
भारतीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण संस्थान (इसरो) ने आज एक नई कामयाबी हासिल की है। संस्थान द्वारा बुधवार को रिमोट सेंसिंग सैटलाइट रिसोर्ससैट-2ए को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया है। पीआईबी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस सैटलाइट को आज सुबह 10.24 मिनट में पीएसएलवी-सी36 यान की मदद से लॉन्च किया गया था।
कक्षा में स्थापित होने के बाद रिसोर्ससैट -2ए की दो सौर सरणियां स्वचालित रूप से तैनात हुईं जिसके बाद बेंगलुरू में इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएससी) ने उपग्रह का नियंत्रण संभाल लिया। दी गई जानकारी के अनुसार यह सैटलाइट अपने पूर्ववर्ती रिसोर्ससैट-1 और रिसोर्ससैट-2 की श्रेणी का ही सैटलाइट है जिसे कई अपग्रेड के बाद पेश किया गया है। इसे विशेष प्रकार के थ्री-टियर टायर इमेजिंग प्रणाली, पहले से बेहतर वाइड फील्ड सेंसर (एडब्ल्यूएफएस) रैखिक इमेजिंग सेल्फ स्कैनर -3 (एलआईएसएस-3) और रैखिक इमेजिंग सेल्फ स्कैनर-4 (एलआईएसएस- 4) कैमरों से युक्त किया गया है।

रिसोर्ससैट -2ए 1235 किलो वजन वाला इस सेटलाइट मदद से भारत में खनिज संसाधनों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। अथार्त यह बताएगा कि किसी जगह पर किस तरह की खनिज संपदा उपलब्ध है। इसके साथ ही रिसोर्ससैट -2ए द्वारा भेजे गए डेटा फसल क्षेत्र और फसल उत्पादन अनुमान, सूखे की निगरानी, मिट्टी मानचित्रण, फसल प्रणाली विश्लेषण और कृषि परामर्श से संबंधित कृषि अनुप्रयोगों आदि में काफी उपयोगी होगा।
आज के प्रक्षेपण के साथ ही पीएसएलवी ने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया है। यह सैटलाइट 5 साल तक के लिए सेवाएं देगा। इसे पृथ्वी की कक्षा से 817 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा। आज के रिसोर्ससैट -2ए के प्रेक्षपण सहित भारत के पीएसएलवी यान द्वारा प्रेक्षपित उपग्रहों की कुल संख्या 122 तक पहुँच गई है, जिनमें 43 उपग्रह भारतीय हैं और शेष 79 विदेशों के हैं।





















