
टेलीकॉम इंडस्ट्री के बाद अब मोबाइल इंडस्ट्री के दिन भी खराब होने वाले हैं। दरअसल, जीएसटी बढ़ने से मोबाइल इंडस्ट्री में खलबली मचनी तय मानी जा रही है। जीएसटी बढ़ने के बाद यूजर्स को मोबाइल कीमत ज्यादा चुकानी पडे़गी, जिससे मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों को भी सेल कम होने का डर सता रहा है।
जानें क्यों बढ़ेगी कीमत
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) काउंसिल द्वारा 14 मार्च को आयोजित की गई बैठक में मोबाइल फोन पर जीएसटी की दर 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी करने का फैसला लिया गया है। सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से मोबाइल इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। कंपनियों के साथ ही एक्सपर्ट्स का भी यह मानना है कि इससे मोबाइल इंडस्ट्री पर इसका बुरा असर पड़ेगा।
कंपनियों को टेंशन
शाओमी इंडिया के हेड मनु जैन ने इस मामले को लेकर हाल ही में एक ट्विट कर कहा था कि जीएसटी बढ़ने के बाद सभी कंपनियों के ऊपर फोन की कीमत बढ़ाने का दबाव होगा। इसकी वजह से मोबाइल इंडस्ट्री का मेक इन इंडिया प्रोग्राम आगे जाकर कमजोर हो सकता है।
शाओमी के अलावा वीवो इंडिया के डारेक्टर ब्रांड स्ट्रैटिजी निपुण मारया का भी कहना है कि हम नए टैक्स स्ट्रक्चर के प्रभाव को इवैलुएट कर रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों में इसे लेकर फैसला करेंगे

इंडस्ट्री में तनाव
मोबाइल इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का मानना है कि मोबाइल फोन पर जीएसटी बढ़ने से स्मार्टफोन मार्केट पर खासा असर पड़ेगा, जिससे मोबाइल फोन की कीमतों में इजाफा होगा। इसका सीधा असर मोबाइल खरीदने वाले ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। जीएसटी बढ़ने के बाद मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों के सामने कीमतें बढ़ाने की मजबूरी होगी।
ग्राहक की जेब पर होगा असर
12 फीसदी से जीएसटी को बढ़ाकर 18 फीसदी करने के बाद इसका सबसे ज्यादा असल ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। ग्राहकों को जिस फोन के लिए आज 10000 रुपए चुकाने होते हैं। वहीं, जीएसटी के बाद ग्राहकों को ज्यादा कीमत देनी पड़ेगी। नई जीएसटी एक अप्रैल से लागू करने का प्रस्ताव जारी किया गया है।

कोरोना वायरस
दूसरी इंडस्ट्री की तरह ही कोरोना वायरस मोबाइल इंडस्ट्री पर भी असर कर रहा है। कोरोना वायरस के कारण मोबाइल पार्ट्स सप्लाई न होने से इंडस्ट्री संकट के दौर से गुजर रही। भारत में मोबाइल फोन निर्माण में इस्तेमाल आने वाले 90 फीसदी पार्ट्स की सप्लाई चीन से होती है।










