य Android यूजर्स को यह फीचर जल्द ही Gemini Advanced सब्सक्रिप्शन के तहत मिलेगा।

Google ने पिछले महीने Gemini Live के लिए लाइव कैमरा और स्क्रीन शेयरिंग फीचर्स की घोषणा की थी। वहीं, अब शुरुआती घोषणा के लगभग एक महीने बाद, कंपनी ने नए Gemini Live फीचर्स को Samsung Galaxy S25 सीरीज और Google Pixel 9 सीरीज के स्मार्टफोंस पर रोलआउट करना शुरू कर दिया है।

Samsung Galaxy S25 सीरीज, Pixel 9 सीरीज में मिलेगा कैमरा, स्क्रीन शेयरिंग फीचर

  • Gemini Live के लाइव कैमरा फीचर की मदद से यूजर्स AI को दिखा सकते हैं कि वे क्या देख रहे हैं और फिर उस पर बातचीत कर सकते हैं।
  • Samsung ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस फीचर की घोषणा करते हुए लिखा कि Galaxy S25 सीरीज स्मार्टफोंस के यूजर्स साइड बटन को दबाकर और होल्ड करके Gemini Live को दिखा सकते हैं कि वे क्या देख रहे हैं, और उसके बारे में रियल टाइम में सवाल पूछ सकते हैं।
  • उदाहरण के तौर पर, यूजर्स Gemini Live को अलग-अलग आउटफिट्स दिखा सकते हैं और किसी खास मौके के लिए एक विकल्प चुनने के लिए कह सकते हैं। वे AI को अपनी अलमारी भी दिखा सकते हैं और उसे व्यवस्थित करने में मदद ले सकते हैं।

Samsung

  • Google Pixel 9 सीरीज और Samsung Galaxy S25 सीरीज स्मार्टफोंस में Gemini Live में स्क्रीन शेयरिंग फीचर भी मिल रहा है।यह फीचर यूजर्स को इंटरनेट ब्राउज करते समय अपनी स्क्रीन शेयर करने की सुविधा देगा। जिससे वे अपने चुनावों पर फीडबैक ले सकते हैं या विभिन्न प्रोडक्ट्स की तुलना कर सकते हैं।
  • यूजर्स इन दोनों फीचर्स का एक साथ उपयोग भी कर सकते हैं ताकि उन्हें और बेहतर सुझाव मिल सकें। Google ने इस फीचर की घोषणा करते हुए एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, “आप अपने कैमरे का उपयोग करके अपनी वार्डरोब दिखा सकते हैं और Gemini से पूछ सकते हैं कि कौन-सी चीजें इसके साथ अच्छी लगेंगी।”

उपलब्धता

  • सैमसंग का कहना है कि लाइव कैमरा और स्क्रीन शेयरिंग फीचर 7 अप्रैल से सभी गैलेक्सी एस25 सीरीज के यूजर्स के लिए बिना किसी अतिरिक्त कीमत के उपलब्ध होगा।
  • गूगल ने इसे वैश्विक स्तर पर पिक्सेल 9 सीरीज के यूजर्स के लिए भी रोल आउट करना शुरू कर दिया है।

अन्य Android यूजर्स को यह फीचर कब मिलेगा?

  • Google ने घोषणा की है कि अन्य Android यूज़र्स को यह फीचर जल्द ही मिलेगा। हालांकि, यह फीचर पेड Gemini Advanced सब्सक्रिप्शन के तहत उपलब्ध होगा।
  • Gemini Advanced, Google One AI प्रीमियम प्लान का हिस्सा है, जो पर्सनल Google अकाउंट्स के लिए है। भारत में इसकी कीमत ₹1,950 प्रति माह है। इस प्लान में 2TB स्टोरेज स्पेस, Docs, Gmail और अन्य ऐप्स में Gemini एक्सेस, साथ ही Google Meet पर लंबे कॉल्स और Google Photos में Magic Eraser के अनलिमिटेड सेव जैसे कई फायदे शामिल हैं।

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