एयरटेल से परेशान ग्राहक पहुंचा कोर्ट, जज बोले-कंपनी को देना होगा 1.5 लाख रुपये का मुआवजा

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मोबाइल नंबर पोर्ट कराना आज के समय में काफी आसान है। इसके लिए आपको अपने फोन से एक स्पेशल नंबर पर SMS करना होता है। लेकिन, एक फिल्म निर्माता नंबर पोर्ट कराने के बाद इतना परेशान हुआ कि उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। TOI की रिपोर्ट के अनुसार सिम कार्ड को एयरटेल में पोर्ट करने का प्रयास तीन बार विफल रहने पर उपभोक्ता ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद जज ने टेलीकॉम कंपनी पर 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

5 साल पहले ग्राहक हुआ था परेशान

रिपोर्ट के अनुसार 22 जनवरी, 2018 बैंगलोर के विजयनगर निवासी और फिल्म निर्माता सिम्हा के मोबाइल फोन पर एयरटेल के एक अधिकारी ने उन्हें एक आकर्षक ऑफर के साथ सिम का ऑफर दिया। इसके बाद वब अपने मौजूदा वोडाफोन सिम को एयरटेल में पोर्ट करने पर राजी हो गए। उन्होंने अपने आधार डिटेल भेजकर ई-केवाईसी पूरा किया और अगले दिन नया सिम कार्ड प्राप्त कर लिया।

लेकिन सिम मिलने और 110 रुपये की पेमेंट करने के बाद एयरटेल कर्मचारी ने उन्हें सूचित किया कि नए पोर्ट किए गए सिम को सक्रिय होने में सात दिन लगेंगे। सिम्हा को सूचित किया गया कि उन्हें वोडाफोन के साथ अपने बकाया बिलों की पेमेंट करनी होगा।

इसके बाद 31 जनवरी, 2018 को एयरटेल ने सिम्हा को सूचित किया कि वोडाफोन ने पोर्टिंग के लिए उनके अनुरोध को एक्सेपट कर लिया है। इसके बाद उन्होंने अपने फोन में एयरटेल की नई सिम डाली, लेकिन नेटवर्क नहीं आया। इसके बाद उन्हें बताया गया कि सिम अभी तक रजिसट्रेशन नहीं हुआ और इसके लिए उन्हें एयरटेल स्टोर पर जाना होगा।

एयरटेल स्टोर के काटे चक्कर

इसके बाद वह आरवी रोड पर एयरटेल स्टोर पहुंचे। वहां के कर्मचारी ने ने जांच की और उन्हें बताया कि उन्हें एक गलत सिम नंबर जारी किया गया था। इसके बाद उन्हें दूसरा सिम कार्ड दिया लेकिन, एक बार फिर वह भी चालू नहीं हो पाया। सिम्हा ने एयरटेल कस्टमर केयर को कॉल किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कंपनी को कई कॉल करने के बाद उन्हें तीसरा सिम कार्ड दिया गया और वह भी नहीं चला।

महीनों बाद खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

एयरटेल द्वारा उनकी मदद नहीं करने पर, उन्होंने 7 फरवरी, 2018 को एक कानूनी नोटिस भेजा और बाद में भारती एयरटेल लिमिटेड के खिलाफ शिकायत के साथ शांतिनगर में Bangalore 1st Additional District Consumer Disputes Redressal Commission से संपर्क किया। सिम्हा ने अपने मामले की पैरवी खुद की, जबकि भारती एयरटेल अदालत में पेश होने में विफल रही।

31 मार्च, 2023 को सुनाए गए अपने फैसले में, न्यायाधीशों ने फैसला सुनाया कि एयरटेल को सेवा में कमी के कारण उपभोक्ता को ब्याज के साथ 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा, साथ ही अदालती खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा। आदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर सारा पैसा सिम्हा को चुकाना होगा।