Flying Taxi : चाइनीज कंपनी XPeng ने दुबई में टेस्ट किया फ्लाइंग टैक्सी, देखें वीडियो

XPeng दुनियाभर में कई सारे फ्लाइंग ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट XPeng X2 को चला रहा है।

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Flying Taxi : चाइनीज कंपनी ने सोमवार को इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी को टीज किया है। फ्लाइंग टैक्सी को ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलाने के लिए पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि इसकी मदद से पेसेंजर कम समय में जल्दी से अपने डेस्टिनेशन पर पहुंच सकते हैं। इस फ्लाइंग टैक्सी को चीन की कंपनी XPeng Inc ने पेश किया है। XPeng दुनियाभर में कई सारे फ्लाइंग ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट XPeng X2 को चला रहा है। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक़, फ्लाइंग टैक्सी प्रोजेक्ट में अब तक कुछ ही संख्या में सफल यात्री टेस्ट हुए हैं।

फ्लाइंग टैक्सी प्रोजेक्ट के इस डेमोनस्ट्रेशन की झलक से पता चलता है कि संभवत: एक दिन कटिंग एज टेक्नोलॉजी की मदद से पेसेंजर शहरों के ट्रैफ़िक से भरे सड़कों के ऊपर से उड़कर अपनी गंतव्य तक पहुँच सकते हैं। कंपनी ने सोमवार को एक वीडियो शेयर किया जिसमें एक ख़ाली कॉकपिट का इस्तेमाल किया गया था। यह मानवयुक्त फ्लाइंग टेस्ट को असल में जुलाई 2021 में आयोजित किया गया था।

इस मॉर्डन डिज़ाइन पेसेंजर व्हीकल में दो पेसेंजर के लिए जगह है, जिसमें आठ फ़ैन उपलब्ध हैं। कंपनी के मुताबिक़, इस फ्लाइंग व्हीकल की टॉप स्पीड 130KMpH हो सकती है।  यह भी पढ़ें : भारतीय कंपनी ने किया कमाल, पेश की एशिया की पहली हाइब्रिड फ्लाइंग कार

फ्लाइंग टैक्सी : एयरोप्लेन और हेलीकॉप्टर से कितना अलग है?

फ्लाइंग टैक्सी पॉइंट टू पॉइंट पिकअप और ड्रॉप फ़ैसिलिटी ऑफ़र करता है। सबकी एयरोप्लेन्स को टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट की ज़रूरत होती है। वहीं हैलीकॉप्टर वर्टिकली टेक ऑफ और लैंड होता है, जिसके लिए भी कुछ जगह निर्धारित होती हैं। वहीं ये इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल कहीं पर भी वर्टिकल लैंड और टेक ऑफ कर सकता है। ई-फ्लाइंग टैक्सी को सेफ, क्विक, फास्ट और पर्यावरण फ्रेंडली डिज़ाइन के लिए तैयार किया गया है। यह भी पढ़ें : 2022 में आ सकती है दुनिया की पहली Flying Car, खूबियां जानकर हो जाएंगे हैरान

फ्लाइंग टैक्सी के लिए करना होगा इंतजार

फ्लाइंग टैक्सी अभी अपनी शुरुआती दौर में है। ऐसे में फ्लाइंग टैक्सी उद्योग को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें बैटरी बैकअप, सिक्योरिटी प्रोब्लम, एरियल ट्रैफ़िक कंट्रोल और इंफ्रास्टेक्चर जैसी बुनियादी ज़रूरतें शामिल हैं। इसके साथ ही इस सर्विस को अफोर्डेबल बनाना भी काफ़ी ज़रूरी है।

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