Airtel ने फिर दिखाई अपनी ताकत, इस बार मुंबई में किया 5G ट्रायल, स्पीड रॉकट से भी तेज

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Airtel 5G trial: भारत में 5जी नेटवर्क को लेकर काम तेजी से चल रहा है। एक तरफ स्मार्टफोन कंपनियां लो बजट में अपने 5G फोन्स को पेश कर रही हैं तो वहीं, दूसरी ओर टेलीकॉम कंपनियां भी तेजी के साथ 5G ट्रायल कर रही हैं। देश में सबसे पहले 5G ट्रायल करने वाली कंपनी एयरटेल ने एक बार 5G नेटवर्क का मुंबई में ट्रायल शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं पिछली बार की तरह ही एक वीडियो में एयरटेल के 5जी नेटवर्क की स्पीड भी दिखाई गई है आपको याद दिल दें कि कंपनी ने पिछले माह गुरुग्राम में अपने 5G ट्रायल को किया था, जिसकी जानकारी हमें एक सूत्र द्वारा मिली थी।

Airtel 5G

एयरटेल दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार नोकिया के 5जी गियर का उपयोग करके 3500 मेगाहर्ट्ज बैंड में परीक्षण कर रहा है। हालांकि आधिकारिक 5G स्पेक्ट्रम नीलामी जल्द ही होने वाली नहीं है, DoT ने पहले ही सेवा प्रदाताओं को परीक्षण करने के लिए कुछ बैंडविड्थ आवंटित कर दी है। एयरटेल के मामले में, दिल्ली / एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में क्रमशः 3500 मेगाहर्ट्ज, 28 गीगाहर्ट्ज़ और 700 मेगाहर्ट्ज बैंड हैं। हम आने वाले हफ्तों में इन क्षेत्रों में और अधिक ट्रेल्स देखने की उम्मीद कर सकते हैं। एयटेल अगली बार कोलकाता में 5जी परीक्षण करेगा। इसे भी पढ़ें: Jio 5G vs Airtel 5G: जानें दोनों में क्या है अंतर और किसका 5जी है सबसे फास्ट
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Airtel ने मिलाया Tata Group के साथ हाथ

आपको याद दिला दें कि एयरटेल ने पिछले माह घोषणा की थी कि वह टाटा ग्रुप के साथ मिलकर भारत के लिए 5G नेटवर्क सॉल्यूशन देश में ही विकसित करेंगी, जिसका मतलब है कि भारत में एयरटेल मेड इन इंडिया 5जी टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है। बता दें कि ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां अन्य हार्डवेयर और टेक्नोलॉजी कंपनियों की तकनीकों के जरिए अपना नेटवर्क स्थापित करती है। इसे भी पढ़ें: Jio का दावा: भारत में सबसे पहले लॉन्च करेगा 5G सर्विस, क्या Airtel छूटेगी पीछे

जैसे Jio अपने 5G ट्रायल के लिए Samsung, Ericsson और Nokia के साथ हाथ मिलाया है। हालांकि, जियो ने भी अपनी खुद की तकनीक लाने की बात कही है। वहीं, प्रतीत होता है कि Airtel अपने 5G नेटवर्क को पूरी तरह से देसी रखना चाहती है। टाटा ग्रुप (Tata Group) ने ओ-आरएएन (O-RAN) तकनीक पर आधारित रेडियो और NSA/SA कोर विकसित किया है। यह तकनीक जनवरी 2022 से कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

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