Wi-Fi स्लो हो गया है? इन आसान तरीकों से बढ़ाएं इंटरनेट की स्पीड

घर का वाई-फाई (Wi-Fi)धीमा हो जाए, तो छोटी-सी परेशानी भी बड़ी लगने लगती है। खास कर जब वेबसाइट खुलने में समय लगने लगे, वीडियो बार-बार बफर होने लगे या कोई जरूरी फाइल डाउनलोड होने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगे, तो समझ नहीं आता कि आखिर दिक्कत कहां है। कई बार हम तुरंत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर या राउटर को दोष देने लगते हैं, लेकिन हर बार समस्या इतनी बड़ी नहीं होती है। कुछ समय पहले मेरे घर में भी Wi-Fi की स्पीड अचानक धीमी हो गई थी। इंटरनेट चल तो रहा था, लेकिन इसकी परफॉर्मेंस इतनी खराब थी कि घर में जुड़े लगभग सभी डिवाइस पर इसका असर दिखने लगा था। ऐसे स्थिति में मैंने राउटर बदलने या तुरंत कस्टमर केयर से संपर्क करने के बजाय कुछ आसान सेटिंग्स और बेसिक ट्रिक्स आजमाने की सोची। इससे इंटरनेट की स्पीड में कुछ सुधार दिखाई देने लगी। हालांकि हर घर का नेटवर्क अलग होता है। इसलिए जरूरी नहीं कि जो तरीका मेरे Wi-Fi के लिए काम आया, वही आपके नेटवर्क पर भी उसी तरह काम करे। फिर भी इन आसान तरीकों को एक-एक करके आजमाने में कोई नुकसान नहीं है। हो सकता है कि इनमें से किसी एक से आपकी Wi-Fi की समस्या भी दूर हो जाए।
सबसे पहले करें Wi-Fi स्पीड टेस्ट
Wi-Fi धीमा होने पर सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि वास्तव में इंटरनेट की स्पीड कम है या सिर्फ किसी एक डिवाइस में समस्या है। इसके लिए एक छोटा-सा स्पीड टेस्ट काफी मददगार हो सकता है।
स्पीड टेस्ट आपके इंटरनेट कनेक्शन की डाउनलोड स्पीड, अपलोड स्पीड और लेटेंसी के बारे में जानकारी देता है। डाउनलोड स्पीड से पता चलता है कि इंटरनेट से आपके डिवाइस तक डाटा कितनी तेजी से आ रहा है। वहीं अपलोड स्पीड यह बताती है कि आपके डिवाइस से इंटरनेट पर डाटा कितनी तेजी से जा रहा है। लेटेंसी यानी देरी यह बताती है कि डिवाइस और सर्वर के बीच प्रतिक्रिया में कितना समय लग रहा है। इन तीनों चीजों को देखकर आपको अंदाजा हो सकता है कि समस्या आपके इंटरनेट कनेक्शन में है या Wi-Fi नेटवर्क में। उदाहरण के लिए, अगर स्पीड टेस्ट में स्पीड आपके प्लान के मुकाबले काफी कम आ रही है, तो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से समस्या हो सकती है। स्पीड टेस्ट के लिए आप Fast.com जैसी वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इंटरफेस काफी आसान है और टेस्ट शुरू करने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
राउटर को एक बार रीस्टार्ट करके देखें
कई बार Wi-Fi की समस्या का समाधान बेहद आसान होता है। अगर इंटरनेट अचानक स्लो हो गया है या कनेक्शन बार-बार टूट रहा है, तो राउटर को रीस्टार्ट करके देखना चाहिए। राउटर लंबे समय तक लगातार चलता रहता है। इसलिए छोटे-मोटे सॉफ्टवेयर ग्लिच, अस्थायी कनेक्शन की समस्या या बैकग्राउंड प्रोसेस की वजह से इसकी परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है।
राउटर को रीस्टार्ट करने से ये अस्थायी समस्याएं कई बार दूर हो जाती हैं। इसके लिए राउटर को पूरी तरह बंद करें और करीब 30 सेकंड तक बंद ही रहने दें। इसके बाद इसे दोबारा ऑन करें और कुछ मिनट इंतजार करें, ताकि यह इंटरनेट सर्विस से दोबारा कनेक्ट हो सके। अगर समस्या किसी अस्थायी गड़बड़ी की वजह से थी, तो इसके बाद Wi-Fi की स्पीड और स्थिरता में सुधार दिखाई दे सकता है।
चेक करें कितने डिवाइस Wi-Fi से जुड़े हैं
कई बार हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे घर के Wi-Fi से कितने डिवाइस जुड़े हुए हैं। स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट स्पीकर और दूसरे स्मार्ट डिवाइस लगातार नेटवर्क से कनेक्ट रह सकते हैं। इनमें से कुछ डिवाइस भले ही उस समय इस्तेमाल न हो रहे हों, लेकिन बैकग्राउंड में अपडेट, क्लाउड सिंक या दूसरे कामों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे उपलब्ध बैंडविड्थ कई डिवाइस में बंट जाती है।
इसलिए राउटर की सेटिंग्स में जाकर कनेक्टेड डिवाइस की लिस्ट चेक करें। अगर कोई ऐसा डिवाइस दिखाई देता है जिसे आप पहचानते नहीं हैं, तो यह भी संभव है कि कोई दूसरा व्यक्ति आपके Wi-Fi का इस्तेमाल कर रहा हो। ऐसी स्थिति में Wi-Fi पासवर्ड बदलना बेहतर है। एक मजबूत पासवर्ड रखें और जरूरत न होने पर पुराने या अनजान डिवाइस को नेटवर्क से हटा दें।
Wi-Fi का सही फ्रीक्वेंसी बैंड चुनें
अगर आपका राउटर 2.4GHz और 5GHz दोनों बैंड सपोर्ट करता है, तो सही बैंड चुनना भी Wi-Fi परफॉर्मेंस में फर्क डाल सकता है। 5GHz बैंड आमतौर पर ज्यादा तेज स्पीड और कम इंटरफेरेंस देता है, लेकिन इसकी रेंज 2.4GHz के मुकाबले कम होती है। दीवारें और दूसरी रुकावटें भी 5GHz सिग्नल को ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं। दूसरी तरफ, 2.4GHz की रेंज ज्यादा होती है और यह दीवारों के पार अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से पहुंच सकता है। हालांकि इसकी अधिकतम स्पीड आमतौर पर 5GHz से कम होती है।
इसलिए अगर आप राउटर के पास बैठे हैं और तेज इंटरनेट चाहते हैं, तो 5GHz नेटवर्क बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आपका कमरा राउटर से काफी दूर है या बीच में कई मोटी दीवारें हैं, तो 2.4GHz ज्यादा स्थिर कनेक्शन दे सकता है।
राउटर की जगह भी बदलकर देखें
कई बार समस्या राउटर की सेटिंग में नहीं, बल्कि उसकी लोकेशन में होती है। अगर राउटर किसी बंद कैबिनेट, कोने या बहुत नीचे रखा है, तो Wi-Fi सिग्नल को पूरे घर में फैलने में परेशानी हो सकती है। राउटर को घर के अपेक्षाकृत बीच वाले हिस्से में और थोड़ी ऊंचाई पर रखना बेहतर रहता है। कोशिश करें कि उसके आसपास बहुत ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या बड़ी धातु की वस्तुएं न हों।
अगर संभव हो तो राउटर को ऐसी जगह रखें जहां से सिग्नल ज्यादा से ज्यादा कमरों तक आसानी से पहुंच सके। कभी-कभी सिर्फ राउटर की जगह बदलने से ही Wi-Fi कवरेज में काफी अंतर दिखाई देता है।
बड़े घर के लिए Mesh Wi-Fi हो सकता है बेहतर विकल्प
अगर आपका घर बड़ा है और एक राउटर हर कमरे तक मजबूत सिग्नल नहीं पहुंचा पा रहा है, तो बार-बार राउटर की सेटिंग बदलने के बजाय Mesh Wi-Fi सिस्टम पर विचार कर सकते हैं। Mesh Wi-Fi में एक मुख्य यूनिट के साथ एक या उससे ज्यादा अतिरिक्त यूनिट यानी नोड्स होते हैं। इन्हें घर के अलग-अलग हिस्सों में रखा जाता है। ये सभी यूनिट आपस में मिलकर एक ही नेटवर्क तैयार करते हैं।
इसका फायदा यह है कि घर में घूमते समय फोन या लैपटॉप को बार-बार अलग-अलग Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट करने की जरूरत नहीं पड़ती है। डिवाइस आमतौर पर उस Mesh यूनिट से कनेक्ट हो जाता है, जिसका सिग्नल उस जगह बेहतर होता है। बड़े घर, कई कमरों वाले अपार्टमेंट या ऐसे ऑफिस जहां एक राउटर से हर जगह अच्छा सिग्नल नहीं मिलता है, वहां Mesh Wi-Fi काफी उपयोगी हो सकता है।
अगर फिर भी Wi-Fi स्लो रहे तो क्या करें?
अगर ऊपर बताए गए सभी तरीके आजमाने के बाद भी Wi-Fi की स्पीड में सुधार नहीं आता है, तो समस्या आपके इंटरनेट कनेक्शन या राउटर से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में अपने इंटरनेट प्लान की स्पीड और सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से किसी आउटेज की जानकारी चेक करें। अगर सिर्फ एक डिवाइस पर इंटरनेट स्लो है, तो समस्या उस डिवाइस की Wi-Fi सेटिंग, नेटवर्क ड्राइवर या हार्डवेयर से भी जुड़ी हो सकती है। लेकिन अगर घर के सभी डिवाइस पर इंटरनेट धीमा है, तो राउटर या इंटरनेट कनेक्शन को ज्यादा करीब से चेक करना होगा।
छोटी-छोटी चीजें भी Wi-Fi को बना सकती हैं तेज
Wi-Fi की समस्या आने पर हमेशा नया राउटर खरीदना या इंटरनेट प्लान अपग्रेड करना जरूरी नहीं होता है। कई बार राउटर को रीस्टार्ट करने, अनजान डिवाइस हटाने, सही फ्रीकेंसी चुनने या राउटर की जगह बदलने जैसे छोटे बदलाव से ही काफी फर्क पड़ सकता है।
अगर आपका घर बड़ा है और सिग्नल हर जगह नहीं पहुंचता है, तो Mesh Wi-Fi एक बेहतर लॉन्ग-टर्म विकल्प हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि समस्या को समझे बिना कोई बड़ा बदलाव न करें। पहले स्पीड टेस्ट करें, फिर एक-एक करके इन तरीकों को आजमाएं। इससे आपको यह समझने में भी आसानी होगी कि आपके Wi-Fi की असली समस्या आखिर कहां है।