
इंडिया में आज अगर हर व्यक्ति के हाथ में इंटरनेट की सुविधा है तो इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ Reliance Jio का है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी ने बाजार में आते ही लोगों को फ्री सिम बांटी और मुफ्त इंटरनेट दिया। जियो ने मोबाइल यूजर्स को स्मार्टफोन से जोड़ा और अनलिमिटेड 4G इंटरनेट से लेकर फास्ट 5G सर्विसेज प्रदान की। अब यह भारतीय मोबाइल कंपनी 6G की ओर कदम बढ़ा रही है। रियालंस जियो ने अपनी 49वीं AGM में Jio 6G से जुड़ी बड़ी अनाउंसमेंट की है।
6G कब आएगा
रिलायंस जियो ने आज अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (Annual General Meeting) का आयोजन किया था। इस वार्षिक बैठक के मंच से रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने Jio 6G इंडिया लॉन्च से जुड़े बड़े संकेत दिए हैं। अंबानी ने बताया कि अगले 4 साल में यानी 2023 तक जियो की 6जी सर्विस देखने को मिल सकती है।
AGM में Jio 6G की लॉन्च डेट या कमर्शियल रोलआउट टाइमलाइन तो नहीं बताई गई है, लेकिन Akash Ambani के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य साल 2030 तक कमर्शियल 6G Service शुरू करने का है। इसके लिए कंपनी पहले ही काम शुरू कर चुकी है और हो सकता है कि सिर्फ 2 साल में ही यानी वर्ष 2028 तक Jio 6G की टेस्टिंग शुरू कर दिए जाए।
इंडिया में 6जी नेटवर्क शुरू करने के लिए पहले प्री-कमर्शियल पायलट ट्रायल शुरू किया जाएगा और आकाश अंबानी का कहना है कि कंपनी का टारगेट 2030 तक सभी मोबाइल यूजर्स को को 5G Network पर लाना है। इस 49वीं एजीएम में Jio 6G में इस्तेमाल होने वाली AI टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंटरनेट और पेटेंट्स का भी जिक्र हुआ है। वहीं कंपनी ने साफ कर दिया कि Reliance Jio 6G Service इकोसिस्टम की तैयारी में जुटी हुई है।
सैटेलाइट से चलेगा Jio इंटरनेट
AGM में Akash Ambani ने अनाउंस किया है कि रिलायंस जिओ इंडिया के लिए एक Low Earth Orbit (LEO) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन बनाए की तैयारी कर रही है। इसका मतलब है कि कंपनी आने वाले समय में ऐसा सैटेलाइट नेटवर्क बना सकती है जो जियो मोबाइल टावर के साथ मिलकर फास्ट 6जी इंटरनेट और अन्य 6जी सर्विस प्रदान कर सके। याद दिला दें कि Elon Musk की कंपनी SpaceX भी Starlink नाम की ऐसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस पर काम कर रही है।
91मोबाइल्स के पाठकों को बता दें कि ये LEO यानी लो अर्थ औरबीट सैटेलाइट हमारी धरती के बहुत पास होते हैं। ये तकरीबन 160km से 2000km तक की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी के पास होने की वजह से इन्हें डेटा भेजना या रिसीव करना काफी फास्ट होता है और इसी वजह से मोबाइल यूजर्स को लो लेटेंसी व फास्ट इंटरनेट सर्विस मिलती है।
वहीं Satellite Constellation की बात करें तो इसमें कंपनी कई सारी सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क बनाती है और सभी सैटेलाइट्स को अलग-अलग एरिया में घूमने के लिए छोड़ा जाता है। दरअसल पूरी दुनिया को कवर करना एक या दो सैटेलाइट के लिए मुश्किल होता है, इसीलिए अलग-अलग जगह घूमने वाली सैटेलाइट्स आपस में मिलकर डेटा को जोड़ती हैं। इसी सैटेलाइट्स के नेटवर्क को सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन कहा जाता है।
Reliance Jio ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल करने वाली है। वहीं सबसे बड़ी बात कि यह जियो की खुद की यानी इंडियन टेक्नोलॉजी होगी। अंत में बताते चलें कि आने वाले समय में Jio AI में भी विस्तार देखने को मिलेगा। अंबानी के अनुसार देश में 524 मिलियन Jio कस्टमर्स का आंकड़ा पार हो चुका है और वर्ष 2025-26 में जियो नेटवर्क पर 241 exabytes इंटरनेट डाटा ट्रैफिक देखा गया है।












