Science Advances | Tech News in Hindi (टेक न्यूज़) https://www.91mobiles.com/hindi Tue, 07 Mar 2023 08:53:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.5.3 50 हजार साल बाद आ रहा ‘हरा धूमकेतु’, भारत में भी दिखेगा, जानिए कब और कहां-कहां https://www.91mobiles.com/hindi/green-comet-in-india-coming-near-earth-after-50-thousand-year/ https://www.91mobiles.com/hindi/green-comet-in-india-coming-near-earth-after-50-thousand-year/#respond Mon, 30 Jan 2023 09:25:58 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=96988 ​पिछली बार जब यह कॉमेट धरती के पास से गुजरा था तब यहां निएंडरथल मानव (Neanderthal) रहते थे। यह धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया है।

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Highlights

  • ऐसा धूमकेतु आखिरी बार Ice Age यानी हिम युग में देखा गया था।
  • यह अनोखा Comet 30 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दिखाई देगा।
  • इस विचित्र खगोलीय घटना को नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा।
  • हरे रंग में नज़र आने वाले इस धूमकेतु का नाम C/2022 E3 रखा गया है।

हमारी धरती से कोसों दूर अंतरिक्ष में होने वाली घटनाएं अगर आपको भी दिलचस्प और रोमांचक लगती है तो आने वाली 1 फरवरी की रात आपके लिए बेहद खास होने वाली है। एक हरा धूमकेतु (Green Comet) तकरीबन 50 हजार साल बाद हमारी पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है। खगोलीय घटनाओं की लिहाज से यह पुच्छल तारा अन्य धूमकेतुओं ने अलग और अनूठा होग। एक ओर तो इसका रंग हरा दिखाई देगा वहीं दूसरी बड़ी बात कि यह कॉमेट इससे पहले Ice Age यानी हिम युग में ही धरती के इतने करीब आया था।

50 हजार साल बाद आ रहा है Green Comet

बताया जा रहा है कि यह धूमकेतु सूरज की परिक्रमा करता है तथा इसका एक चक्कर 50 हजार साल में पूरा होता है। इसी महीने की 12 तारीख को यह पुच्छल तारा सूर्य के सबसे नजदीक गया था। और अब अपनी धूरी पर घूमते हुए यह पृथ्वी के करीब से गुजरने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछली बार जब यह कॉमेट धरती के पास से गुजरा था तब यहां निएंडरथल मानव (Neanderthal) रहते थे। यह धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया है।

Green Comet in india coming near earth after 50 thousand year

नंगी आंखों से दिखेगा यह अद्भुत नजारा

30 जनवरी से लेकर 2 फरवरी तक यह धूमकेतु धरती के करीब रहेगा तथा 1 फरवरी को यह नजदीकी सबसे ज्यादा होगी। रात के समय में इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा। खगोलविदों के अनुसार यह कॉमेट धूल और बर्फ से बना है और इसका रंग हरा है। अपने दुर्लभ रंग की वजह से ही इसके चारों ओर हरे रंग की रोशनी दिखाई देगी। जब यह पृथ्वी के सबसे पास होगा तब हमारे ग्रह और इस धूमकेतु के बीच की दूरी 2.7 करोड़ किलोमीटर के करीब होगी।

Green Comet in india coming near earth after 50 thousand year

भारत में भी दिखेगा यह अद्भुत दृश्य

रिपोर्ट्स के अनुसार 30 जनवरी से लेकर 2 फरवरी तक यह Green Comet तकरीबन पूरे भारत में दिखाई देगा। वहीं ओडिशा में इसे सबसे ज्यादा स्पष्ट तरीके से देखा जा सकेगा। वैसे तो रात के समय नंगी आंखों से ही इस पुच्छल तारे को देखा व पहचाना जा सकेगा। लेकिन अगर टेलिस्कोप की मदद ली जाए तो इस अद्भुत खगोलीय घटना का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।

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अंतरिक्ष में घटेगी अनोखी घटना! चंद्रमा, पृथ्वी, मंगल और सूरज चारों होंगे सीधी लाइन में, अद्भुत होगा नज़ारा https://www.91mobiles.com/hindi/full-moon-december-2022-mars-earth-sun-moon-in-alignment-on-7-december-2022/ https://www.91mobiles.com/hindi/full-moon-december-2022-mars-earth-sun-moon-in-alignment-on-7-december-2022/#respond Tue, 06 Dec 2022 04:41:56 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=93361 7 दिसंबर को पूर्णिमा (Full Moon) है और चंद्रमा, मंगल, पृथ्वी और सूरज चारों एक सीधी लाइन में आने वाले हैं। कल Moon, Mars, Earth और Sun चारों एक सीध में आ रहे हैं जो बेहद अनूठी स्पेस एक्टिविटी (Space activity) है।

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अंतरिक्ष अनगिनत अनसुलझे रहस्यों का गढ़ है। उपर आकाश में ऐसी अनेंको गतिविधियां होती रहती है जो हमें हैरान करती रहती है। ऐसी ही एक और अनोखी खौगोलिय घटना कल यानी 7 दिसंबर 2022 को होने जा रही है। 7 दिसंबर को पूर्णिमा (Full Moon) है और इस रात चंद्रमा, मंगल, पृथ्वी और सूरज चारों एक सीधी लाइन में आने वाले हैं। कल Moon, Mars, Earth और Sun चारों एक सीध में आ रहे हैं जो बेहद अनूठी स्पेस एक्टिविटी (Space activity) है।

7 दिसंबर को चंद्रमा, मंगलग्रह, पृथ्वी और सूरज चारों एक सीधी लाइन में होंगे और इस विचित्र नजारे को नंगी आंखों से देखा जा सकेगा। यह पूर्णिमा की रात बेहद अलग साबित होने वाली है। हमारी धरती के पीछे सूर्य होगा, हमारे सामने चांद और उस चांद के पीछे मंगल ग्रह! ये चारों एक सीधी रेखा में होने वाले हैं। यह ​अज़ब-गज़ब घटना कई सालों बाद खुद को दोहराने जा रही है और हम लोग इसका साक्षी बन सकते हैं।

रोचक होगा नज़ारा जब तारा, ग्रह और उपग्रह सभी होंगे एक सीध में

ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब कोई तारा, ग्रह और उपग्रह यानी अंतरिक्ष में मौजूद तीन अलग तरह के ऑब्जेक्ट एक सीधी लाईन में आएंगे। सूरज जहां एक तारा है, वहीं पृथ्वी व मंगल एक ग्रह हैं। चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाने वाला एक उपग्रह है। इन चारों के एक सीध में आने पर आकाश में बेहद अलग और खूबसूरत रोशनियों को फैलाव देखने को मिलेगा। मंगल ग्रह घूमते-घूमते चांद के पीछे जा छिपेगा और पूर्णिमा होने के चलते चांद और मंगल का यह मिलन साफ देखा जा सकेगा।

full moon december 2022 mars earth sun moon in alignment on 7 december 2022

इंडिया में दिखेगा रंगीन मंगल ग्रह

गौरतलब है कि जब यह अद्भुत नज़ारा घट रहा होगा उस वक्त भारत में सुबह हो चुकी होगी। यानी इंडिया में 8 तारीख शुरू हो चुकी होगी। अमेरिका के लोग इस अनूठे नज़ारे को देख पाएंगे जो वहां के समयानुसार रात 11 बजकर 8 मिनट पर होगा। भारत में भी मंगल ग्रह और चंद्रमा को एक दूसरे के बेहद पास देखा जा सकेगा। यहां मजे की बात यह भी है कि सुबह हो जाने के चलते मंगल ग्रह पर सूरज की रोशनी पड़ेगी तो यह चमकदार नारंगी-पीले रंग का नज़र आएगा।

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Corona के बाद सामने आया Zombie Virus! 48000 साल से दबा था बर्फ के नीचे, क्या यही है अंत की शुरूआत? https://www.91mobiles.com/hindi/zombie-virus-siberian-permafrost-revived/ https://www.91mobiles.com/hindi/zombie-virus-siberian-permafrost-revived/#respond Wed, 30 Nov 2022 07:59:47 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=93073 यूरोप के वैज्ञानिकों को रूस के साइबेरिया इलाके के पर्माफ्रॉस्ट से कुछ सैंपल मिले हैं जिन्हें Zombie Virus Siberian Permafrost कहा गया है।

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Zombie Virus: Corona Virus ने तकरीबन दो साल तक पूरी दुनिया को अपने घरों में बंद रहने के लिए मजबूर कर दिया था। COVID 19 की त्रासदी को लोग भुला नहीं पाएं हैं जिसने लाखों लोगों की जान ले ली। लेकिन अब इससे भी बड़ा खतरा मानवजाति पर मंडरा रहा है। खबर आ रही है कि 48 हजार साल से ग्लेशियर में दबा पड़ा बेहद ही खतरनाक Zombie Virus फिर से सतह पर आ गया है। यह जॉम्बी वायरस इंसानियत के लिए बेहद भयानक है जो अपनी पृथ्वी के अंत का कारण भी बन सकता है।

Zombie Virus

जॉम्बी वायरस हजारों साल बर्फ में दबे रहने के बाद फिर से बाहर निकल आया है। यूरोप के वैज्ञानिकों को रूस के साइबेरिया इलाके के पर्माफ्रॉस्ट से कुछ सैंपल मिले हैं जिन्हें Zombie Virus Siberian Permafrost कहा गया है। साइंटिस्ट ने इन पर्माफ्रॉस्ट का परीक्षण करने के लिए इन्हें पुनर्जीवित कर दिया है। वैज्ञानिकों ने इन्हें ‘जाम्बी वायरस’ का नाम दिया है। न्यूयार्क पोस्ट के मुताबिक जमी हुई बर्फ में कई हजार साल तक रहने के बावजूद ये वायरस संक्रामक बने रहे हैं और अब इन्हें फिर से जीवित करने के बाद एक और महामारी का खतरा भी जाग चुका है।

zombie virus siberian permafrost revived

48,500 साल बाद जागा खतरनाक वायरस

वैज्ञानिकों द्वारा ढूंढे गए ये जॉम्बी वायरस 48 हजार साल से भी ज्यादा समय से ग्लेशियर्स में दबे हुए थे। इनकी सबसे खतरनाक बात यही है ये वायरस अभी भी मरे नहीं हैं बल्कि सो रहेे हैं। माइनस डिग्री तापमान ने इन्हें पूरी तरह से मरने नहीं दिया तथा अब साइंटिस्ट द्वारा अध्ययन किए जाने के बाद सामने आ रहा है कि ये वायरस सतह पर आने के बाद इंसान, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सभी को अपना टारगेट बना सकते हैं और यह स्थिति बेहद विनाशकारी साबित हो सकती है।

zombie virus siberian permafrost revived

ग्लेशियर पिघलने से बढ़ेगा खतरा

प्रीप्रिंट रिपॉजिटरी बायोरेक्सिव के आर्टिकल अनुसार लाखों सालों से जमे ग्लेशियर्स में कई तरह के प्राचीव जीव व वायरस मौजूद है। जैसे-जैसे गोलार्थ की बर्फ पिघलेगी, ये वायरस व जीव उपर सतह पर आ जाएंगे। सूरज, धूप और हवा के सपंर्क में आने के बाद हो सकता है कि ये वायरस फिर से एक्टिव हो जाएं और तेजी से अपना प्रजन्न करने लगे। ऐसी स्थिति में ये प्राचीन जीव व वायरस धरती के कोने-कोने तक पहुंच जाएंगे जो खुद को जिंदा रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

zombie virus siberian permafrost revived

पूरी मानवजाति नष्ट कर सकते हैं वायरस

पर्माफ्रॉस्ट को ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से फायदा पहुंच रहा है। जमी बर्फ से बाहर आने के बाद कोई वायरस या जीव अपने फैलाव में कितना समय लेगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन अगर इनका इन्फेक्शन धरती के पर्यावरण में फलने-फूलने लगा तो इन्हें कैसे रोका जाएगा ​तथा अगर कोई इंसान या पशु-पक्षी इनसे संक्रमित होता है तो उन्हें ठीक कैसे किया जाएगा। इस सब बातों का हमारे पास अभी कोई भी जवाब नहीं है।

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ISRO की नई उड़ान, सबसे भारी रॉकेट के लिए बना डाला देसी क्रायोजेनिक इंजन! दुनिया हुई हैरान https://www.91mobiles.com/hindi/isro-ce20-cryogenic-engine-for-lvm3-launch/ https://www.91mobiles.com/hindi/isro-ce20-cryogenic-engine-for-lvm3-launch/#respond Fri, 11 Nov 2022 06:17:33 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=91882 इसरो ने Made in India CE20 cryogenic engine का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

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ISRO यानी Indian Space Research Organisation एक के बाद एक ऐसा कारनामा करती जा रही है जो सभी भारतवासियों का सिर गर्व ऊँचा करता है। कुछ ही दिनों पहले भारतीय स्‍पेस एजेंसी इसरो ने 36 सैटेलाइट्स (Satellite) के साथ LVM3-M2 लॉन्च किया था जो इसरो का सबसे भारी रॉकेट (ISRO’s heaviest rocket) था। वहीं अब इसरो ने देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 (लॉन्च वीकल मार्क 3) के लिए Made in India CE20 cryogenic engine (क्रायोजेनिक इंजन) का भी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

इसरो ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल के जरिये जानकारी देते हुए कहा है कि देश की स्पेस एजेंसी ने नए क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो पूरी तरह से स्वदेशी है यानी मेड इन इंडिया है। इस इंजन के दमपर अब इसरो अपना सबसे भारी रॉकेट भी बिना किसी समस्या के अंतरिक्ष में दूर तक भेज सकती है। यह इंजन खासतौर पर लॉन्च वीकल मार्क 3 यानी एलएमपी-3 को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है जो अभी तक देश का सबसे पावरफुल रॉकेट है।

इसरो की सफलता

भारतीय स्पेस एजेंसी द्वारा 21.8 टन अपरेटेड थ्रस्ट स्तर पर की गई टेस्टिंग पूरी तरह से सफल साबित हुई है। ISRO का कहना है कि इस इंजन की टेस्टिंग सफल होने के बाद अब LVM-3 की पेलोड क्षमता 450 किलोग्राम तक बढ़ गई है। गौरतलब है कि OneWeb Satellites के साथ ही आने वाले साल में चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष यान गगनयान (Gaganyaan) के लिए ‘एबॉर्ट मिशन’ की टेस्‍ट फ्लाइट में भी काफी मदद मिलने वाली है।

ISRO heaviest rocket LVM3 M2 launched with 36 satellites

ISRO OneWeb मिशन

इसरो ने हाल ही में एक साथ 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि भी हासिल कर ली है। ISRO द्वारा लॉन्च LVM3 रॉकेट में वनवेब लियो (OneWeb Leo) ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह एक व्यावसायिक मिशन था जिसमें यूके बेस्ड निजी कंपनी की सैटेलाइट्स को रॉकेट में भेजा गया था। ये सभी 36 सैटेलाइट्स OneWeb India-1 mission के तहत अंतरिक्ष में भेजी गई है तथा कुछ महीनों बाद फिर से अन्य 36 OneWeb satellites भी इसी तरह लॉन्च की जाएंगी।

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चंद्र ग्रहण 2022: इस शहर में सबसे पहले दिखेगा चंद्र ग्रहण, जानें टाइमिंग https://www.91mobiles.com/hindi/chandra-grahan-2022-in-india-date-and-time/ https://www.91mobiles.com/hindi/chandra-grahan-2022-in-india-date-and-time/#respond Tue, 08 Nov 2022 04:10:03 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=91412 आपको बता दें कि कुछ जगह में पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, वहीं कहीं पर आंशिक चंद्र ग्रहण ( Partial Lunar Eclipse) होगा।

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सूर्य ग्रहण के बाद अब साल का आखिरी चंद्र ग्रहण (lunar eclipse) भारत और दुनिया के कुछ हिस्सों में लगने वाला है। आपको बता दें कि साल का अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 यानी आज होगा और अगला 14 मार्च 2025 को लगेगा। यानी पूरे तीन साल बाद lunar eclipse दिखाई देगा। अगर आपको भी ग्रहण के समय की जानकारी नहीं है तो हम हम आपको इस आर्टिकल में Chandra Grahan 2022 Date और Time की जानकारी देने वाले हैं। साथ ही आपको यह बताएंगे कि भारत समेत lunar eclipse 2022 भारत में सबसे पहले किस शहर में देखा जा सकेगा।

भारत में इस समय लगेगा चंद्र ग्रहण

भारत में चंद्रग्रहण 8 नवंबर को लगेगा और इस दिन कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima 2022) और गुरु नानक देव जी की जयंती (Guru Nanak Dev Birthday) भी है। वैसे तो Partial lunar eclipse की शुरुआत 2.39 pm पर शुरू होगा। लेकिन, देश में चंद्रग्रहण की शुरुआत शाम 4:55 मिनट से होगी होगी और यह शाम 6:18 बजे तक रहेगा। यानी चंदग्रहण का समय लगभग 46 मिनट का होगा। वहीं, देश में सबसे पहले ग्राहण रूणाचल प्रदेश के ईटानगर में दिखाई देगा।

भारत में इन शहरों में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण

8 नवंबर 2022 को भारत में चंद्रग्रहण पूर्वी भागों में दिखाई देगा। वहीं, बाकी हिस्‍सों में आंशिक चंद्रग्रहण देखने को मिलेगा। भारत में पटना, रांची, कोलकाता, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी में चंद्रग्रहण साफ तौर पर दिखाई देगा। आपको बता दें कि कुछ जगह में पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, वहीं कहीं पर आंशिक चंद्र ग्रहण ( Partial Lunar Eclipse) होगा।

भारत के अलावा इन देशों में दिखाई देगा ग्राण

भारत के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान और रूस के कुछ हिस्सों के अलावा, एशिया, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर ( बीजिंग, सिडनी, मेलबर्न, जकार्ता, वाशिंगटन डीसी, सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क सिटी, लॉस एंजिलिस, शिकागो, मैक्सिको सिटी, कनाडा, ब्राजील, टोक्यो, मनीला और काठमांडू)के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। इस बात की जानकारी PTI को खगोल वैज्ञानिक देबी प्रसाद दुआरी ने दी है।

chandra grahan 2022 in india date and time
Nasa की वेबसाइट के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा संरेखित हो जाते हैं जिससे चंद्रमा पृथ्वी की छाया में चला जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण में, पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया के सबसे गहरे हिस्से में पड़ता है, जिसे अम्ब्रा कहा जाता है। अक्सर चंद्रमा लाल रंग का जाता है और इस घटना के कारण चंद्र ग्रहण को कभी-कभी “ब्लड मून्स” कहा जाता है।

chandra grahan 2022 in india date and time

चंद्र ग्रहण 2022: कैसे देखें

इस शानदार अलौकिक दृश्य को बिना किसी महंगे डिवाइस के देखा जा सकता है। यदि रात में चंद्रमा स्पष्ट हो तो आकाश की ओर देखें तो यह साफ दिखाई देगा। यहां तक कि शहरों में रहने वालों को भी ग्रहण का बेहतरीन नजारा ले सकते हैं। इसके अलावा लोग इसे देखने के लिए किसी दूरबीन का उपयोग भी कर सकते हैं।

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ISRO ने फिर रचा इतिहास! सबसे भारी रॉकेट को सफलतापूर्वक किया लॉन्च, एक साथ 36 Satellites को अंतरिक्ष में पहुंचाया https://www.91mobiles.com/hindi/isro-heaviest-rocket-lvm3-m2-launched-with-36-satellites/ https://www.91mobiles.com/hindi/isro-heaviest-rocket-lvm3-m2-launched-with-36-satellites/#respond Wed, 26 Oct 2022 04:22:44 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=90858 भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ने अपने heaviest rocket LVM3 M2 को 36 satellites के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।

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ISRO यानी Indian Space Research Organisation भारत देश का एक ऐसा संस्थान है जिसके उपर हर एक भारतीय को गर्व होता है। मंगलयान (Mangalyaan) और चंद्रयान (Chandrayaan) जैसे मिशन को अंजाम देने वाले इसरो ने अनेंके ऐसे काम किए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में इंडिया का नाम चमकाया है और भारतीय वैज्ञानिकों की ​​काबिलियत का लोहा मनवाया है। एक के बाद एक सफलता अर्जित करने वाले इसरो ने एक और बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इस भारतीय स्पेस एजेंसी ने 36 सैटेलाइट्स (Satellite) के साथ इसरो का सबसे भारी रॉकेट (ISRO’s heaviest rocket) LVM3-M2 लॉन्च किया है।

ISRO’s heaviest rocket

LVM3-M2 इसरो द्वारा लॉन्च किया गया अभी तक का सबसे भारी रॉकेट है। इसका पूरा नाम Launch Vehicle Mark III (LVM3) है। इस रॉकेट की क्षमता 8,000 किलोग्राम तक का भार उठाने की है। 23 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए इस रॉकेट के जरिये 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है जिनका कुल वज़न 5,796 किलोग्राम था। इससे पहले इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो के कभी भी इतने ज्यादा वज़न के साथ किसी भी रॉकेट को लॉन्च नहीं किया ​था।

36 सैटेलाइट्स लेकर उड़ा रॉकेट

Launch Vehicle Mark III (LVM3) के साथ इसरो ने एक ही साथ 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि भी हासिल कर ली है। स्पेस में पहुंचने के बाद पहली 37 मिनट में ही 16 सैटेलाइट्स सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग होकर अपने ऑर्बिट की राह में सेट हो गए थे तथा बाद में अन्य 20 सैटेलाइट्स भी बिना किसी नुकसान के रॉकेट से डिटैच हो गई थी। बता दें कि ये सभी 36 सैटेलाइट्स OneWeb India-1 mission के तहत अंतरिक्ष में भेजी गई है तथा कुछ महीनों बाद फिर से अन्य 36 OneWeb satellites भी इसी तरह लॉन्च की जाएंगी।

ISRO द्वारा लॉन्च LVM3 रॉकेट में वनवेब लियो (OneWeb Leo) ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह एक व्यावसायिक मिशन था जिसमें यूके बेस्ड निजी कंपनी की सैटेलाइट्स को रॉकेट में भेजा गया था। बता दें कि इससे पहले साल 2019 में इसी रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और सबसे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) भी स्पेस में भेजा गया था। आपको जानकर गर्व होगा अब तक इस रॉकेट से पांच लॉन्चिंग की गई हैं और सभी पूरी तरह से सफल रही हैं।

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25 अक्टूबर को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण! जानें भारत में सूर्य ग्रहण कैसे देखें ? https://www.91mobiles.com/hindi/surya-grahan-kaise-dekhe/ https://www.91mobiles.com/hindi/surya-grahan-kaise-dekhe/#respond Mon, 17 Oct 2022 04:55:01 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=89992 last solar eclipse of the year 2022 यानी साल के अंतिम सूर्य ग्रहण को किस समय, कब, कहां और कैसे देखा जा सकता है।

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Surya Grahan जिसे अंग्रेजी में Solar Eclipse भी कहा जाता है। यह खगोलीय घटना आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करती है। सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से भी काफी मायने रखता है। इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगने वाला है जिसे लेकर पूरी दुनिया के साथ ही इंडिया में भी काफी उत्साह है। यह सोलर एक्लिप्स एक आंशिक ग्रहण होगा जो हिंदू पंचांग के अनुसार दिपावली के बाद आने वाली गोवरधन पूजा के दिन होगा। आगे हमनें last solar eclipse of the year के जुड़े कुछ महत्वपूण बिंदू शेयर किए हैं कि साल के अंतिम सूर्य ग्रहण को किस समय, कब, कहां और कैसे देखा जा सकता है।

सूर्य ग्रहण कब है ?

साल 2022 का आखिरी सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगने वाला है। यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार दोपहर के 2 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा जो शाम के 6 बजकर 30 मिनट चलेगा। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण (partial solar eclipse) होगा जो तकरीबन 4 घंटे तक चलेगा। लगे हाथ बता दें कि यह solar eclipse एशिया, अफ्रीका, यूरोप और यूनाइटेड किंगडम में दिखाई देगा।

surya grahan kaise dekhe Solar Eclipse in India

भारत में कब दिखेगा सूर्य ग्रहण ?

25 अक्टूबर 2022 को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में शाम को वक्त नज़र आएगा। इंडिया में सूर्य ग्रहण को शाम 5:41 बजे यानी 5 बजकर 41 मिनट से देखा जा सकेगा। भारत में यह आंशिक सूर्य ग्रहण तकरीबन 30 फीसदी ही लगेगा। वहीं पूरे विश्व की बात करें तो रूस में सबसे ज्यादा 80 फीसदी सूर्य ग्रहण होगा जिसके बाद चीन में यह 70 फीसदी लगेगा।

surya grahan kaise dekhe Solar Eclipse in India

क्या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण ?

अगर आप सोच रहे हैं कि आंशिक सूर्य ग्रहण क्या होता है, तो आपको बता दें कि यह वो स्थिति होती है जब सूर्य (Sun) और पृथ्वी (Earth) के बीच में चंद्रमा (Moon) आ तो जाता है लेकिन ये तीनों एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढकता है तथा कुछ ही हिस्सा छिपा पाता है, जो पृथ्वी से नहीं दिखता। आंशिक सूर्य ग्रहण को partial solar eclipse कहा जाता है।

surya grahan kaise dekhe Solar Eclipse in India

सूर्य ग्रहण कैसे देखें ?

अगर आप भी ऐसी खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखते हैं तथा सूर्य ग्रहण को देखना चाहते हैं तो आगे दिए गए 5 प्वाइंट्स का जरूर ध्यान रखना होगा।

surya grahan kaise dekhe Solar Eclipse in India

1. सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से बिल्कुल भी ना देखें।
2. solar eclipse को अपने धूप के चश्में से भी देखने का प्रयास न करें।
3. मोबाइल फोन के कैमरे से डायरेक्ट सूर्य ग्रहण की फोटोज़ खींचने का प्रयास न करें।
4. सूर्य ग्रहण देखने के लिए सोलर फिल्टर का ही उपयोग करें, जिसे बाजार से खरीदा जा सकता है।
5. solar eclipse online live भी देखा जा सकता है जिसके लिए इसरो – ISRO (Indian Space Research Organisation) की ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है। इसके लिए (यहां क्लिक करें)

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धरती के बाहर भी संभव है जीवन! Artemis I Launch से पहले ही वैज्ञानिकों को मिले पृथ्वी जैसे दो नए ग्रह https://www.91mobiles.com/hindi/artemis-1-nasa-launch-date/ https://www.91mobiles.com/hindi/artemis-1-nasa-launch-date/#respond Mon, 19 Sep 2022 09:06:07 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=88581 Artemis I Launch Date 27 सितंबर 2022 तय की गई है। Artemis I Mission duration duration 38 days, 23 hours, 49 minutes का होगा।

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विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती हर वक्त कुछ नया पाने की संभावना बनी रहती है। वैज्ञानिक भी हमारी पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश कर रहे हैं। मंगल (mars) और चांद (moon) पर तो पानी व जीवन की खोज को लेकर खबरें सामने आती ही रहती है, वहीं अब इसी कड़ी में बड़ी अपडेट मिल रही है कि वैज्ञानिकों ने दो एक्सोप्लेनेट (Exoplanets) की खोज की है, जिस पर इंसानों के जिंदा रहने की उम्मीद है।

धरती के बाहर भी जीवन संभव

वैज्ञानिक लंबे समय से खोजबीन में लगे हैं कि धरती के अलावा भी कहीं और किसी ग्रह पर इंसानी जीवन संभव बनाया जा सके। इसी रिसर्च के दौरान दो मिले हैं जहां मानवजाति बस सकती है। सबसे पहले तो आपको बता दें कि Exoplanets उन ग्रहों को कहा जाता है हमारे सौरमंडल के बाहर होते हैं। ये ग्रह दूसरे यूनिवर्स में मौजूद रहते हैं और इनका सूरज भी अलग ही होता है, जिसके चारों ओर ये चक्कर लगाते हैं।

artemis 1 nasa launch date

पृथ्वी से समानता

2 एक्सोप्लेनेट (Exoplanet) जिनपर जीवन संभव होने का दावा किया जा रहा है उनके नाम LP 890-9c और LP 890-9b बताए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये दोनों ग्रह हमसे 100 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित हैं जिन्हें ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS – Transiting Exoplanet Survey Satellite) की मदद से खोजा गया है। इस बड़ी खोज के लिए SPECULOOS दूरबीन का इस्तेमाल किया गया था।

artemis 1 nasa launch date

LP 890-9b और LP 890-9c दोनों एक्सोप्लेनेट पर मानव जीवन संभव हो सकता है, ऐसी ही उम्मीद हमारे वैज्ञानिकों को भी है। इस खोज को एस्ट्रोफिजिसिस्ट लेटिटिया डेलरेज द्वारा लीड किया गया है तथा वैज्ञानिकों की मानें तो LP 890-9b पृथ्वी के साईज़ से तकरीबन तीन गुणा अधिक बड़ा है। इसी तरह LP 890-9c का आकार पृथ्वी से 40 गुना बड़ा बताया गया है। यह भी पढ़ें: गोली की गति से भी 10 गुना तेज स्पीड के साथ धरती के पास आया यह उल्कापिंड, वैज्ञानिक भी चकराए!

दूसरे ग्रहों पर जीवन

सबसे पहले तो आपको समझना होगा कि इन दोनों ही ग्रहों पर अभी तक कोई भी मानव मिशन नहीं किया गया है। ऐसे में वहां पर जीवन की संभवना की उम्मीद वैज्ञानिक कई अन्य आस्पेक्ट को ध्यान में रखते हुए लगा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये ग्रह जिस तारे को चारों ओर घूम रहे है उसका तापमान सूरज से आधा है, ऐसे में वहां वातावरण को आसान हो सकता है। लगे हाथ बता दें कि NASA का Artemis 1 मिशन और चीन का Chang’e मिशन भी दूसरे ग्रहों की खोज कर रहा है जहां इंसान को बसाया जा सकता है।

artemis 1 nasa launch date

Artemis I

आर्टमिस 1 मिशन मानव इतिहास के सबसे बड़े अंतरिक्ष मिशन में से एक साबित होने वाला है। NASA का यह मिशन बीते दिनों फ्यूल लीक होने के चलते कुछ समय के लिए टालना पड़ गया था और अब Artemis I Launch Date 27 सितंबर 2022 तय की गई है। Artemis I Mission duration 38 दिन 23 घंटे और 49 मिनट का होगा जिस दौरान 1.3 मिलियन मील की दूरी का सफर किया जाएगा।

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गोली की गति से भी 10 गुना तेज स्पीड के साथ धरती के पास आया उल्कापिंड: रिपोर्ट https://www.91mobiles.com/hindi/supersonic-super-fast-asteroid-2022-qc7-speed-earth/ https://www.91mobiles.com/hindi/supersonic-super-fast-asteroid-2022-qc7-speed-earth/#respond Wed, 07 Sep 2022 10:30:50 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=87632 Asteroid 2022 QC7 Speed 9.10 kilometers per second मतलब 32,760 kilometers per hour नापी गई है।

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अंतरिक्ष अनगिनत रहस्यों से भरा पड़ा है। स्पेस में ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं जो हमारी सोच और ख्यालों से भी परे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक इन रोचक घटनाओं पर हमेशा नज़र बनाए रखते हैं तथा इन्हें समझने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसी ही एक विचित्र खगोलीय घटना फिर से प्रकाश में आई है। एक अल्का पिंड speed of sound यानि ध्वनि की गति तथा बुलेट की स्पीड से भी कई गुणा तेज धरती के पास से गुजरा है इस अल्कापिंड को Asteroid 2022 QC7 नाम दिया गया है। Asteroid 2022 QC7 Speed 9.10 kilometers per second मतलब 32,760 kilometers per hour नापी गई है।

Asteroid 2022 QC7 की स्पीड

Asteroid 2022 QC7 को लेकर वैज्ञानिक भी अचंभे में हैं जिसकी वजह इस उल्कापिंड की स्पीड है। यह एस्टरॉयड यूं तो 16 मीटर से लेकर 36 मीटर तक लंबा है जो बेहद ज्यादा नहीं है लेकिन इसकी गति आवाज की गति से भी कई गुणा ज्यादा है। यह उल्कापिंड धरती की ओर 9.10 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से आया है।

supersonic super fast Asteroid 2022 QC7 speed earth

एस्टरॉयड 2022 क्यूसी7 की स्पीड 32,760 किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई है जो आवाज की गति (Speed of sound = 1,225 km/h) से 27 गुणा अधिक तेज है। वहीं एक औसत बुलेट की स्पीड तकरीबन 2,736 किलोमीटर प्रति घंटा मानी जाती है। इसी तरह दुनिया का सबसे फास्ट जेट प्लेन American X-15 है जो 7,200 किलोमीटर प्रति घंटे की तेजी से उड़ता है।

supersonic super fast Asteroid 2022 QC7 speed earth

कितना खतरनाक है उल्कापिंड

अंतरिक्ष की हलचल पर पैनी नज़र बनाए रखने वाले वैज्ञानिकों ने इसे एस्टरॉयड 2022 क्यूसी7 को खतरनाक नहीं माना है। यह उल्कापिंड धरती से 46 लाख किलोमीटर की दूरी से निकला है जिसका कोई भी प्रभाव मानवजाति पर नहीं पड़ेगा।

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कैसा दिखेगा धरती पर बचा आखिरी इंसान ? AI ने फोटो बनाकर कर दिया पूरी मानवजाति को हैरान! https://www.91mobiles.com/hindi/last-human-on-earth-ai-image-artificial-intelligence-in-hindi/ https://www.91mobiles.com/hindi/last-human-on-earth-ai-image-artificial-intelligence-in-hindi/#respond Fri, 05 Aug 2022 05:32:12 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=85668 Artificial Intelligence ने Last human on Earth की फोटो बनाकर दिखा दी है।

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पर्यावरण में लगातार बदलाव आ रहे हैं और पृथ्वी का प्राकृतिक संतुलण बिगड़ता जा रहा है। इस बात को सभी जानते भी हैं और मानते भी हैं कि आने वाले वर्षो में कई तरह की मौसमी विषमताएं देखने को मिलेगी तथा भविष्य काफी डरावना हो सकता है। लेकिन यह फ्यूचर कितना अधिक डरावना हो सकता है इसकी एक छवि Artificial Intelligence ने Last human on Earth की फोटो बनाकर दिखा दी है।

ऐसा होगा धरती का आखरी इंसान

AI यानी आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस तकनीक से पूछा गया था कि, ‘धरती पर बचे आखिरी इंसान कैसे दिखेंगे?’ लोगों को उम्मीद थी कि कोई बेहद ही एडवांस तकनीक से लैस अत्याधुनिक मॉर्डन साइंस की छवि देखने को मिलेगी। लेकिन Artificial Intelligence ने जो रिजल्ट सामने लाया उसने सभी के होश उड़ा दिए! भविष्य की ऐसी डरावनी फोटो सामने आई है जिसके देखकर आप भी दांते तले उंगुलियां दबा लेंगे। नीचे लगी फोटोज़ में आप भी देख सकते हैं कि एआई के अनुसार कैसा दिखेगा लास्ट ह्यूमन ऑन अर्थ –

Last human on Earth Craiyon AI image artificial intelligence

Last human on Earth Craiyon AI image artificial intelligence

Last human on Earth Craiyon AI image artificial intelligence

यह कारनामा प्रसिद्ध Craiyon AI ने करके दिखाया है। DALL-E mini AI image generator ने उपर लगी फोटोज़ को पेंट किया है जिसने सभी का दिमाग हिलाकर रख दिया है। बता दें कि artificial intelligence यानी एआई इंटरनेट पर मौजूद डाटा की कैल्क्युलेशन कर कोई मास्टरपीस बनाती है और यह डाटा पूरी तरह अनफिल्टर होता है। AI ने जो ईमेज बनाई है उनमें इंसान किसी mutant जैसा दिखाई दे रहा है जो किसी हैवान से कम नही है।

ऐसा होग धरती का आखरी सेल्फी

Last human on Earth से पहले यह एआई Last Selfie On Earth की फोटोज़ भी दिखा चुका है और उनमें भी इंसान डरवाने चेहरे लिए हुए है। इनके अनुसार दुनिया की आखिरी सेल्फी (Last Selfie On Earth) कुछ ऐसी होगी –

Last Selfie On Earth see photos

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