
पिछले साल जब 1 सितंबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने भारत में अपनी 4जी सर्विस लॉन्च किया तो उसके बाद पूरा मोबाइल बाजार बदल गया। न सिर्फ कॉल और डाटा रेट कम हुआ बल्कि पिछले पांच सालों में जितने 3जी यूजर नहीं जुड़े उससे कहीं ज्यादा यूजर एक साल में 4जी से जुड़ गए। पंरतु मुकेश अंबानी के उस कॉन्फ्रेंस की एक बड़ी खास बात थी। उन्होंने न सिर्फ 4जी को लॉन्च किया था बल्कि उसी इवेंट से लोगों को 5जी का सपना भी दिखा दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका नेटवर्क 5जी रेडी है और 5जी आते ही उसे लॉन्च कर देंगे।

कुछ ही दिन बाद यह खबर आई कि भारत में 5जी नेटवर्क तैयार करने के लिए जियो ने सैमसंग के साथ करार किया है। जियो की इस तैयारी के बाद एयरटेल कहां पीछे रहने वाला था और कंपनी ने भी अपनी 5जी योजना का खुलासा कर दिया। एयरटेल ने जानकारी दी कि वह नोकिया के साथ मिलकर भारत में 5जी नेटवर्क तैयार करेगा। दो बड़े दिग्गजों के इस क्षेत्र में आने के बाद 5जी की आशाएं और प्रबल हो गईं। अब तक कहा जाता था कि मोबाइल तकनीक में भारत पीछे रहता है लेकिन 5जी को लेकर ऐसा नहीं लगता। हालांकि इन सब कोशिशों के बाद एक सवाल अब भी था कि नेटवर्क होने के बावजूद हैंडसेट में 5जी के लिए कोई बड़ी कोशिश देखने के नहीं मिली। पंरतु कल विश्व की प्रमुख मोबाइल चिपसेट निर्माता कंपनी क्वालकॉम ने 5जी मोबाइल चिपसेट का प्रदर्शन कर सभी कयासों पर विराम लगा दिया और साफ कर दिया कि 2019-20 तक 5जी सर्विस दस्तक दे देगी।
क्वालकॉम मोबाइल के लिए 5जी चिपसेट का प्रदर्शन किया है। कंपनी का दावा है कि यह विश्व का पहला 5जी मोबाइल चिपसेट है। कंपनी ने अपने सैन डियागो आॅफिस में इसका प्रदर्शन किया और वीडियो शेयर किया है। क्वालकॉम द्वारा एक्स50 5जी चिपसेट तैयार किया गया है तो 1जीबीपीएस प्रति सेकेंड की दर से डाटा कनेक्शन सपोर्ट करने में सझम है। कंपनी ने इस तकनीक का परीक्षण 28गीगाहट्र्ज एमएमवेब स्पेक्ट्रम बैंड पर किया है।
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क्वालकॉम द्वारा स्नैपड्रैगन एक्स50 चिपसेट को 3जीपीपी मानक पर तैयार किया गया है जो वैश्विक स्तर पर मोबाइल तकनीक का स्टैंडर निर्धारित करते हैं। हालांकि फिलहाल इस 5जी चिपसेट का परीक्षण किया गया है इसे व्यावसायिक तौर पर आने में समय लगेगा। कंपनी ने जानकारी दी है कि 2019 तक इस चिपसेट का उपयोग में मोबाइल में व्यावसायिक तौर होने लगेगा। अर्थात 2019 तक आप 5जी की आशा कर सकते हैं।
इस बारे में एक रिसर्च ग्रुप सीसीएस का कहना है कि वैश्विक स्तर पर 2021 तक 300 मिलियन से ज्यादा 5जी हैंडसेट बिकेंगे जो विश्व भर की मोबाइल सेल्स का औसतन 15 फीसदी होगा। ऐसे में आशा की जा सकती है कि जल्द ही आने वाले समय कुछ सालों में 5जी सर्विस का उपयोग बड़े पैमाने पर होगा और इसमें भारत का योगदान भी महत्वपूर्ण रहेगा।




















