फोन में अपडेट मिलना बंद हो गया है? जानें इसका क्या मतलब है और क्या करें

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आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने या मैसेज भेजने का जरिया नहीं रह गया है। इसमें हमारी बैंकिंग डिटेल्स होती हैं, डिजिटल पहचान होती है और कई बार हमारी पूरी जिंदगी इसी एक डिवाइस में सिमट जाती है। ऐसे में जब फोन पर अपडेट आना बंद हो जाए, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या अब यह फोन इस्तेमाल के लायक नहीं रहा? आइए इस आर्टिकल में यही समझने की कोशिश करते हैं कि फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट और सिक्योरिटी अपडेट आना बंद हो जाए, तो फिर उस फोन का उपयोग बंद कर देना चाहिए या फिर नया फोन खरीदना चाहिए?

हाल के वर्षों में कई नए और प्रीमियम एंड्रॉयड स्मार्टफोन चार से सात साल तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट देने लगे हैं। हालांकि एंड्रॉयड इकोसिस्टम में यह बदलाव ज्यादा पुराना नहीं है। अगर आपने पिछले तीन या चार साल से अपना फोन अपग्रेड नहीं किया है, तो मुमकिन है कि आपका डिवाइस अब उस सपोर्ट पीरियड के आखिरी दौर में पहुंच चुका होगा, जिसका वादा कंपनी ने लॉन्च के समय किया था। भले ही आपका फोन आज भी ठीक से काम कर रहा हो, लेकिन अंदरूनी तौर पर स्थिति बदल चुकी हो सकती है।

मिड-रेंज और बजट फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए यह समस्या और भी आम है। ऐसे फोन पर अक्सर जल्द अपडेट बंद हो जाते हैं, हालांकि अब कंपनियां इस दिशा में धीरे-धीरे सुधार कर रही हैं। फिर भी, यह सच है कि Google Pixel 10 जैसे फोन, जिसे पूरे सात साल का सॉफ्टवेयर सपोर्ट मिलता है, वह भी हमेशा के लिए अपडेट नहीं पाएगा। साल 2032 में उसका भी सपोर्ट खत्म हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब फोन को अपडेट मिलना बंद हो जाए, तो असल में क्या फर्क पड़ता है?

OS अपडेट और सिक्योरिटी अपडेट में फर्क क्या है?

जब लोग कहते हैं कि फोन पर अपडेट आना बंद हो गया है, तो अक्सर वे यह साफ नहीं करते कि बात Android OS अपडेट की हो रही है या सिक्योरिटी अपडेट की। जबकि इन दोनों का असर बिल्कुल अलग होता है।

Android OS अपडेट का मतलब है नया एंड्रॉयड वर्जन और नए फीचर्स, जैसे- Android 16 या कंपनियों के कस्टम इंटरफेस, जैसे Samsung का One UI 8 या OnePlus का OxygenOS। ये अपडेट फोन को नया लुक देते हैं, नई सुविधाएं जोड़ते हैं और एक्सपीरियंस को बेहतर बनाते हैं। अच्छी बात यह है कि अगर आपके फोन को OS अपडेट मिलना बंद भी हो जाए, तो यह कोई तात्कालिक खतरा नहीं होता है।

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लेटेस्ट एंड्रॉयड वर्जन न होने की वजह से आपका फोन अचानक बेकार नहीं हो जाता है। Google Pay, Play Store और ज्यादातर थर्ड-पार्टी ऐप्स लंबे समय तक पहले जैसे ही काम करते रहते हैं। डेवलपर्स भी कोशिश करते हैं कि उनके ऐप ज्यादा से ज्यादा एंड्रॉयड वर्जन पर चलें, ताकि यूजर बेस बना रहे। यही वजह है कि OS अपडेट बंद होने के बाद भी आप सालों तक फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हां, इतना जरूर होता है कि नए फोन में आने वाले कुछ लेटेस्ट फीचर्स आपको नहीं मिलते है। समय के साथ एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म आगे बढ़ता है, नए डेवलपर टूल्स आते हैं और पुराने टूल्स हटाए जाते हैं। ऐसे में बहुत पुराने एंड्रॉयड वर्जन पर कुछ नए ऐप्स इंस्टॉल न हो पाएं, ऐसा भी हो सकता है। लेकिन यह स्थिति आमतौर पर तब आती है जब फोन पांच साल या उससे ज्यादा पुराना हो।

जहां असली चिंता की बात शुरू होती है, वह है सिक्योरिटी अपडेट।

सिक्योरिटी अपडेट क्यों है सबसे जरूरी?

फोन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सिक्योरिटी अपडेट सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। Google तकरीबन हर महीने Android Open Source Project के लिए सिक्योरिटी पैच जारी करता है, जिन्हें कंपनियां अपने फोन में लागू करती हैं। ये अपडेट उन खामियों को ठीक करते हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स आपके फोन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

आमतौर पर OS अपडेट बंद होने के बाद भी कुछ समय तक सिक्योरिटी अपडेट मिलते रहते हैं, लेकिन मिड-रेंज और बजट फोन में यह अवधि अक्सर छोटी होती है। कुछ साल पहले तक तो ज्यादातर एंड्रॉयड फोन सिर्फ दो साल ही सिक्योरिटी पैच पाते थे, इसलिए आज कई पुराने फोन पहले से ही जोखिम में हैं।

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सिक्योरिटी अपडेट सिर्फ वायरस से बचाने के लिए नहीं होते हैं। ये उन कमजोरियों या बग्स को भी ठीक करते हैं, जिनकी मदद से इंटरनेट के जरिए फोन को कंट्रोल किया जा सकता है, मेमोरी से जुड़ी दिक्कतें पैदा की जा सकती हैं या फिर चोरी होने की स्थिति में लॉक स्क्रीन को बायपास किया जा सकता है।

जब आपके फोन को सिक्योरिटी अपडेट मिलना पूरी तरह बंद हो जाता है, तो यह साफ संकेत होता है कि अब फोन को बदलने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि फोन तुरंत ही असुरक्षित हो जाता है। कई खतरनाक अटैक तभी काम करते हैं, जब यूजर खुद कोई गलत ऐप इंस्टॉल कर ले या किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दे। हालांकि भरोसेमंद सोर्स से ही ऐप डाउनलोड करने पर काफी हद तक जोखिम को कम कर सकती हैं।

फिर भी, समय के साथ बिना सिक्योरिटी पैच के फोन पर खतरा बढ़ता चला जाता है। आपको यह कभी पता नहीं होता कि अगला बड़ा सिक्योरिटी एक्सप्लॉइट कब सामने आ जाए।

जब फोन का अपडेट आना बंद हो जाए

यह जानकर आपको राहत मिल सकती है कि आज के समय में फोन की सुरक्षा सिर्फ मंथली सिक्योरिटी पैच तक सीमित नहीं है। Android 10 के बाद Google ने Project Mainline के तहत Google Play System Updates शुरू किए। इसके जरिए Google कई जरूरी सिस्टम कंपोनेंट्स को सीधे Play Store के माध्यम से अपडेट कर सकता है, बिना फोन निर्माता पर निर्भर हुए।

Google Play System Updates

Media Codecs, Media Framework, Permission Controller, Network Permission Configuration और ART जैसे कई अहम हिस्सों को Google Play System Updates के जरिए सुरक्षित रखा जाता है। हालांकि जिन फोन में Google Services नहीं होते, उन्हें इसका फायदा नहीं मिलता है, लेकिन भारत और पश्चिमी देशों में बिकने वाले लगभग सभी एंड्रॉयड फोन Google Play Services के साथ आते हैं।

फिर भी, यह व्यवस्था सिक्योरिटी पैच का पूरा विकल्प नहीं है। फोन में मौजूद कई ऐसे हिस्से होते हैं, जिन्हें सिर्फ मंथली सिक्योरिटी अपडेट से ही सुरक्षित किया जा सकता है। आज जब हम अपने फोन में बैंकिंग ऐप्स, डिजिटल वॉलेट और पर्सनल डाटा रखते हैं, तो सुरक्षा से समझौता करना सही फैसला नहीं है।

नया फोन लेने का सही समय कैसे जानें?

जब आपके फोन को मिलने वाले सिक्योरिटी अपडेट पूरी तरह खत्म हो जाएं, तो यह नया स्मार्टफोन देखने का संकेत माना जाना चाहिए। जरूरी नहीं कि आप उसी दिन फोन बदल लें, लेकिन एक साल या उससे ज्यादा पुराने सिक्योरिटी सिस्टम वाले फोन में संवेदनशील जानकारियां रखना समझदारी नहीं है।

नया फोन खरीदते समय सिर्फ कैमरा, प्रोसेसर या डिजाइन ही न देखें। यह भी जरूर जांचें कि कंपनी कितने साल तक OS और सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है। इस मामले में Google Pixel सीरीज और Samsung Galaxy S सीरीज सबसे आगे हैं, जो सात साल तक अपडेट सपोर्ट देती हैं। इनके किफायती मॉडल भी इसी नीति का फायदा उठाते हैं। वहीं, OnePlus, OPPO और कुछ अन्य ब्रांड्स अपने फ्लैगशिप फोन में लंबा सपोर्ट देने लगे हैं।

आखिरकार, स्मार्टफोन सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि आपकी डिजिटल पहचान है। और जब बात पहचान की हो, तो उसे सुरक्षित रखना आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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