
इंडियन Telecom Sector में मौजूद कंपनी Jio, Airtel और Vodafone idea को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक ने टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक राहत पैकेज को मंजूरी दे दी है। इस राहत पैकेज में टेलीकॉम कंपनियों को AGR बकाया के भुगतान पर चार साल की मोहलत दी गई है। इतना ही नहीं इसके अलावा ऑटोमैटिक रूट से आने वाले टेलीकॉम सेक्टर में 100 फीसदी विदेशी निवेश को भी मंजूरी दे दी है। इस फैसले को लेकर माना जा रहा है कि अब टेलिकॉम कंपनियों की परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की इजाजत
एजीआर में राहत देने के साथ ही सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की परमिशन दे दी है। आपको बता दें कि कि इस सेक्टर में पहले भी 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत थी। लेकिन, ऑटोमैटिक रूट से सिर्फ 49% एफडीआई की इजाजत मिलती थई, जिससे ज्यादातर निवेश के लिए सरकार की इजाजत लेनी पड़ती थी। अब ऑटोमैटिक रूट (Automatic Rout) से 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत मिल गई है। इससे सीधा टेलीकॉम कंपनियों को फायदा होगा।

AGR भुगतान के लिए मिला 4 वर्ष का समय
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के बकाये रकम को चुकाने को लिए टेलीकॉम कंपनियों को अब 4 साल समय मिल गया है। अगर कंपनी इस दौरान पूरा बकाया नहीं चुकाती है तो सरकार के पास बकाया रकम के एवज में कंपनी में हिस्सेदारी हासिल करने का ऑप्शन होगा। माना जा रहा है कि इससे एजीआर बकाया को लेकर कंपनियों का डर खत्म हो जाने की उम्मीद है। दरअसल, सरकार ने एजीआर की परिभाषा बदलने का भी फैसला किया है। नॉन-टेलीकॉम रेवेन्यू एजीआर में शामिल नहीं होगा।
मोबाइल बिल पर क्या होगा इसका असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेलआउट पैकेज और रिफॉर्म्स के उपायों से टेलीकॉम इंडस्ट्री की मुश्किलें दूर होंगी। हालांकि, यूजर्स के मोबाइल बिल या रिचार्ज में कमी आने की उम्मीद नहीं है। लेकिन, यह भी तय है कि इससे यूजर्स का मोबाइल बिल बढ़ने फिलहाल के लिए रुक जाएगा।





















