जियो इलेक्ट्रिक व्हीकल की चार्जिंग टेंशन जल्द करेगा खत्म, जानें कैसे

जियो बीपी और टीवीएस मोटर कंपनी के बीच देश में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री व्हीलर की चार्जिंग की समस्या को हल करने के लिए एक बड़े कदम को उठाया गया है। दरअसल, दोनों कंपनियों के बीच चार्जिंग के एक मजबूत बुनियादी ढांचा बनाने की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति बनी हैं। वहीं, यह जियो-बीपी के नेटवर्क पर आधारित होगा। इस प्रस्तावित साझेदारी के तहत, टीवीएस के इलेक्ट्रिक वाहनों के ग्राहकों को जियो-बीपी के व्यापक चार्जिंग नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी। जाहिर है अन्य इलेक्ट्रानिक वाहनों के लिए भी यह चार्जिंग स्टेशन खुले रहेंगे।
ग्राहकों को व्यापक और विश्वसनीय चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने के लिए एसी चार्जिंग नेटवर्क के साथ डीसी फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क भी बनाया जाएगा। इलेक्ट्रिफिकेशन के क्षेत्र में दोनों कंपनियां को अंतरराष्ट्रीय स्तर की महारत हासिल है, कंपनियां अपनी इस महारत का उपयोग भारतीय बाजार में करेंगी ताकि ग्राहकों को नया अनुभव दिया जा सके। इसे भी पढ़ें : क्या है Battery Swapping? कैसे यह तकनीक कई गुणा कम कर देगी इंडिया में Electric Vehicle का दाम
जियो-बीपी अपने इलेक्ट्रानिक वाहन चार्जिंग और स्वैपिंग स्टेशनों को जियो-बीपी पल्स ब्रांड के तहत चलाता है। जियो-बीपी पल्स ऐप से ग्राहक आसानी से आस-पास के चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकते हैं और अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज कर सकते हैं। जियो-बीपी एक मजबूत चार्जिंग इकोसिस्टम भी बना रहा है जो सभी हितधारकों को लाभ पहुंचाएगा।
टीवीएस मोटर कंपनी ने नए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उत्पादों और संबंधित तकनीकों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लॉन्च के बाद से कंपनी अपने पहले हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर TVS iQube की 12,000 से अधिक यूनिट बेच चुकी है। टीवीएस आईक्यूब एक स्मार्ट, कनेक्टेड और व्यावहारिक ईवी है जो ग्राहकों की दैनिक आवागमन की जरूरतों को पूरा करता है। कंपनी 5-25kW की रेंज में दो और तिपहिया वाहनों का एक पूरा पोर्टफोलियो तैयार कर रही है, जो अगले 24 महीनों के भीतर बाजार में उतारा जाएगा। इसे भी पढ़ें: Electric Vehicles को चार्ज करते वक्त इन बातों का जरूर रखें ध्यान, साथ ही जानें क्यों लगती है E-Scooter में आग
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यह साझेदारी, देश में दोपहिया और तिपहिया ग्राहकों को ईवी अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगी और साथ ही भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी।