मोबाइल को हिंदी में क्या कहते हैं, मोबाइल का मतलब हिंदी में जानें

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मोबाइल से तो आप परिचित ही होंगे। आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा हो, जिनके पास मोबाइल फोन न हों। I&B मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत में 1.2 अरब से अधिक मोबाइल यूजर्स हैं, जिसमें 60 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स हैं। लेकिन क्या आपको पता है, जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल हर रोज करते हैं, उसे हिंदी में क्या कहते हैं? बता दें मोबाइल फोन को हिंदी में ‘सचल दूरभाष यंत्र’ कहा जाता है। वहीं, टेलीफोन को हिंदी में ‘दूरभाष यंत्र’ कहा जाता है। मोबाइल फोन कॉल की शुरुआत का श्रेय मोटोरोला कंपनी को जाता है, जिसने पहली मोबाइल कॉल 3 अप्रैल, 1973 को की थी। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति आ गई, लेकिन भारत में पहला मोबाइल फोन 1995 में आया था। भले ही भारत में मोबाइल फोन की शुरुआत देर से हुई हो, लेकिन आज भारत में 1.2 अरब से अधिक मोबाइल फोन यूजर्स हैं।

मोबाइल को हिंदी में ये कहते हैं

मोबाइल फोन को हिंदी में ‘सचल दूरभाष यंत्र’ कहा जाता है, लेकिन यह बोलना आम लोगों के लिए उतना आसान नहीं, जितना की मोबाइल बोलना। शायद यही वजह ही है आम बोल चाल की भाषा में लोग मोबाइल, फोन या स्मार्टफोन जैसे शब्द का अधिक इस्तेमाल करते हैं। क्या आपको पता है कि मोबाइल का फुल फॉर्म क्या है? Mobile का पूरा नाम मॉडिफाइड ऑपरेशन बाइट इंटीग्रेशन लिमिटेड एनर्जी है। इसे हिंदी में सचल इसलिए भी कहा जाता है, क्योंकि इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।

भारत में 1995 में आया था मोबाइल

मोबाइल ने लोगों की जिंदगी को आसान बना दिया है। मोबाइल न होता, तो सोचिए कोसों दूर बैठे अपने किसी करीबी की आवाज सुनने, उसे देखने को भी तरस जाते। भारत में मोबाइल फोन ने 1995 में दस्तक दी थी। उस समय बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम से 31 जुलाई, 1995 को पहली बार मोबाइल पर बात की थी। तब से लेकर आज की बात करें, तो भारत दुनिया का अग्रणी टेलीकाम मार्केट बन चुका है।

भारत में ऐसे हुई मोबाइल की शुरुआत

16 रुपये था ऑउलगोइंग कॉल की कीमत

भारत में मोबाइल सेवा को ज्यादा लोगों तक पहुंचने में समय लगा, तो इसकी एक वजह महंगी कॉल रेट थी। शुरुआत में एक आउटगोइंग कॉल के लिए 16 रुपये प्रति मिनट तक शुल्क लगता था। उस समय आउटगोइंग कॉल्स के अलावा, इनकमिंग कॉल के लिए भी पैसे देने पड़ते थे। मोबाइल सेवा शुरू होने के पांच साल बाद तक मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 50 लाख पहुंच गई थी। आज भारत उन देशों में शामिल है, जहां सबसे कम दाम में मोबाइल डाटा उपलब्‍ध हैं।

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