RAM | Tech News in Hindi (टेक न्यूज़) https://www.91mobiles.com/hindi Sat, 11 Jun 2022 06:47:07 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.5.3 Virtual RAM किसे कहते हैं और मोबाइल फोंस में इसका क्या है काम? इस कमाल की तकनीक के बारे में जानें यहां https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-virtual-ram-technology-and-benefits-in-smartphone-mobile/ https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-virtual-ram-technology-and-benefits-in-smartphone-mobile/#respond Sat, 11 Jun 2022 06:48:12 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=74673 वर्चुअल रैम होती क्या है, किस तरीके से काम करती है और स्मार्टफोन मोबाइल में इसके फायदें क्या है

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Virtual RAM, Expandable RAM या फिर RAM Expansion technology ये शब्द आपने जरूर सुनें होंगे। बोलने-पढ़ने में बेशक ये शब्द अलग-अलग लग रहे हैं लेकिन इन सबका मतलब एक ही है। मोबाइल फोंस के विज्ञापन या खबरों में आपने सुना होगा कि फलां स्मार्टफोन 8GB RAM पर लॉन्च हुआ है लेकिन उसमें 13GB RAM तक की परफॉर्मेंस मिलेगी। यह जो एक्स्ट्रा 5जीबी पावर है उसे ही वर्चुअल रैम या एक्सपेंडेबल रैम कहा जाता है। आज लगभग सभी स्मार्टफोन ब्रांड अपने मोबाइल फोंस को रैम एक्सपेंशन टेक्नोलॉजी से लैस करके लॉन्च कर रहे हैं। आगे आर्टिकल में हमने आसान भाषा में अपने पाठकों को समझाने की कोशिश की है कि वर्चुअल रैम होती क्या है और किस तरीके से काम करती है। साथ ही आप जानेंगे कि किसी स्मार्टफोन में वर्चुअल रैम होने के क्या फायदे होते हैं।।

RAM क्या है

वर्चुअल रैम से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर रैम क्या होती है। यहां सिंपल भाषा में बात करें तो मोबाइल फोन में जब कोई ऐप्लीकेशन इंस्टाल की जाती है तो वह इंटरनल मैमोरी में स्टोर होती है और उन ऐप्स को ओपेन या रन किया जाता है तो उसके लिए RAM का इस्तेमाल होता है। मतलब जो भी ऐप चलेगी वह रैम मैमोरी पर चलेगी और एक ऐप पर काम करने के दौरान अचानक से बीच में दूसरी ऐप को ओपन कर लेना तथा फिर किसी तीसरी ऐप पर चले जाना जैसे स्विचिंग कार्यो व मल्टीटॉस्किंग को फोन की रैम द्वारा ही हैंडल किया जाता है।

What is Virtual RAM technology and benefits in smartphone mobile

Virtual RAM क्या है

फोन में जितना ज्यादा रैम मैमोरी होगी, उसको मल्टीटॉस्किंग करने के लिए उतना ही ज्यादा स्पेस मिलेगा तथा हर तरह के कार्य स्मूथली काम करेंगे। आजकल हैवी गेम व बड़ी-बड़ी ऐप्स आने लगी हैं जिन्हें काम करने के लिए ज्यादा स्पेस चाहिए होता है तथा उनकी सिस्टम फाईल्स भी बड़ी होती है। ऐसी ही कई ऐप्लीकेशन्स को भरपूर मैमोरी मुहैया कराने के लिए वर्चुअल रैम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो जरूरत पड़ने फोन की इंटरनल स्टोरेज को ही अपनी प्रोसेसिंग के लिए यूज़ कर लेती है।

यह भी पढ़ें : स्मार्टफोन के लिए कितनी GB RAM है काफी? क्या वाकई में है 8जीबी और 12जीबी रैम वाले मोबाइल की जरूरत

मोबाइल फोन में वर्चुअल रैम कैसे करती है काम

अब तक आप समझ चुके हैं कि वर्चुअल रैम में फोन ही इंटरनल स्टोरेज शामिल होती है। स्मार्टफोन ब्रांड फोन को बाजार में लाते वक्त उसकी इंटरनल स्टोरेज का कुछ हिस्सा वचुर्अल रैम के लिए रिजर्व कर देते हैं। यह हिस्सा फोन में सेव की जाने वाली फोटो, वीडियो व अन्य फाइल्स में काम नहीं आता है। और जब काम करते वक्त फोन में मौजूद रैम कम पड़ने लगती है तब प्रोसेसिंग को स्मूथ और फास्ट बनाए रखने के लिए इंटरनल स्टोरेज का वह हिस्सा रैम के साथ मिलकर काम करने लगता है और चलाई जा रही ऐप्स उस ​एक्टेंडेड रैम या वर्चुअल रैम मैमोरी पर रन करने लगती है।

What is Virtual RAM technology and benefits in smartphone mobile

Virtual RAM के फायदें

एक बार में स्मार्टफोन पर जो भी काम किया जाता है वह सब रैम मैमोरी पर होता है। WhatsApp पर चैटिंग, Instagram/FaceBook पर फीड स्क्रॉलिंग और YouTube पर वीडियो से लेकर फोन में गेम खेलना या किसी को फोन मिलाना और कॉल रिसीव करना, यह सब RAM के जरिये होता है। अगर फोन में रैम काफी है तो आप ये सभी कार्य स्मार्टफोन में एक ही साथ कर सकते हैं। वर्चुअल रैम इंटरनल मेमोरी का इस्तेमाल करके रैम की क्षमता बढ़ा देगी और सभी ऐप्स व टॉस्क बैकग्राउंड में चलते रहेंगे तथा ये सारे काम बिना रूके, बिना लैग हुए, बिना हैंग हुए चलते रहेंगे।

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अधिक Virtual RAM वाला फोन खरीदने में समझदारी है या फिर ज्यादा Physical RAM वाला फोन लेना है बेस्ट, जानें जवाब https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-difference-between-physical-and-extended-virtual-ram-which-is-best/ https://www.91mobiles.com/hindi/what-is-difference-between-physical-and-extended-virtual-ram-which-is-best/#comments Sat, 29 Jan 2022 08:19:22 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=74709 अधिक वर्चुअल रैम वाला फोन खरीदने में समझदारी है या फिर ज्यादा फिजिकल रैम वाला फोन लेना बेस्ट है

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नया स्मार्टफोन खरीदते वक्त आमतौर पर यूजर मोबाइल में उसकी डिसप्ले, कैमरा, बैटरी और प्रोसेसर देखते हैं। मोबाइल कंपनियां भी अपने फोंस को बेचने के लिए उनकी खासियतों को गिनवाती है और प्रोमेट करती है। इन दिनों स्मार्टफोन के फीचर्स के बीच वर्चुअल रैम यानी एक्सटेंडेड रैम का भी जिक्र खूब होता है और ब्रांड्स अपने फोन को 3GB Extended RAM और 5GB Extended RAM जैसी बातें बोल कर बेस्ट बताते हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह वर्चुअल रैम क्या होती है और किस तरीके से काम करती है? Virtual RAM के बारे में जानने के लिए (यहां क्लिक करें)। वहीं Virtual RAM फोन की Physical RAM से कितनी अलग है और अधिक वर्चुअल रैम वाला फोन खरीदने में समझदारी है या फिर ज्यादा फिजिकल रैम वाला फोन लेना बेस्ट है, इस सवाल का जवाब आगे दिया गया है।

Physical RAM और Virtual RAM में अंतर

स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस की बात करें तो Virtual RAM की कार्य प्रणाली या यूं कहें कि वर्चुअल रैम की परफॉर्मेंग Physical RAM की तुलना में कम व थोड़ी धीमी होती है। फिजिकल रैम को फोन के मदरबोर्ड के साथ अटैच किया जाता है और इसकी स्पीड वर्चुअल रैम से काफी तेज होती है। स्मार्टफोन में मल्टीटॉस्किंग और ऐप्स इत्यादि पहले फिजिकल रैम पर ही काम करती और जब वह रैम मैमोरी कम पड़ने लगती है तब ज्यादा स्पेस की जरूरत पूरी करने के लिए वर्चुअल रैम का इस्तेमाल किया जाता है।

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फिजिकल रैम मोबाइल की प्राइमरी रैम होती है। जब कोई भी काम शुरू होता है और ऐप्स को चलाया जाता है तो सभी कार्य फिजिकल रैम पर ही होते हैं। जब टॉस्किंग हैवी हो जाती है और फिजिकल रैम को एक्स्ट्रा मैमोरी की जरूरत होती है तब इंटरनल स्टोरेज पर रिजर्व रैम मैमोरी यानी वर्चुअल रैम का यूज़ शुरू होता है। यह काम कैसे होता और फिजिकल रैम व वर्चुअल रैम के बीच तालमेल कैसे बनता है इसकी जानकारी आगे दी गई है।

Mobile Phone में दोनों RAM कैसे काम करती है

कोई भी टॉस्क सबसे पहले फिजिकल रैम द्वारा ही हैंडल किया जाता है। जब टास्क की गिनती बढ़ जाती है और रैम मैमोरी कम पड़ने लगती है तब फोन की वर्चुअल रैम का काम शुरू होता है। फिजिकल रैम भरने लगती है तो वह अपना कुछ डाटा वर्चुअल रैम को ट्रांसफर देती और इस तरह फिजिकल रैम की मैमोरी से खाली हो जाती है। इस प्रक्रिया को swapping technique भी कहा जाता है। वर्चुअल रैम को डाटा दिए जाने के बाद खाली हुई फिजिकल रैम फिर से अपने टास्क में जुट जाती है। और जब कोई टॉस्क खत्म हो जाता है तो फिजिकल रैम वर्चुअल रैम को दिया गया डाटा फिर से वापिस मांग लेती है। Virtual RAM का काम करने का यह तरीका paging भी कहलाता है।

what is difference between Physical and Extended Virtual RAM which is best

क्या है बेहतर

उदाहरण की बात करें एक कंपनी ने अपने फोन को 6GB RAM + 64GB Storage पर लॉन्च किया है जो 3GB Extended RAM यानी 3जीबी वर्चुअल रैम सपोर्ट करता है। इस फोन में यूजर को 6 जीबी + 3 जीबी रैम यानी कुल 9GB RAM की पावर तो मिलेगी लेकिन दूसरी ओर उपभोक्ता इसमें 64 जीबी की जगह 61 जीबी इंटरनल स्टोरेज का ही यूज़ कर पाएंगे। वहीं अगर यूजर बिना एक्सटेंडेड रैम/वर्चुअल रैम तकनीक वाला फोन 8GB RAM + 64GB Storage पर खरीदते हैं तो इस 8GB फिजिकल रैम वाले फोन की परफॉर्मेंस 9GB वर्चुअल रैम वाले फोन के बेहतर और फास्ट रहेगी।

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स्मार्टफोन के लिए कितनी GB RAM है काफी? क्या वाकई में है 8जीबी और 12जीबी रैम वाले मोबाइल की जरूरत https://www.91mobiles.com/hindi/know-how-much-ram-is-enough-for-smartphone/ https://www.91mobiles.com/hindi/know-how-much-ram-is-enough-for-smartphone/#respond Wed, 05 May 2021 00:25:00 +0000 https://www.91mobiles.com/hindi/?p=58351 स्मार्टफोन की स्पीड उसकी RAM पर नहीं, उसमें मौजूद Processor पर निर्भर करती है।

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वह वक्त याद है जब मोबाइल फोंस में 1 जीबी रैम होना ही बेहद पावरफुल माना जाता था? स्मार्टफोन तो दूर की बात है, कम्प्यूटर और लैपटॉप में भी यदि 2जीबी-3जीबी रैम मिल जाती थी तो मस्ती के साथ गेम खेलने बैठ जाते थे। समय के साथ मोबाइल बाजार एडवांस होता जा रहा है और अब स्मार्टफोंस में 2 जीबी या 4GB RAM नहीं बल्कि 8GB और 12GB तक की RAM दी जाने लगी है। नया मोबाइल खरीदने से पहले लोग बड़े चाव से अधिक रैम वाले फोन वेरिएंट परचेज करते हैं और इसके लिए अतिरिक्त पैसा चुकाने से भी परहेज़ नहीं करते। लेकिन कभी आपने सोचा है कि क्या वाकई में हमें 8 जीबी या 12 जीबी रैम वाले स्मार्टफोंस की जरूरत है?

स्मार्टफोन मार्केट की प्रतिस्पर्धा किसी से छिपी नहीं है। टेक ब्रांड्स की कोशिश रहती है कि मोबाइल यूजर्स को खुद से जोड़ा जाए और इसके लिए एडवांस और इम्प्रूव्ड डिवाईस लॉन्च किए जाते हैं। कोई एक आस्पेक्ट यदि हिट हो जाता है मोबाइल कंपनियां उस ट्रेंड की पूंछ पकड़े हुए अपने फोंस लॉन्च करती जाती है। ऐसा ही एक आस्पेक्ट है स्मार्टफोंस में मौजूद रैम मैमोरी। बड़ी रैम मैमोरी को हाईएंड स्पेसिफिकेशन्स माना जाता है तथा ज्यादा रैम को हैवी प्रोसेसिंग से जोड़ा जाता है। मार्केट में 8 जीबी रैम और 12GB RAM वाले एंडरॉयड फोन आने लगे हैं। लेकिन बेहद कम स्मार्टफोंस यूजर्स जानते हैं स्मार्टफोन की प्रोसेसिंग में रैम का योगदान सीमित ही होता है और इसके लिए जरूरी नहीं कि 8 जीबी या इससे भी बड़ी रैम वाला फोन खरीदा जाए। आगे अपने आर्टिकल के जरिये हमने बड़ी रैम के चक्कर में अधिक पैसा खर्च करने वाले यूजर्स के काम की जानकारी दी है।

रैम का काम

RAM यानी Random Access Memory. सबसे पहले आसान शब्दों में जानते हैं कि स्मार्टफोन में रैम का यूज़ क्या होता है। मोबाइल फोन में जब कोई ऐप्लीकेशन इंस्टाल की जाती है तो वह फोन की इंटरनल मैमोरी में स्टोर होती है। वहीं जब किसी ऐप को स्मार्टफोन में ओपेन या रन किया जाता है तो उसके लिए RAM का इस्तेमाल होता है। मतलब जो भी ऐप्लीकेशन चलेगी वह रैम मैमोरी पर चलेगी। सिर्फ एक ऐप ही नहीं एक बार में स्मार्टफोन में जो-जो काम किया जाता है वह सब रैम मैमोरी पर ही होता है।

know how much ram is enough for smartphone

WhatsApp पर चैटिंग, Instagram/FaceBook पर फीड स्क्रॉलिंग और YouTube पर वीडियो से लेकर फोन में गेमिंग तक, ये सभी काम RAM के जरिये ही किए जाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो स्मार्टफोन में जो भी मल्टीटॉस्किंग होती है उसे फोन की रैम द्वारा हैंडल किया जाता है। इसी तरह एक ऐप पर काम करने के दौरान अचानक से बीच में दूसरी ऐप को ओपन कर लेना और फिर वापिस उस पहली ऐप पर चले जाना जैसे टॉस्क स्विचिंग कार्यो में भी रैम मैमोरी का भरपूर योगदान होता है। यह भी पढ़ें : चार्जिंग के नाम पर हो रही है डाटा की चोरी, चार्ज में लगाते ही हैक हो जाएगा आपका फोन

क्या होगा अगर रैम हो कम

Multitasking

अगर आपने अपने फोन में 5 या 6 Apps खोल रखी हैं तो वह बैकग्राउंड में रन करती रहेगी। ऐप एंड न करने पर वो सभी ऐप्स लगातार चलती रहेगी और स्मार्टफोन में मौजूद रैम हर ऐप की जरूरत के हिसाब से कुछ एमबी या जीबी स्पेस उन्हें दे देती रहेगी। इसी क्रम में यदि आप कोई 7वीं या 8वीं ऐप भी खोल लेंगे तो रैम पहले से ओपन ऐप को दिया गया मैमोरी स्पेस कुछ कम करके नई ऐप्स को उपलब्ध करा देगी। और यदि फोन में रैम कम है तो इस पूरी मल्टीटॉस्किंग की प्रक्रिया में एक साथ सभी 8 ऐप्स ओपेन नहीं रह पाएगी और रैम द्वारा ही कुछ ऐप्स को अपने आप बंद कर दिया जाएगा।

Task Switching

आप मोबाइल पर कोई खेल रहे हैं और अचानक से व्हाट्सऐप पर नए मैसेज की नोटिफिकेशन आती है। आप नोटिफिकेशन बार को स्क्रॉल डाउन करके उस मैसेज पर टच करते हैं तो व्हाट्सऐप खुल जाता है। वहां मैसेज का रिप्लाई करने के बाद जब बैक बटन दबाकर वापिस गेम पर आते हैं तो देखते हैं कि गेम फिर से रिलोड हो रहा है। टॉस्क स्विचिंग में ऐप का स्लो होना या लोड होने में वक्त लेना यह सब कम रैम की वजह से ही होता है। एक साथ कई ऐप्स ओपेन होने पर या हैवी गेम खेलने पर यह टॉस्क स्विचिंग की समस्या सामने आती है जिसका कारण Low RAM ही है।

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फोन के लिए कितनी रैम की जरूरत

अब आता है वही सवाल जिसका जवाब आप जानना चाहते हैं, एक स्मार्टफोन में कितनी GB RAM की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि कोई यूजर अपने फोन में लंबे समय तक गेम नहीं खेलता है और रोजमर्रा में कुछ चुनिंदा ऐप ही यूज़ करता है तो ऐसी मल्टी टॉस्किंग के लिए 3 जीबी रैम मैमोरी काफी है। वहीं 4 जीबी रैम मैमोरी के साथ हैवी गेम्स को सही तरीके से खेला जा सकता है। आज के समय में स्मार्टफोन के लिए 6 जीबी रैम को आदर्श माना जा सकता है। यह भी पढ़ें : 20,000 रुपए से भी कम कीमत वाले Best Gaming स्मार्टफोन, यहां देखें फुल लिस्ट

कम रैम पर कैसे होगी फास्ट प्रोसेसिंग

यहां पर साफ कर दें कि आपके स्मार्टफोन की स्पीड उसकी रैम पर निर्भर नहीं करती है। ऐसा नहीं है कि फोन में ज्यादा रैम होगी तो फोन की प्रोसेसिंग स्पीड भी ज्यादा होगी। फोन की स्पीड उसमें मौजूद Processor/Chipset पर निर्भर करती है। रैम बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन प्रोसेसर पावरफुल है तो वह फोन यकिनन फास्ट, स्मूथ और लैग-फ्री रिजल्ट देगा।

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उदाहरण के तौर पर यदि एक Android SmartPhone 4 जीबी रैम मैमोरी के साथ Qualcomm Snapdragon 845 SoC सपोर्ट करता है और दूसरे फोन में 8 जीबी रैम के साथ स्नैपड्रैगन 660 चिपसेट दिया गया है तो इनमें से पहला फोन अच्छा प्रदर्शन करेगा। वह इसलिए क्योंकि बेशक उसमें रैम कम है लेकिन उसका प्रोसेसर दूसरे फोन की तुलना में अधिक ताकतवर है। कम रैम के बावजूद अच्छी प्रोसेसिंग को सबसे बड़ा उदाहरण Apple iPhone है। आईफोंस में रैम कम होती है और फोन पावरफुल प्रोसेसर की वजह से बिना हैंग हुए गजब काम करते हैं।

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