पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है भयानक Solar storm! आज धरती से टकराएगी सौर तूफान की खतरनाक रेडिएशन

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बेशक भारत के कुछ इलाकों में मानसून और बारिश अपने चरम पर है लेकिन फिर भी देश-दुनिया के कई शहर, गांव व राष्ट्र भयानक गर्मी की चपेट में है। ब्रिटेन, अमेरिका व यूरोप कभी ना देखी गई गर्मी को झेल रहे हैं और सूरज की धूप पिछले सालों की तुलना में और भी ज्यादा तीखी व तेज होती जा रही है। सूरज की यह गर्मी सिर्फ धूप के रूप में नहीं बल्कि एक भयानक सौर तूफान यानी Solar storm का रूप भी ले रही है जो बेहद जल्द हमारी पृथ्वी से टकराने जा रहा है। धरती के चारों ओर एक गुमनाम खतरा जन्म ले चुका है और अब यह रेडिएशन्स की लहर के रूप में पृथ्वी की सतह को छूने आ रहा है।

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Solar Storm To Hit Earth

सूर्य से निकली खतरनाक रेडिऐशन्स धरती तक पहुंच रही हैं। रेडिएशन की यह लहर भयानक सौर तूफान के रूप में पृथ्वी से टकराने जा रही है जिसकी असर पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है। इस सोलर तूफान की शुरूआत हो चुकी है तथा इस वीकेंड पर फिर से एक नई रेडिएशन्स की लहर धरती को हिट करने जा रही है। इसे G1 Level Solar storm की कैटगरी का बताया गया है। इस सौर तूफान की जियोमैग्नेटिक एक्टिविटी ‘KP-4’ लेवल पर मापी जा चुकी है जिसके ‘KP-5’ लेवल तक पहुंचने के आसार है। ​वैज्ञानिकों को डर है कि इस सोलर तूफान से पूरी दुनिया में ब्लैकआउट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

सूर्य की रेडिएशन वेव्स और धरती की मैग्नेटिक फील्ड में होगा भयानक टकराव

यह सौर तूफान फिलहाल मानवजाति के लिए हानिकारक नहीं माना जा हा है लेकिन बताया गया है कि यह सीधे तौर पर हमारी सैटेलाइट्स को प्रभावित करेगा। अंतरिक्ष विशेषज्ञों के अनुसार इस सोलर स्ट्राम से सांप के आकार की रेडिएशन वेव्स निकलेगी जो धरती के मेग्नेटिक फील्ड से टकराएगी। रेडिएशन्स और मैग्नेटिक फील्ड के इस भयानक टकराव से communication satellites, radio signals और GPS services को नुकसान पहुंचेगा। वहीं मोबाइल फोन सिग्नल पर भी इसका असर हो सकता है। इस टकराव के चलते धरती पर अधिक उंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली जाने की भी आशंका जताई गई है।

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इससे पहले 1989 में आया था सोलर तूफान

ऐसा नहीं है कि यह Solar Storm पहली बार धरती से टकराने जा रहा है। इस जुलाई 2022 से पहले साल 1989 में भी धरती पर सूरत से निकली खतरनाक रेडिएशन्स का तूफान भी आ चुका है। इस वक्त कनाडा के क्यूबिक शहर पर इसका बुरा असर पड़ा था। उससे पहले वर्ष 1859 में भी पृथ्वी ऐसा ही एक सौर तूफान झेल चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार उस दौरान यूरोप और अमेरिका में टेलीग्राफ नेटवर्क काफी हद तक तबाह हो गया था। खैर इस बार धरती पर आ रहा यह सोलर तूफान कितना खतरनाक साबित होगा, यह खुलासा आने वाले दिनों में हो जाएगा।

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