Juhi Chawla की 5G याचिका पर अदालत ने दिया बड़ा बयान, जानें क्या होगा 5जी रोलआउट पर इसका असर

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इंडिया में 5G ट्रायल शुरु होने के बाद से ही इसके रोलआउट को लेकर सभी सेक्टर में उत्सुकता देखी जा रही है। लेकिन, 5G आने से पहले इसे लेकर काफी हल्ला भी मचा हुआ है। कुछ समय पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस जूही चावला ने 5G रोल आउट के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। वहीं, कोर्ट ने अपने फैसले में जूही चावला को एक और बड़ा झटका दिया और अभिनेत्री जूही चावला पर 20 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका था। वहीं, अब 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर खारिज करने के एकल पीठ के फैसले को बालीवुड अभिनेत्री जूही चावला समेत अन्य ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

जूही चावला की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि आदेश जून महीने का है। आप अभी आए हैं और छह महीने बीत चुके हैं। वहीं, इस पर जूही चावला के वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि वर्तमान मामला ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है और उन्होंने जल्द सुनवाई का आग्रह किया। पीठ ने आग्रह को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 25 जनवरी 22 तय करते हुए कहा जल्द सुनवाई का कोई आधार नहीं है।

क्या थी जुही चावला की याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया गया है। आपको याद दिला दें कि अपनी याचिका में जूही चावला का कहना है कि 5G नेटवर्क के रेडिएशन का नागरिकों, जानवरों, वनस्पतियों और जीवों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। जूही चावला लंबे समय से टेलीकॉम कंपनियों के टावरों से निकलने वाले हानिकारक रेडिएशन के खिलाफ लोगों को जागरुक करने का काम करती हैं।

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जूही चावला ने याचिका में क्या कहा

जूही चावला ने अपनी याचिका में कहा है कि 5G टेक्नोलॉजी को लागू किए जाने से पहले इससे जुड़े तमाम रिसर्च पर बारीकी से गौर किया जाना चाहिए। यदि 5G नेटवर्क के लिए दूरसंचार उद्योग की योजना सफल होती है तो पृथ्वी में ऐसा कोई व्यक्ति, पशु-पक्षी, कीट, पेड़-पौधें नहीं होगा जो दिन के 24 घंटे और साल के 365 दिन इन टावरों से निकलने वाले आरएफ विकिरण के स्तर से बचने में सक्षम होगा जो कि मौजूदा विकिरण से 10 से 100 गुना तक ज़्यादा है।

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5G से नहीं हेल्‍थ को खतरा

इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन आइअनाइज़िंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) विभाग ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा है कि 5G उपकरण से निकलने वाली रेडिएशन का लेवल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की तुलना में बेहद ज्यादा कम है। 5जी रेडिएशन की मात्रा इतनी कम है कि यह किसी भी हालत में ह्यूमन बॉडी यानी मानव शरीर में मौजूद सेल्स को किसी भी तरह की कोई क्षति नहीं पहुंचा सकती है। बता दें कि यह रिसर्च संस्थान ही रेडियो ब्रॉडकास्टिंग के रिस्क को टेस्ट करता है और उन्होंने 5जी नेटवर्क का भी परीक्षण किया है, जिसे सुरक्षित माना गया है।