वीवो का बड़ा घोटाला: भारत में टैक्स भरने के बजाय दिखाया घाटा, चीन भेजे हजारों करोड़ रुपये

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चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी वीवो पर कथित तौर पर मनी लॉन्डरिंग के आरोप हैं। वीवो भारत में टैक्स चुकाने के बजाय रुपये सीधे चीन भेज रहा था। वीवो की इंडिया यूनिट पर 62,476 करोड़ रुपये चीन भेजे जाने का आरोप है। यह कंपनी का क़रीब 50 प्रतिशत टर्नओवर है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कुछ दिनों पहले ही Vivo Mobile India Pvt. Ltd. और कंपनी से जुड़े 23 ठिकानों पर छापेमारी की थी। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस छापेमारी के दौरान क़रीब 465 करोड़ रुपये सीज भी किए थे।

Vivo इंडिया ने नहीं किया टैक्स का भुगतान

NDTV की ख़बर के मुताबिक़, ED ने बयान जारी करते हुए बताया है कि Vivo India ने व्यापार में भारी नुक़सान का हवाला देकर भारत में टैक्स का भुगतान नहीं किया लेकिन कंपनी बड़ी रक़म चीन भेजी है। इसका मतलब है कि वीवो ने टैक्स चोरी का रास्ता खोज लिया, जिसे किसी भी तरह से कानूनी नहीं माना जा सकता है। जांच एजेंसियों ने वीवो इंडिया से जुड़े हुए 119 बैंक अकाउंट का ब्लॉक कर दिया है, जिसमें 465 करोड़, 73 लाख रुपये नकद और 2 किलो सोने जमा है। ईडी मनी लॉन्डरिंग मामले में जाँच कर रही है।

जांच में नहीं कर रहे सहयोग

ईडी का कहना है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि वीवो के अधिकारियों कई गड़बड़ की है। इसके साथ ही वीवो ने यह भी आरोप लगाया है कि वीवो इंडिया के कर्मचारी और कुछ चीनी नागरिक उनकी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही वीवो इंडिया के कर्मचारियों द्वारा जांच के दौरान कई डिजिटल उपकरणों को छिपाने का प्रयास भी किया।

हालांकि वीवो का कहना है कि वह जांच अधिकारियों का भारतीय क़ानून के मुताबिक पूरा सहयोग कर रहा है। वीवो भारतीय स्मार्टफ़ोन मार्केट का बड़ा प्लेयर है। काउंटरपॉइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक़, इंडियन स्मार्टफ़ोन मार्केट में वीवो की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। यह भी पढ़ें : 50MP कैमरा वाला मोटोरोला का जबरदस्त फोन सिर्फ 451 रुपये में घर लाएं, जानें ऑफर के बारे में सबकुछ

Xiaomi पर भी हो चुकी है कर्रवाई

वीवो पर हुई इस कार्रवाई को केंद्र सरकार द्वारा उन चीनी कंपनियों पर शिकंजा कसने के रूप में देखा जा रहा है, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चेरी जैसे आरोप लगते आए हैं। इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में ईडी ने शाओमी इंडिया पर विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन करने पर 5,551 करोड़ रुपये सीज किए थे।