
पिछले हफ्ते PM Narender Modi के नेतृत्व में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में टेलिकॉम क्षेत्र को सरकार ने बड़ी राहत दी है। दरअसल, सरकारी ने कंपनियों को चार साल तक एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) और स्पेक्ट्रम का बकाया नहीं चुकाने की इजाजत दी। वहीं, दूसरे ओर सरकार की तरफ से मोबाइल कनेक्शन लेने या फिर उसे प्री-पेड से पोस्टपेड और पोस्टपेड से प्री-पेड में बदलवाने के नियम में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इन बदलाव का सीधा असर उन करोड़ों मोबाइल यूजर्स पर पड़ेगा जो नई सिम या अपनी सिम को किसी दूसरी कंपनी में पोर्ट करा रहे हैँ। आइए आगे जानते हैं सरकार द्वारा बदले गए नियम के बारे में।
दरअसल, सरकार ने बैठक में फैसला लिया कि अब घर बैठे ही ग्राहक KYC से जुड़े सारे काम ऑनलाइन कर पाएंगे। केंद्र सरकार के फैसले के बाद से नया मोबाइल नंबर लेने के लिए डिजिटल तरीके से केवाईसी करानी होगी और साथ ही सिम पोर्ट कराने के लिए कोई फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा। इस प्रक्रिया को पूरा एक ऐप के माध्यम से किया जा सकेगा। वहीं, e-KYC के लिए मात्र 1 रुपए चार्ज देना होगा। जबकि प्री-पेड से पोस्ट-पेड और पोस्ट-पेड से प्री-पेड में कन्वर्ट करने के लिए नए KYC की जरूरत नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: डिटेल में जानें क्या है eSIM और कैसे Jio, Vodafone idea व Airtel यूजर्स करें इसे एक्टिवेट
बता दें कि अभी तक अगर कोई ग्राहक अपने प्रीपेड नंबर को पोस्टपेड में या पोस्टपेड को प्रीपेड में कन्वर्ट कराता था, तो उसे हर बार KYC प्रोसेस पूरा करना होता था। वहीं, अब सिर्फ एक बार KYC प्रोसेस करना होगा। आपको याद दिला दें कि टेलिकॉम कंपनियों की तरफ से नया फॉर्म भरने से लेकर पोर्ट कराने की प्रक्रिया के दौरान हर बार डॉक्यूमेंट के तौर पर आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर एक फोटो और साइन की जरूरत होती थी। इसे भी पढ़ें: Jio लाया छप्पर फाड़ ऑफर, इन सस्ते रिचार्ज पर मिल रहा 20% कैशबैक
गौरतलब है कि अभी यह प्रक्रिया पूरी तरह से लागू नहीं हुई है क्योंकि शुक्रवार को ही हमने अपने मोबाइल नंबर को दूसरी कंपनी पर पोर्ट कराया था। लेकिन, हमें पुराने प्रोसेस से होकर ही गुजरना पड़ा, जिसमें दोबारा kYC की जरूरत पड़ी।



















