जानें किस चीनी फोन निर्माता ने माइक्रोमैक्स को छोड़ा पीछे

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साल की दूसरी ​छमाही भारतीय मोबाइल बाज़ार के लिए काफी उठा-पटक वाली साबित हो रही है। सैमसंग के नामी फोन में ब्लास्ट होना, चीनी समान का बहिष्कार करना तथा भारतीय करंनी बदलने से मोबाइल्स की मांग कम होना इत्यादि कारणों से भारत में मोबाइल बाज़ार काफी प्रभावित हुआ है लेकिन इन सबके बीच मोबाइल्स् की ​मांग-पूर्ति और आयात-निर्यात के आकड़ों की समीक्षा करने वाली आईडीसी की ओर से चौकाने वाली रिपार्ट सामने आई है।

आईडीसी इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मोबाईल बाज़ार में तिमाही आधार पर 17.5 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है जबकि जुलाई से सितंबर के बीच का यह वृद्धि दर 11 फीसदी का रही। आईडीसी के अनुसार भारत में आॅनलाइन सेग्मेंट में चीनी मोबाइल निर्माताओं का दबदबा रहा। आॅनलाइन सेग्मेंट में औसत ​वृद्धि दर 31 फीसदी का रही जबकि चीनी निर्माताओं ने 35 फीसदी की दर से विकास किया है।

रिपोर्ट पर नजर डालें तो आॅनलाइन सेग्मेंट में लेनोवो सबसे आगे खड़ा है और इसके थोड़ा पीछे ही शाओमी है। हालांकि लेनोवो की सफलता यहीं खत्म नहीं होती आॅनलाइन और आॅफलाइन को जोड़ दें तो मोटोरोला और लेनोवो को दोनों भारत में दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल निर्माता कंपनियां बन गई हैं। कुल मोबाइल फोन इंपोर्ट में लेनोवो शेयर 9.6 फीसदी का था जबकि माइक्रोमैक्स 7.5 फीसदी शेयर के साथ दूसरे नंबर पर रहा। हालांकि इसमें शाओमी का हिस्सा सिर्फ 0.1 फीसदी का था। आईडीसी द्वारा जारी इस लिस्ट में अपने नोट 7 को लेकर बुराईयां झेल रहे सैमसंग का पहले नंबर पर बने रहना भी अपने आप में काफी रोचक है। रिपोर्ट के अनुसार संपूर्ण मोबाइल बाज़ार का 23 फीसदी का हिस्सा सैमसंग की झोली में है।

चायनिज़ प्रोडक्टस् की भारतीय मोबाइल्स् मार्केट में बढ़ी भागीदारी की एक बड़ी वजह त्यौहारों से पहले भारत में हुए आयात को माना जा रहा है तथा साथ ही रिलांयस जियो की लॉन्चिंग के बाद आम जनता में 4जी सर्पोटिड मोबाइल हैंडसेट की डिमांड भी लेनोवो और शाओमी जैसी कंपनियों के लिए बेहद फायदेमंद मानी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर के दौरान भारत में 32.3 मिलियन स्मार्टफोन्स का आयात हुआ है। ​तथा इसी दौरान फीचरस् फोन्स् के आयात में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।