
मोबाइल कंपनियों ने इंडिया में तो 5G Smartphones की भरमार कर दी है, लेकिन 5G Network अभी दूर की कौड़ी नज़र आ रहा है। Reliance jio, Airtel और Vodafone Idea देश में 5जी के परीक्षण में तो सक्सेस हो गई है लेकिन देश में 5जी नेटवर्क चालू होने और लोगों को 5G Internet मिलने में लंबा वक्त लगने वाला है। एक ओर जहां हम जैसे भारतीय 5जी की बाट में बैठे हैं वहीं दूसरी ओर साउथ कोरियन कंपनी LG ने यह अनाउंस कर दिया है कि कंपनी 6G की टेस्टिंग में भी सफल हो गई है।
LG Electronics (LG) ने wireless 6G terahertz का सफल टेस्ट कर लिया है। कंपनी ने टेराहर्ट्ज (THz) स्पेक्ट्रम का यूज़ करते हुए ट्रांसमिशन और रिसेप्शन का सफल प्रदर्शन किया है। अपनी इस उपलब्धि को एलजी ने अपने आधिकारिक न्यूजरूम के माध्यम से शेयर किया है। इस बड़े कारनामे में एलजी का साथ यूरोपियन रिसर्च लैब Fraunhofer-Gesellschaft ने दिया है और गत 13 अगस्त को इस अभूतपूर्व काम को अंजाम दिया गया है।

बर्लिन में हुआ सफल परीक्षण
एलजी और फ्रौनहोफर-गेसेलशॉफ्ट का यह संयुक्त प्रयास जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित किया गया था। इस टेस्ट के दौरान 6G तकनीक पर डाटा का ट्रांसफर Fraunhofer Heinrich Hertz Institute (HHI) से लेकर Berlin Institute of Technology के बीच किया गया था। यह दूरी तकरीबन 100 मीटर की थी और इसमें डाटा का भेजना और रिसीव करना दोनों टेस्ट सफल रहे हैं। यह टेस्ट किसी लैब के अंदर नहीं बल्कि बाहर खुले में किया गया था।
इस 6G तकनीक का हुआ है इस्तेमाल
यह वायरलेस डाटा ट्रांसफर 6G THz टेक्नोलॉजी पर किया गया है। प्राप्त जानकारी अनुसार इस 6जी टेराहर्ट्ज की रेंज कम थी और ट्रांसमिशन के दौरान दोनों एंटिना के बीच पावर जाने की समस्या सबसे गंभीर थी। इसके लिए खासतौर पर पावर एंप्लिफायर का निर्माण किया गया जो अल्ट्रा-वाइड फ्रिक्वेंसी के लिए भी सिग्नल को स्टेबल रखे। टेराहर्ट्ज स्पेक्ट्रम पर स्टेबल 6G सिग्नल देने के लिए यह ऐम्प्लिफायर 155-175GHz बैंड में स्टेबिलिटी के 15-डेसीबल मिलीवॉट तक का आउटपुट सिग्नल देने में सक्षम है।
LG और HHI अपने इस प्रयास में अडेप्टिव बीमफॉर्मिंग टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करने में भी सफल रही है। इस तकनीक के जरिये चैनल और रिसीवर की पॉजिशन में हो रहे बदलाव के हिसाब से उनकी मूवमेंट के अनुरूप ही हाई गेन एंटिना स्विचिंग भी होती रहती है। यह टेक्नोलॉजी नेटवर्क को स्ट्रॉन्ग रखने के लिए रिसीवर के मूवमेंट के साथ-साथ सिग्नल की दिशा भी बदल देता है। यह तकनीक कई पावर एम्पलीफायर्स के आउटपुट सिग्नल को जोड़ कर उन्हें एक निर्धारित एंटिना तक पहुंचाती है।




















