Space | Tech News in Hindi (टेक न्यूज़) https://www.91mobiles.com/hindi Mon, 06 Mar 2023 10:00:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.5.3 50 हजार साल बाद आ रहा ‘हरा धूमकेतु’, भारत में भी दिखेगा, जानिए कब और कहां-कहां https://www.91mobiles.com/hindi/green-comet-in-india-coming-near-earth-after-50-thousand-year/ https://www.91mobiles.com/hindi/green-comet-in-india-coming-near-earth-after-50-thousand-year/#respond Mon, 30 Jan 2023 09:25:58 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=96988 ​पिछली बार जब यह कॉमेट धरती के पास से गुजरा था तब यहां निएंडरथल मानव (Neanderthal) रहते थे। यह धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया है।

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Highlights

  • ऐसा धूमकेतु आखिरी बार Ice Age यानी हिम युग में देखा गया था।
  • यह अनोखा Comet 30 जनवरी से 2 फरवरी के बीच दिखाई देगा।
  • इस विचित्र खगोलीय घटना को नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा।
  • हरे रंग में नज़र आने वाले इस धूमकेतु का नाम C/2022 E3 रखा गया है।

हमारी धरती से कोसों दूर अंतरिक्ष में होने वाली घटनाएं अगर आपको भी दिलचस्प और रोमांचक लगती है तो आने वाली 1 फरवरी की रात आपके लिए बेहद खास होने वाली है। एक हरा धूमकेतु (Green Comet) तकरीबन 50 हजार साल बाद हमारी पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है। खगोलीय घटनाओं की लिहाज से यह पुच्छल तारा अन्य धूमकेतुओं ने अलग और अनूठा होग। एक ओर तो इसका रंग हरा दिखाई देगा वहीं दूसरी बड़ी बात कि यह कॉमेट इससे पहले Ice Age यानी हिम युग में ही धरती के इतने करीब आया था।

50 हजार साल बाद आ रहा है Green Comet

बताया जा रहा है कि यह धूमकेतु सूरज की परिक्रमा करता है तथा इसका एक चक्कर 50 हजार साल में पूरा होता है। इसी महीने की 12 तारीख को यह पुच्छल तारा सूर्य के सबसे नजदीक गया था। और अब अपनी धूरी पर घूमते हुए यह पृथ्वी के करीब से गुजरने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछली बार जब यह कॉमेट धरती के पास से गुजरा था तब यहां निएंडरथल मानव (Neanderthal) रहते थे। यह धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया है।

Green Comet in india coming near earth after 50 thousand year

नंगी आंखों से दिखेगा यह अद्भुत नजारा

30 जनवरी से लेकर 2 फरवरी तक यह धूमकेतु धरती के करीब रहेगा तथा 1 फरवरी को यह नजदीकी सबसे ज्यादा होगी। रात के समय में इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा। खगोलविदों के अनुसार यह कॉमेट धूल और बर्फ से बना है और इसका रंग हरा है। अपने दुर्लभ रंग की वजह से ही इसके चारों ओर हरे रंग की रोशनी दिखाई देगी। जब यह पृथ्वी के सबसे पास होगा तब हमारे ग्रह और इस धूमकेतु के बीच की दूरी 2.7 करोड़ किलोमीटर के करीब होगी।

Green Comet in india coming near earth after 50 thousand year

भारत में भी दिखेगा यह अद्भुत दृश्य

रिपोर्ट्स के अनुसार 30 जनवरी से लेकर 2 फरवरी तक यह Green Comet तकरीबन पूरे भारत में दिखाई देगा। वहीं ओडिशा में इसे सबसे ज्यादा स्पष्ट तरीके से देखा जा सकेगा। वैसे तो रात के समय नंगी आंखों से ही इस पुच्छल तारे को देखा व पहचाना जा सकेगा। लेकिन अगर टेलिस्कोप की मदद ली जाए तो इस अद्भुत खगोलीय घटना का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।

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ISRO की नई उड़ान, सबसे भारी रॉकेट के लिए बना डाला देसी क्रायोजेनिक इंजन! दुनिया हुई हैरान https://www.91mobiles.com/hindi/isro-ce20-cryogenic-engine-for-lvm3-launch/ https://www.91mobiles.com/hindi/isro-ce20-cryogenic-engine-for-lvm3-launch/#respond Fri, 11 Nov 2022 06:17:33 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=91882 इसरो ने Made in India CE20 cryogenic engine का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

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ISRO यानी Indian Space Research Organisation एक के बाद एक ऐसा कारनामा करती जा रही है जो सभी भारतवासियों का सिर गर्व ऊँचा करता है। कुछ ही दिनों पहले भारतीय स्‍पेस एजेंसी इसरो ने 36 सैटेलाइट्स (Satellite) के साथ LVM3-M2 लॉन्च किया था जो इसरो का सबसे भारी रॉकेट (ISRO’s heaviest rocket) था। वहीं अब इसरो ने देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 (लॉन्च वीकल मार्क 3) के लिए Made in India CE20 cryogenic engine (क्रायोजेनिक इंजन) का भी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है।

इसरो ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल के जरिये जानकारी देते हुए कहा है कि देश की स्पेस एजेंसी ने नए क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है जो पूरी तरह से स्वदेशी है यानी मेड इन इंडिया है। इस इंजन के दमपर अब इसरो अपना सबसे भारी रॉकेट भी बिना किसी समस्या के अंतरिक्ष में दूर तक भेज सकती है। यह इंजन खासतौर पर लॉन्च वीकल मार्क 3 यानी एलएमपी-3 को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है जो अभी तक देश का सबसे पावरफुल रॉकेट है।

इसरो की सफलता

भारतीय स्पेस एजेंसी द्वारा 21.8 टन अपरेटेड थ्रस्ट स्तर पर की गई टेस्टिंग पूरी तरह से सफल साबित हुई है। ISRO का कहना है कि इस इंजन की टेस्टिंग सफल होने के बाद अब LVM-3 की पेलोड क्षमता 450 किलोग्राम तक बढ़ गई है। गौरतलब है कि OneWeb Satellites के साथ ही आने वाले साल में चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष यान गगनयान (Gaganyaan) के लिए ‘एबॉर्ट मिशन’ की टेस्‍ट फ्लाइट में भी काफी मदद मिलने वाली है।

ISRO heaviest rocket LVM3 M2 launched with 36 satellites

ISRO OneWeb मिशन

इसरो ने हाल ही में एक साथ 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि भी हासिल कर ली है। ISRO द्वारा लॉन्च LVM3 रॉकेट में वनवेब लियो (OneWeb Leo) ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह एक व्यावसायिक मिशन था जिसमें यूके बेस्ड निजी कंपनी की सैटेलाइट्स को रॉकेट में भेजा गया था। ये सभी 36 सैटेलाइट्स OneWeb India-1 mission के तहत अंतरिक्ष में भेजी गई है तथा कुछ महीनों बाद फिर से अन्य 36 OneWeb satellites भी इसी तरह लॉन्च की जाएंगी।

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ISRO ने फिर रचा इतिहास! सबसे भारी रॉकेट को सफलतापूर्वक किया लॉन्च, एक साथ 36 Satellites को अंतरिक्ष में पहुंचाया https://www.91mobiles.com/hindi/isro-heaviest-rocket-lvm3-m2-launched-with-36-satellites/ https://www.91mobiles.com/hindi/isro-heaviest-rocket-lvm3-m2-launched-with-36-satellites/#respond Wed, 26 Oct 2022 04:22:44 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=90858 भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ने अपने heaviest rocket LVM3 M2 को 36 satellites के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।

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ISRO यानी Indian Space Research Organisation भारत देश का एक ऐसा संस्थान है जिसके उपर हर एक भारतीय को गर्व होता है। मंगलयान (Mangalyaan) और चंद्रयान (Chandrayaan) जैसे मिशन को अंजाम देने वाले इसरो ने अनेंके ऐसे काम किए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में इंडिया का नाम चमकाया है और भारतीय वैज्ञानिकों की ​​काबिलियत का लोहा मनवाया है। एक के बाद एक सफलता अर्जित करने वाले इसरो ने एक और बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इस भारतीय स्पेस एजेंसी ने 36 सैटेलाइट्स (Satellite) के साथ इसरो का सबसे भारी रॉकेट (ISRO’s heaviest rocket) LVM3-M2 लॉन्च किया है।

ISRO’s heaviest rocket

LVM3-M2 इसरो द्वारा लॉन्च किया गया अभी तक का सबसे भारी रॉकेट है। इसका पूरा नाम Launch Vehicle Mark III (LVM3) है। इस रॉकेट की क्षमता 8,000 किलोग्राम तक का भार उठाने की है। 23 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए इस रॉकेट के जरिये 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है जिनका कुल वज़न 5,796 किलोग्राम था। इससे पहले इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी इसरो के कभी भी इतने ज्यादा वज़न के साथ किसी भी रॉकेट को लॉन्च नहीं किया ​था।

36 सैटेलाइट्स लेकर उड़ा रॉकेट

Launch Vehicle Mark III (LVM3) के साथ इसरो ने एक ही साथ 36 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि भी हासिल कर ली है। स्पेस में पहुंचने के बाद पहली 37 मिनट में ही 16 सैटेलाइट्स सफलतापूर्वक रॉकेट से अलग होकर अपने ऑर्बिट की राह में सेट हो गए थे तथा बाद में अन्य 20 सैटेलाइट्स भी बिना किसी नुकसान के रॉकेट से डिटैच हो गई थी। बता दें कि ये सभी 36 सैटेलाइट्स OneWeb India-1 mission के तहत अंतरिक्ष में भेजी गई है तथा कुछ महीनों बाद फिर से अन्य 36 OneWeb satellites भी इसी तरह लॉन्च की जाएंगी।

ISRO द्वारा लॉन्च LVM3 रॉकेट में वनवेब लियो (OneWeb Leo) ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह एक व्यावसायिक मिशन था जिसमें यूके बेस्ड निजी कंपनी की सैटेलाइट्स को रॉकेट में भेजा गया था। बता दें कि इससे पहले साल 2019 में इसी रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और सबसे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) भी स्पेस में भेजा गया था। आपको जानकर गर्व होगा अब तक इस रॉकेट से पांच लॉन्चिंग की गई हैं और सभी पूरी तरह से सफल रही हैं।

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