
Samsung ने भारत में अपनी कस्टमर सर्विस के 30 साल पूरे कर लिए हैं। कंपनी ने 1996 में दिल्ली में अपने पहले सर्विस सेंटर के साथ भारत में ग्राहक सेवा की शुरुआत की थी। उस समय शिकायतें हाथ से रजिस्टर में लिखी जाती थीं और इंजीनियर्स लॉगबुक व टूलकिट लेकर ग्राहकों के घर पहुंचते थे। वहीं, अब तीन दशक बाद Samsung देश के सबसे बड़े और डिजिटल रूप से कनेक्टेड कस्टमर केयर नेटवर्क्स में से एक बन चुका है।
Samsung के अनुसार मार्च 1996 में जब पहला सर्विस सेंटर शुरू हुआ था, तब भारत में फोन और इंटरनेट आम नहीं थे। इसलिए ग्राहक सर्विस सेंटर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते थे। जिसके बाद में 1997 में इंजीनियर्स ने ग्राहकों के अलर्ट पाने के लिए पेजर्स का इस्तेमाल शुरू किया था। जो उस समय एक बड़ा तकनीकी बदलाव माना गया था।
कंपनी ने दिसंबर 1996 तक भारत में 21 सर्विस सेंटर बना लिए थे। इसके बाद 2003 में Samsung ने दिल्ली के नेहरू प्लेस में अपना पहला इन-हाउस कॉल सेंटर शुरू किया था। जिसके तहत टोल-फ्री कस्टमर सपोर्ट नंबर भी लॉन्च किया गया था। इसके साथ कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी सर्विस को तकनीक आधारित इकोसिस्टम में बदलना शुरू किया था।

यदि आज की बात करें तो Samsung के भारत में 3,000 से अधिक सर्विस टचपॉइंट्स, 12,500 से ज्यादा प्रशिक्षित इंजीनियर्स और 16 पार्ट्स वेयरहाउस हैं। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल दिक्कत का सोल्यूशन देना नहीं है, बल्कि ग्राहकों को फास्ट और भरोसेमंद अनुभव देने का है।
Samsung फिलहाल AI और SmartThings जैसी तकनीकों के जरिए प्रेडिक्टिव केयर पर भी फोकस कर रहा है। कंपनी की Home Appliances Remote Management (HRM) तकनीक के जरिए रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसे उपकरण पहले से ही संभावित खराबी या मेंटेनेंस की जानकारी ग्राहकों को दे सकते हैं। इससे समस्या आने से पहले ही सोल्यूशन की प्रोसेस शुरू की जा सकती है।
कंपनी 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन, WhatsApp सपोर्ट, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग जैसी सुविधाएं भी दे रही है। Samsung की वॉइस सपोर्ट सेवाएं भारत की 10 भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे अलग-अलग रीजन के ग्राहकों को सुविधा मिल जाती है।
Samsung ने Pick and Drop सर्विस, Digital Service Center प्लेटफॉर्म और सेल्फ-हेल्प वीडियो जैसी डिजिटल सेवाओं को भी मजबूत किया है। कंपनी AI आधारित को-पायलट, स्पीच-टू-टेक्स्ट और सेंटिमेंट एनालिसिस टूल्स का उपयोग कर रही है। ब्रांड अपने “Dost Service” स्किलिंग प्रोग्राम के जरिए सर्विस इंजीनियर्स को ट्रेनिंग भी दे रही है। कंपनी ने 22 ITI संस्थानों के साथ साझेदारी कर करीब 14,500 से ज्यादा इंजीनियर्स को काम सिखाया है। सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भी Samsung “Care for Clean India” पहल के जरिए ई-वेस्ट मैनेजमेंट और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा दे रही है।
बताते चलें कि Samsung ब्रांड का 30 साल का सफर केवल तकनीक के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि ग्राहक सेवा के बदलते स्वरूप को दिखाती है। जिसमें हाथ से लिखे रजिस्टर और पेजर्स से शुरू हुआ काम आज AI आधारित कनेक्टेड केयर और स्मार्ट होम इकोसिस्टम तक आ चुका है। उम्मीद है आपको सैमसंग के बारे में यह जानकारी अच्छी लगी होगी। 91मोबाइल्स पर टेक से जुड़े हर अपडेट के लिए बने रहें।












