
NASA Dart Mission: उल्कापिंड यानी Asteroid का नाम लगभग हर व्यक्ति ने सुना होगा। हिंदी भाषा में इसे क्षुद्रग्रह भी कहा जाता है जो अंतरिक्ष में घूमते हुए चट्टान के बड़े टुकड़े व पहाड़ होते हैं। अगर उल्कापिंड धरती पर गिर जाएं तो भारी नुकसान कर सकते हैं। पृथ्वी से टकराने वाले ये एस्टेरॉयड भयंकर सुनामी व विनाशकारी भूकंप का कारण भी बन सकते हैं। ऐसे खतरों से मानवजाति को बचाने के लिए हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने डार्ट मिशन (Dart Mission) शुरू किया था जो हमारी धरती को बचाने में पूरी तरह से कामयाब हुआ है। नासा के इस प्लैनेटरी डिफेंस सिस्टम (Planetary Defense System) में पहली बार में ही इतिहास रच दिया है।
क्या था डार्ट मिशन
अंतरिक्ष में सैकड़ों उल्कापिंड बिना लगाम के दौड़ते रहते हैं। ये लाखों-करोड़ों किलोग्राम वज़नी बड़े आकार के चट्टान के टुकड़े होते हैं जिनकी गति भी कई हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की होती हैं। अगर से विशालकाय पत्थर के टुकड़े धरती पर आ गिरें तो भारी विनाश कर सकते हैं। ऐसे ही खतरों को समझने के लिए देश-दुनिया के Scientist स्पेस पर रिसर्च करते रहते हैं। लेकिन अगर कोई Asteroid पृथ्वी की ओर आ रहा हो तो उससे बचा कैसे जा सकता है, यही उपाय खोजने के लिए NASA के वैज्ञानिकों ने Dart Mission शुरू किया था जिसका पूरा नाम Double Asteroid Redirection Test है।
Join #DARTMission experts on Tuesday, Oct. 11 at 2pm ET (1800 UTC) to learn the results of its impact with the distant asteroid Dimorphos—our first test of planetary defense: https://t.co/z8g0q2WPzX
Remember: DART is a test and there are no known asteroid threats to Earth. pic.twitter.com/PaEmhk7UNw
— NASA (@NASA) October 7, 2022
Dart Mission के तहत नासा ने एक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा था, जिसका लक्ष्य वहां पहले से ही घूम रहे एक उल्कापिंड को टक्कर मारना था। नासा के वैज्ञानिकों ने सोचा था कि इस जोरदार टक्कर से Asteroid को गति और दिशा में बदलाव आ जाएगा और उसका Orbit यानी कक्षा भी बदल जाएगी। नासा ने इसे प्लैनेटरी डिफेंस सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया था जो पूरी तरह से सफल रहा है। इस मिशन की सफलता के बाद उम्मीद प्रबल हो गई है कि हम भविष्य में अंतरिक्ष से आने वाले खतरों का भी मुकाबला कर सकते हैं। जरूर पढ़ें- Mangalyaan Mission: मंगलयान से टूटा संपर्क! खत्म हुआ दुनिया का सबसे सफल स्पेस मिशन
डार्ट मिशन हुआ कामयाब
dart spacecraft ने 27 सितंबर 2022 की सुबह 4.45 बजे डिडिमोस एस्टेरॉयड (Didymos Asteroid) के पास घूम रहे उल्कापिंड डाइमॉरफोस (Dimorphos Asteroid) को टक्कर मारी थी। इस टक्कर के तकरीबन दो हफ्ते बाद अब नासा ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया है कि यह टक्कर पूरी तरह से सटिक साबित हुई है तथा स्पेसक्रॉफ्ट व एस्टेरॉयड की टक्कर के बाद डाइमॉरफोस की गति में बदलाव भी आया है और उसका ऑर्बिट भी बदल गया है।
Dart Mission के मुख्य प्वाइंट्स
1) डार्ट मिशन स्पेसक्राफ्ट की लंबाई 19 मीटर थी, जो किसी साधारण क्रेन मशीन जितनी होती है।
2) यह स्पेसक्रॉफ्ट जिस डाइमॉरफोस एस्टेरॉयड से टकराया था उसकी लंबाई 163 मीटर थी, यानी हमारी Statue Of Unity से थोड़ी कम।
3) Dart Spacecraft का वज़न तकरीबन 550 किलोग्राम था वहीं Dimorphos Asteroid का वज़न 500 करोड़ किलोग्राम के करीब था।
4) साईज़ और वज़न में इतना ज्यादा अंतर होने के बावजूद डार्ट स्पेसक्राफ्ट अपने मकसद में कामयाब हुआ और डाइमॉरफोस की गति व कक्षा में बदलाव कर पाया।
5) इसके लिए काइनेटिक इम्पैक्टर (Kinetic Impactor) तकनीक का इस्तेमाल किया था, जिसके लिए 22,530 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से टक्कर मारी गई थी।
6) डाइमॉरफोस अपने मुख्य एस्टेरॉयड डिडिमोस (Didymos) एक चक्कर 11 घंटे 55 मिनट में अपना एक चक्कर पूरा करता था लेकिन अब टक्कर के बाद अब इसमें 32 मिनट की कमी आ गई है और यह अपना चक्कर 11 घंटे 23 मिनट में पूरा कर रहा है।
7) यह मिशन चमत्कारी इसलिए भी है क्योंकि नासा साइंटिस्ट्स को लगा था कि यह टकराव डाइमॉरफोस उल्कापिंड की गति में कम से कम 73 सेकेंड का ही बदलाव ला पाएगा। लेकिन इसमें उम्मीद के 25 गुणा अधिक का चेंज हुआ है।
8) नासा ने स्पेसक्राफ्ट में सामने की तरफ DRACO Camera लगाया गया था जिससे टकराव की लाइव फुटेज़ प्राप्त हुई हैं।
9) Dart Spacecraft में SMART Nav यानी ऑटोमैटिक नैविगेशन सिस्टम था, जिसके चलते धरती पर बैठकर ही लाखों मील दूर एयरक्रॉफ्ट को चलाया जा रहा था।
10) खबर है कि इस टक्कर के बाद डाइमॉरफोस से निकली धूल व पत्थर के टुकड़ों की वजह से तकरीबन 10 हजार किलोमीटर लंबी पूंछ बन गई है। ऐसे धूमकेतु को भारत में लोग पुच्छल तारा भी कह देते हैं।

























