
देश में इलेक्ट्रिक कार की डिमांड को देखते हुए अब इन्हें कम कीमत में बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दरअसल, अहमदाबाद की एक कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग (Gensol Engineering) ने दावा किया है कि वह करीब 6 लाख रुपये में ग्राहकों को इलेक्ट्रिक कार देने की योजना पर काम कर रही है। इंडिया बेस्ड अक्षय ऊर्जा समाधान प्रोवाइड कराने वाली कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग ने पिछले हफ्ते यूएस-आधारित ईवी स्टार्टअप के साथ हिस्सेदारी को औपचारिक रूप दिया है। जेनसोल इंजीनियरिंग का लक्ष्य भारत में घरेलू स्तर पर निर्मित ईवी बनाने के लिए ईवी स्टार्टअप्स की आरएंडडी सुविधाओं का उपयोग करना है। कंपनी वित्तीय वर्ष 2024 के लिए 500-600 करोड़ रुपये के राजस्व में भी वृद्धि देख रही है।
5-6 लाख रुपये हो इलेक्ट्रिक कार की कीमत
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जेनसोल के मैनेजिंग डायरेक्टर अनमलो सिंह जग्गी का कहना है कि भारत में सस्ती इलेक्ट्रिक कार की जरूरत है। यहां ऐसी कार चाहिए जिसकी कीमत 5-6 लाख रुपये हो। वहीं, जग्गी का कहना है कि भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में बड़े बदलाव की जरूरत है। यह तभी हो सकता है कि जब देश में इलेक्ट्रिक कार 5 लाख रुपये से कम में बेची जाए। इसे भी पढ़ें: Maruti Alto से भी छोटी इलेक्ट्रिक कार लॉन्च से पहले हुई स्पॉट, कीमत होगी बजट में!

टाटा के पास है भारत में सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार
आपको बता दें कि भारत में फिलहाल सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार Tata Tigor है, जिसकी कीमत 12.4 लाख रुपये है। जेनसोल इंजीनियरिंग भारत और विदेशों में सौर परियोजनाओं के लिए अवधारणा-से-कमीशनिंग सौर सलाहकार, निष्पादन और संचालन सेवाएं देती है। वहीं, कंपनी जेनसोल समूह की कंपनियों का एक हिस्सा है और इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण अनुबंध प्रदान भी करता है। इसे भी पढ़ें: अरे वाह! आ गई दुनिया कि पहली सोलर इलेक्ट्रिक कार, सिंगल चार्ज पर चलेगी 7 महीने!

जेनसोल इंजीनियरिंग ने 7 जुलाई को यूएस-आधारित ईवी स्टार्टअप के साथ एक टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए, की भारतीय बाजार में एक ईवी लाने की योजना है। कंपनी भारत में हैचबैक सेगमेंट पर विचार कर सकती है, जिसमें 46 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है। जेनसोल इस ईवी हैचबैक सेगमेंट का मूल्य लगभग 70,983 करोड़ रुपये है और उम्मीद है कि भारत में ईवी बाजार 2030 तक वार्षिक बिक्री की मात्रा में लगभग 2,00,000 यूनिट को छू लेगा, जो कि बाजार की क्षमता में 105 प्रतिशत की वृद्धि है।





















