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पिछले दिनों में कश्मीर और पाक्स्तिान मुद्दे के अलावा जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है चालान के बढ़े हुए रेट। केंद्र सरकार और परिवहन विभाग की ओर से पूरे देश में चालान की राशी लगभग दस गुणा बढ़ा दी गई है। हेलमेट, सीट बेल्ट, रेड लाईट जंप और ओवर स्पीड जैसी घटनाएं जहां पहले आम मानी जाती थी और इनका जमकर उल्लंघन करते थे। वहीं अब चालान राशी बढ़ने से ऐसे लोग सकते में आ गए हैं। सिर्फ इतना ही चालान शुल्क बढ़ने से मोटरसाइकल और गाड़ी के इंश्योरेंस और पॉल्यूशन जैसे कागजात बनाने के लिए भी लोगों की लाईनें लग रही है।
चालान शुल्क बढ़ने पर लोगों की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सही और जरूर बता रहे हैं तो कुछ लोग इसके खिलाफ है। वहीं चालान कर बढ़ाने पर सरकार के बयान भी आ रहे हैं। ऐसे में आपकी गाड़ी का चालान कटा है या नहीं और यदि कटा है तो किस बात के लिए और क्यूं कटा है इस जानकारी से अपडेट रहना भी जरूरी हो गया है। लोगों की सुविधा के लिए सरकार की ओर से चालान का संपूर्ण ब्यौरा ऑनलाईन तरीके से भी दिया जा रहा है। यदि आप भी अपने चालान की डिटेल जानना चाहते हैं तो नीचे हमनें बताया है कि किस तरह चालान को ऑनलाईन चैक किया जा सकता है।
ऐसे करें Online चैक
1.
सबसे पहले सरकार की ऑनलाईन चालान वेबसाइट खोलें। इसके लिए आगे दिए लिंक पर क्लिक करें : https://echallan.parivahan.gov.in
2.
यहां Challan Details का ऑप्शन आएगा जिसमें पूछी गई डिटेल्स डालनी होगी।
3.
आपने चालान का स्टेटस जानने के लिए यहां तीन तरीकों से अकाउंट लॉग इन कर सकते हैं।
Challan Number
Vehicle Number
DL Number
4.
उपर बताई गई कोई भी डिटेल भरकर वन टाईम कैप्चा कोड डालें और Get Detail बटन दबाएं।
5.
‘गेट डिटेल’ क्लिक करते ही यदि आपके नाम का कोई चालान इश्यू नहीं हुआ है जो ‘Not Found’ की पॉप-अप विंडो खुल जाएगी।
वहीं इसके विपरीत यदि कोई चालान आपके नाम जारी हुआ है तो विभाग द्वारा आपको पूरी जानकारी दी जाएगी कि चालान किस दिन, किस जगह, कितने बजे और किस वजह से कटा है। यहां कितने रुपये का चालान कटा है वह राशि भी बताई जाएगी तथा साथ ही चालान का ऑनलाईन भुगतान करने का ऑप्शन भी दिया जाएगा।
यहां आपको बता दें कि केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार और उनकी ट्रैफिक पुलिस द्वारा भी अपना खुद का ऑनलाईन चालान पोर्टल भी बनाया गया है। आप वहां जाकर भी अपने चालान का स्टेटस जान सकते हैं।
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]]>The post दिसंबर से हर घर में होगा इंटरनेट, 2,50,000 ग्राम पंचायतों को सुपरफास्ट ब्राडबैंड से जोड़ने की योजना पर सरकार ने दिया यह बड़ा बयान first appeared on Tech News in Hindi (टेक न्यूज़).
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हर घर तक इंटरनेट की सुविधा पहॅुंचाने तथा हर भारतीय को तकनीक से जोड़ने की राह में लंबे समय से भारत का कार्यरत है। भारत के विकास की राह में देखा गया यह सपना अब जल्द ही सच होने वाला है। डिपार्टमेंट आॅफ टेलीकॉम (DoT) ने भारत सरकार के मिशन ‘भारतनेट’ को लेकर बड़ी घोषणा की है। टेलीकॉम विभाग ने कह दिया है कि साल 2018 के दिसंबर माह तक देश की 2,50,000 ग्राम पंचायते पूरी तरह से इंटनेट ब्रांडबैंड से जुड़ जाएंगी।
भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे भारतनेट प्रोग्राम को लेकर डिपार्टमेंट आॅफ टेलीकॉम में तय डैडलाईन को बदल दिया है। 2,50,000 ग्राम पंचायतों का ब्रांडबैंड कनेक्शन देने के लिए भारत सरकार ने पहले मार्च 2019 की समयसीमा तय की थी लेकिन इस अवधि का अब घटा कर दिसंबर 2018 कर दिया गया है। यानि देश के लाखों गॉंव इस साल के अंत तक इंटरनेटी से जुड़ जाएंगे। इस प्रोग्राम के तहत सरकार का लक्ष्य है कि साल 2022 तक पूरा देश इंटरनेट के जाल से ढ़का हो और हर व्यक्ति को कम से कम 50 एमबीपीएस की स्पीड मिले।

गौरतलब है कि भारतनेट प्रोग्राम के तहत भारत सरकार गॉंवों में आॅप्टीकल फाइबर बिछाई जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक 1 लाख से भी ज्यादा गॉंवों में ब्राडबैंड लाईन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार बाकी बचे ईलाकों को जल्द से जल्द कवर करने के लिए सरकार 31,000 करोड़ रुपये का फंड संबंधित विभागों को दे चुकी है जिससे 6—7 महीनों में 1.5 लाख गॉंवों में ब्राडबैंड लाईन का काम जल्द से जल्द पूरा हो सके।

आपको बता दें कि देश को गॉंवों को ब्रांडबैंड से जोड़ने का यह प्रोग्राम कोई नया नहीं है। भारतनेट नाम के साथ इस मुहिम की शुरूआत साल 2011 में हुई थी। उस वक्त इस प्रोजेक्ट को पूरा करके की अंतिम अवधि दिसंबर, 2013 को तय किया गया था लेकिन काम पूरा न हो सकता है और यह डैडलाईन बढ़ाकर सितंबर 2015 कर दी गई। इस दौरान देश की सरकारें बदली और प्रोजेक्ट को भी नए सिरें व प्लानिंग के साथ फिर से शुरू किया गया।
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पहले इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की तिथि दिसंबर 2016 रखी गई थी लेकिन कार्य पूरा न होने की वजह से इसे मार्च 2019 कर दिया गया। ऐसा पहली बार हुआ है जब इस प्रोजेक्ट की डैडलाईन में बदलाव तो किया गया है लेकिन वह अंतिम अवधि बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि घटाने के लिए हुआ है। कार्य की गति और प्रोग्रेस को देखने हुए डिपार्टमेंट आॅफ टेलीकॉम भारतनेट का डैडलाईन मार्च 2019 से घटाकर दिसंबर 2018 कर दी है।
भारतनेट प्रोजेक्ट के बारें में यदि आप और भी जानकारी चाहते हैं यहां क्लिक करें
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भारतीय स्मार्टफोन बाजार में आज चीनी कंपनियों का बोलबाला है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि चीनी सामान के बहिष्कार जैसे आंदोलनों के बावजूद शाओमी, ओपो व वीवो जैसी चीनी कंपनियों सहित अन्य विदेशी कंपनियां भारतीय स्मार्टफोन्स मार्केट के एक बड़े हिस्से पर राज कर रही है। पिछले दिनों चीनी कंपनी द्वारा मोबाईल यूजर्स की निजी जानकारी लीक किए जाने के मुद्दे पर गंभीर होते हुए अब भारत सरकार ने भी कड़ा रूख अपना लिया है। मंत्रालय की ओर से कुल 21 देसी-विदेशी कंपनियों को नोटिस भेजा है।
टाइम्स आॅफ इंडिया द्वारा प्रकाशित खबर के मुताबिक भारत सरकार के संबंधित विभाग की ओर से दुनियाभर की 21 स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को यूजर्स की निजता संबंधी डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यूजर्स की जानकारी को लीक न किए जाने से जुड़ी सभी जानकारी पुख्ता तथ्यों के साथ मंत्रालय में 28 अगस्त तक शामिल कराने के लिए कहा है।

मंत्रालय के अनुसार मोबाईल कंपनियों को भेजा गया यह नोटिस यह सुनिश्चित करने के लिए है। सरकार इस बात पर आश्वस्त होना चाहती है कि मोबाईल कंपनियों के पास मोबाईल यूजर का जमा निजी डाटा पूर्ण रूप से सुरक्षित है या नहीं। फिर बेशक वह कोई विदेशी कंपनी हो या फिर कोई घरेलू कंपनी।
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खबर के मुताबिक भारत सरकार मोबाईल कंपनियों के पास भारतीय यूजर्स की जमा निजी जानकारी के लीक होने की खबरों से चिंतित है और इस सूची में चीनी कंपनियों पर खास नज़र रखी जा रही है। सरकार की इस लिस्ट में शाओमी, वीवो, ओपो और जियोनी जैसी कंपनियों के साथ ही सैमसंग, एप्पल तथा माइक्रोमैक्स, कार्बन व लावा समेत कुल 21 मोबाइल निर्माता कंपनिया शामिल है।
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वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को भारत और चीन के बीच डोलकाम की वजह से बने कड़वे संबंधों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि सरकार को डर है कहीं चीनी कंपनी भारतीय मोबाईल उपभोक्ताओं के डाटा को लीक करने के साथ ही उनकी निजी जानकारी का कहीं गलत कार्यो में प्रयोग न कर लें। बहरहाल सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस में चीनी कंपनियों के नाम अव्वल है।
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]]>The post स्मार्टफोन की खरीद पर सरकार देगी 1,000 रुपये की सब्सिडी first appeared on Tech News in Hindi (टेक न्यूज़).
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नोटबंदी के बाद से ही भारत सरकार का प्रयास रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को कैशलैस इकॉनामी का रूप दिया जाए तथा हर व्यक्ति डिजिटल पेमेंट तथा बैंकिंग अपनाए। और इस ऐवज़ में सरकार द्वारा नई-नई योजनाऐं भी बनाई गई है। इसी कड़ी में गरीब परिवारों तथा छोटे दुकानदारों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए उन्हें स्मार्टफोन की खरीद पर सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा है।
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डिजिटल पेमेंट तथा कैशलैस ट्रांजेक्शन का बढ़ावा देने के लिए हर राज्यों की स्थिति जानने तथा योजनाओं को अमल में लाने के लिए गठित की गई मुख्मंत्रियों की समिति ने स्मार्टफोन की खरीद पर सब्सिडी देने का सुझाव सुझाया है। समिति का कहना है कि दुकानदारों को फोन की खरीद पर 1,000 रुपये का अनुदान दिया जाए तथा इसके साथ ही किसी भी बैंक से 50,000 या उससे अधिक धनराशि निकालने पर नकद लेन-देन कर भी लगाया जाए।

समिति संयोजक द्वारा प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौंपते हुए सभी सरकारी विभागों तथा इकाइयों को डिजिटल भुगतान पर दिए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट अर्थात् एमडीआर की वैल्यू कम करने या उसे पूरी तरह से खत्म करने की बात की गई है तथा इसके साथ ही किसी भी प्रकार के बड़े लेन-देन अथवा व्यापार में प्रयोग में लाई जाने वाली नगद राशि को भी सीमित करने की बात कही गई है।
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आपको बता दें कि इस समिति में आंधप्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस तथा मध्य प्रदेश सीएम शिवराज सिंह चौहान मुख्य पदों पर आसीन हैं। समिति ने केंद्र सरकार से एईपीएस अर्थात् आधार आधारित भुगतान प्रणाली को अधिकाधिक बढ़ाने तथा सूक्ष्म एटीएम और बायोमीट्रिक सेंसर इत्यादि की संख्या तथा पहुंच बढ़ाने की सिफारिशें की गई है।
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नोटबंदी के बाद भारत सरकार आॅनलाईन ट्रांजेक्शन और कैशलेस इकॉनमी के विस्तार के लिए काफी प्रयास कर रही है। सरकार को आम लोगों तक स्मार्टफोन्स पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के तहत केंद्र सरकार की ओर से लोकल हैंडसेट वेंडर्स को कम कीमत पर स्मार्टफोन पेश करने के लिए कहा गया है। सरकार का मानना है कि कैशलेस इकॉनमी का सपना तबतक साकार नहीं हो सकता जबतक ग्रामीण ईलाकों समेत हर घर में स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं होता।
इकॉनमी टाईम्स के मुताबिक नीति आयोग तथा लोकल हैंडसेट वेंडर्स ही हाल ही में हुई मीटिंग में सरकार की ओर से 2,000 रुपये तक के स्मार्टफोन बनाने की बात कही गई है। इस मीटिंग में स्वदेशी मोबाईल निर्माता कंपनियां माइक्रोमैक्स, इंटेक्स, लावा तथा कार्बन ने हिस्सा लिया तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन्स पर नीति आयोग की इस पेशकश पर अपनी राय प्रकट की।
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गौरतलब है कि इस मीटिंग से एप्पल तथा सैमसंग जैसी कंपनियां जहां नदारद रही वहीं सरकार की ओर से चीनी कंपनियों को फिलहाल इस पेशकश के दायरे से बाहर रखा गया है।

खबर के अनुसार भारत सरकार का संज्ञान है कि देश में कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की कमी है, तथा कीमत के कारण की अनेंको लोग स्मार्टफोन नहीं अपना पर रहे हैं। तथा जबतक हर व्यक्ति तक स्मार्टफोन नहीं उपलब्ध होगा तो आॅनलाईन ट्रांजेक्शन्स पूरी तरह देश की अर्थव्यवस्था में अपनी जगह नहीं बना पाऐगी।
इसलिए सरकार चाहती है कि मोबाईल निर्माता कंपनियां अपने ब्रांड के तहत ऐसे स्मार्टफोन्स का निर्माण करें जिनकी कीमत 2 हजार से कम हो तथा हर व्यक्ति ऐसे स्मार्टफोन खरीदने में समर्थ हो सके। हालांकि सरकार अभी कम कीमत के फोन निर्माण में स्वदेशी कंपनियों को कोई सब्सिडी या अन्य मदद देने में मूड में नहीं है।
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सरकार की ओर से निर्माता कंपनियों पर सस्ते फोन बनाने के लिए जोर डालने के साथ ही आॅनलाईन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए अन्य कोई समाधान भी पेश करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार भविष्य में आधार कार्ड पर आधारित कैश ट्रांजेक्शन की सुविधा हर फोन में देना चाहती है जिससे किसी भी स्थान से आॅनलाईन ट्रांजेक्शन की जा सके।
आपको बता दें कि आधार-बेस्ड ट्रांजेक्शन्स हर फोन में उपलब्ध कराने के लिए फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर, कैमरा प्रोसेसर तथा स्कैनर होना आवश्यक है तथा 2 हजार तक की कीमत पर इस सब फीचर्स से लैस स्मार्टफोन उपलब्ध कराना वाकई में मोबाईल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। ज्ञात हों कि हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी भारत में स्मार्टफोन्स की आदर्श कीमत 2 हजार रुपये तक ही आंकी थी।

अब देखना यह होगी कि सरकार की कैशलेस इकॉनमी की योजना में मोबाईल कंपनियां कितना साथ दे पाती हैं तथा कब तक देश के ग्रामीण ईलाकों में फ़ीचर फोन की जगह स्मार्टफोन ले पाते हैं।
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नोटबंदी के बाद बैंकों तथा एटीएम में लगने वाली लाईनों को कम करने के लिए सरकार की ओर से कैश-लेस ट्रांजेक्शन पर जोर दिया जा रहा है। एक ओर जहां आॅनलाईन पेमेंट तथा प्लास्टिक मनी के प्रयोग के लिए लोगों में जागरूकता फैलाई जा रही है वहीं केंद्र द्वारा तरह-तरह की योजनाएं भी बनाई गई है। इसी कड़ी में सरकार ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के समक्ष ग्रामीण ईलाकों में इंटरनेट दरों में विशेष रियायत देने की सिफारिश की है।
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कैश-लैस इकॉनमी अपनाने की तर्ज पर यह माना गया है कि ग्रामीण ईलाकों में आॅनलाईन ट्रांजेक्शन के प्रति लोगों में जागरूकता होनी जरूरी है जिससे वह बेझिझक ई-बैंकिंग अपना सके। ग्रामीण लोगों को डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ाने के लिए अब सरकार ने ट्राई को ग्रामीण इलाकों में मुफ्त लिमिटेड इंटरनेट डाटा देने का सुझाव दिया है।
सरकार की इस पहल पर ट्राई की ओर से हर महीने ग्रामीण इलाकों में 100 एमबी मुफ्त डाटा देने की बात कही गई है। ट्राई द्वारा नियमित इस योजना का खर्च यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड द्वारा वहन किया जाएगा।

इस बाबत ट्राई का कहना है कि ग्रामीण लोगों तक सरकार की कैश-लैस पहल को पहुंचाने और डिजिटल बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में सरकार की मदद से इंटरनेट डेटा की तय मात्रा मुफ्त मुहैया कराना सराहनिय व आवश्यक कदम है।
ज्ञात हो कि इसी साल फेसबुक की ओर फ्री बेसिक इनिशिएटिव और एयरटेल के प्लान जीरो को ट्राई द्वारा इस दलील के साथ रिजेक्ट कर दिया गया था कि ऐसे प्लान से इंटरनेट की मूल प्रवृति का उल्लंधन होता है।
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]]>The post जानें डिजिटल पेमेंट से कैसे पाएं 1 करोड़ का इनाम first appeared on Tech News in Hindi (टेक न्यूज़).
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भारत में कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई घोषणाएं की गई हैं। हाल में सरकार ने आॅनलाइन टिकट बुकिंग में छूट और बीमा, आॅनलाइन एलआईसी लेने पर छूट, कैशलेस माध्यम से पट्रोल लेने पर छूट की जानकारी दी थी लेकिन अब सरकार ने कैशलेस का उपयोग करने वालों को भारी-भरकम ईनाम देने की भी घोषणा की है।
केंद्र सरकार द्वारा जानकारी दी गई है कि किसी भी खरीदारी में कैशलेस सेवा का उपयोग करने पर प्रतिदिन 15 हजार लोगों को 1 हजार रुपये तक का ईनाम दिया जाएगा और मेगा पुरस्कार के तहत 1 करोड़ रुपये का इनाम दिया जा सकता है।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस पुरस्कार योजना को लकी ग्राहक योजना का नाम दिया गया है जो 25 दिसंबर से शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत 100 दिन तक हर रोज़ देशभर से 15 हजार लोग चुने जाएंगे। जिन्हें एक-एक हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा। इस बाबत नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत का कहना है कि लकी ग्राहक योजना के अंतर्गत 50 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक का लेनदेन करने वाले लोगों को शामिल किया जाएगा तथा इसके साथ ही व्यापारियों के लिए ‘डिजिधन व्यापार योजना’ शुरू कर उन्हें भी 50 हजार रुपये तक की ईनामी राशि दी जाएगी।
क्या है लकी ग्राहक योजना
इस योजना के तहत 25 दिसंबर से 14 अप्रैल 2017 तक 50 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक का लेनदेन करने वाले 15 हजार लोगों को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा हर रोज़ 1000 रुपये का इनाम दिया जाएगा।
सिर्फ इतना ही नहीं हर सप्ताह सात हजार लकी ग्राहकों को एक लाख रुपये, 10 हजार रुपये तथा पांच हजार के पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
इसके अलावा 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर एनपीसीआई द्वारा मेगा पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी जिसमें तीन विजेताओं को एक करोड़, 50 लाख और 25 लाख रुपये की ईनामी राशि दी जाएगी।
किसे मिलेगा ईनाम
इस योजना में रूपे कार्ड, यूनिफाईड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), यूएसएसडी तथा आधार समर्थित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) द्वारा ट्रांजेक्शन करने वाले ग्राहकोंं को विजेताओं की चयनित श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

किन बातों का रखें ध्यान
ईनामी राशि अपने नाम करने के लिए आपको किसी भी तरह की पेमेंट एईपीएस द्वारा करनी होगी। यह इनाम किसी निजी कंपनी द्वारा दिए गए क्रेडिट व डेबिट कार्ड के ट्रांजेक्शन्स को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। पुरस्कार राशि के लिए कोई भी ग्राहक किसी भी विक्रेता के साथ अधिकतम 3,000 रुपये तक का लेनदेन कर सकता है।
कैसे होगा लकी ग्राहकों का चयन
योजना के लिए संचालन एजेंसी राष्ट्रीय भुगतान निगम का निर्माण किया गया है। प्रतिदिन जितने वाले ग्राहकों का चयन रैंडम तरीके से सॉफ्टवेयर द्वारा किया जाएगा। कोई भी विजेता अधिकतम तीन बार ही पुरस्कार प्राप्त कर सकता है तथा पुरस्कार की राशि सीधे विजेता ग्राहक आधार कार्ड से जुड़े खाते में भेज दी जाएगी।
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